नई दिल्ली। यदि आप एंड्रॉयड (Android) स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं, तो गूगल आपके डिवाइस की सुरक्षा को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत करने जा रहा है। गूगल जल्द ही एक ऐसा शानदार सिक्योरिटी फीचर पेश कर सकता है, जो आपके फोन में मौजूद 'डेड ऐप्स' (Dead Apps) की पहचान करेगा। यह फीचर उन ऐप्स के बारे में अलर्ट जारी करेगा, जिन्हें डेवलपर्स या खुद गूगल द्वारा प्ले स्टोर से हमेशा के लिए हटा (डिलिस्ट) दिया गया है। इस नए कदम से यूजर्स को सिक्योरिटी रिस्क वाले ऐप्स को पहचानने और उन्हें फोन से हटाने में बड़ी आसानी होगी।
क्या होते हैं 'डेड ऐप्स' और क्यों हैं ये खतरनाक?
वर्तमान में गूगल प्ले प्रोटेक्ट (Google Play Protect) केवल उन ऐप्स को लेकर अलर्ट भेजता है जिन्हें वह बेहद खतरनाक, मैलवेयर या सस्पेंडेड मानता है। लेकिन कई ऐप्स ऐसे भी होते हैं जिन्हें:
डेवलपर्स खुद प्ले स्टोर से हटा लेते हैं।
जो ऐप्स गूगल की नई पॉलिसियों का उल्लंघन करते हैं।
जो लंबे समय से अपडेट न होने के कारण आउटडेटेड हो चुके हैं।
ऐसे ऐप्स बिना किसी चेतावनी के यूजर्स के फोन में सालों-साल इंस्टॉल रहते हैं। चूंकि इन्हें प्ले स्टोर से हटा दिया जाता है, इसलिए इन्हें भविष्य में कोई सिक्योरिटी अपडेट भी नहीं मिलता, जिससे हैकर्स के लिए इन ऐप्स के जरिए फोन को हैक करना आसान हो जाता है।
कैसे काम करेगा नया नोटिफिकेशन सिस्टम?
'एंड्रॉयड अथॉरिटी' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गूगल प्ले स्टोर के लेटेस्ट वर्जन (51.4.19) के कोड में कुछ खास संकेत मिले हैं।
मिलेगा कस्टमाइज्ड अलर्ट:
यह नया सिस्टम यूजर के फोन को स्कैन करके उन ऐप्स की लिस्ट तैयार करेगा जो अब प्ले स्टोर पर मौजूद नहीं हैं। इसके बाद यूजर को स्क्रीन पर एक नोटिफिकेशन दिखाई देगा, जो सचेत करेगा कि इन ऐप्स को अब गूगल के जरिए कोई अपडेट नहीं दिया जाएगा। यदि फोन में एक से ज्यादा ऐसे डेड ऐप्स होंगे, तो नोटिफिकेशन का मैसेज भी उसी हिसाब से बदल जाएगा ताकि यूजर उन्हें तुरंत अनइंस्टॉल कर सके।
हालांकि, गूगल ने अभी तक इस फीचर के रोलआउट की आधिकारिक तारीख की घोषणा नहीं की है, लेकिन इसे जल्द ही सभी यूजर्स के लिए जारी किया जा सकता है।
APK फाइल्स डाउनलोड करना होगा मुश्किल; अनवेरीफाइड डेवलपर्स पर सख्ती
एंड्रॉयड यूजर्स की सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए गूगल एक और बड़ा कदम उठाने जा रहा है। अब प्ले स्टोर के बाहर से थर्ड-पार्टी एपीके (APK) फाइल्स इंस्टॉल करना पहले जितना आसान नहीं रहेगा।
फर्जी और खतरनाक ऐप्स पर लगाम लगाने के लिए गूगल एक सख्त इंस्टॉलेशन प्रोसेस तैयार कर रहा है:
डेवलपर मोड: यूजर को सबसे पहले अपने फोन का डेवलपर मोड ऑन करना होगा।
डिवाइस रीस्टार्ट: इसके बाद फोन को रीस्टार्ट करना अनिवार्य होगा।
24 घंटे का कूलडाउन पीरियड: रीस्टार्ट करने के बाद यूजर्स को 24 घंटे का इंतजार करना होगा।
बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन: यह कूलडाउन पीरियड खत्म होने के बाद ही यूजर अपने फिंगरप्रिंट या पिन के जरिए उस अनवेरीफाइड ऐप को इंस्टॉल कर पाएंगे।
निष्कर्ष:
गूगल के ये दोनों ही अपकमिंग फीचर्स एंड्रॉयड इकोसिस्टम को बेहद सुरक्षित बनाने वाले हैं। जहां एक तरफ डेड ऐप्स की चेतावनी से फोन का फालतू डेटा और रिस्क कम होगा, वहीं एपीके फाइल्स पर सख्ती से साइबर फ्रॉड के मामलों में भारी कमी आने की उम्मीद है।