यूरोपीय यूनियन का गूगल पर हंटर; सर्च नियमों के उल्लंघन पर लग सकता है अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड जुर्माना

सर्च रिजल्ट में अपनी सर्विसेज को फायदा पहुंचाने का आरोप; गूगल बोला— "नियमों के चक्कर में यूजर्स का अनुभव हुआ इतिहास में सबसे खराब!"

26 May 2026  |  108

 

 

ब्रसेल्स (बेल्जियम)। दुनिया के सबसे लोकप्रिय सर्च इंजन 'गूगल' (Google) की मुश्किलें यूरोपीय महाद्वीप में काफी बढ़ती नजर आ रही हैं। एकाधिकार और प्रतिस्पर्धा विरोधी नीतियों को लेकर यूरोपीय यूनियन (EU) टेक दिग्गज गूगल पर सैकड़ों मिलियन यूरो (हाई ट्रिपल-डिजिट मिलियन यूरो) का एक ऐतिहासिक और रिकॉर्ड-ब्रेकिंग जुर्माना लगाने की तैयारी कर रहा है। अगर यह कार्रवाई होती है, तो यूरोपीय यूनियन के सख्त 'डिजिटल मार्केट्स एक्ट' (DMA) के तहत यह दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय जुर्माना होगा।

क्या है आरोप? क्यों निशाने पर आया गूगल

रॉयटर्स की रिपोर्ट और जर्मन अखबार 'Handelsblatt' के दावों के मुताबिक, यूरोपीय कमीशन का मुख्य फोकस गूगल के कोर सर्च बिजनेस पर है।

अपनी ही सेवाओं को तरजीह देने का आरोप:

ईयू रेगुलेटर्स का आरोप है कि जब भी कोई यूजर गूगल पर कुछ सर्च करता है, तो गूगल पक्षपात करते हुए अपने एल्गोरिदम के जरिए अपनी ही सहयोगी सर्विसेज और प्लेटफॉर्म्स को सबसे ऊपर या ज्यादा प्राथमिकता देता है। ऐसा करने से बाजार में मौजूद अन्य प्रतिस्पर्धी कंपनियों और छोटे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

यूरोपीय यूनियन का साफ कहना है कि चाहे कोई कितनी भी बड़ी टेक कंपनी क्यों न हो, उसे डिजिटल बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा (Fair Competition) के नियमों का पालन करना ही होगा। इस मामले की आधिकारिक जांच मार्च 2025 में ही शुरू कर दी गई थी।

डिजिटल मार्केट्स एक्ट (DMA) बना गूगल की सिरदर्दी

यूरोपीय यूनियन ने गूगल, ऐपल और मेटा जैसे टेक दिग्गजों के असीमित दबदबे को नियंत्रित करने और डिजिटल बाजार में छोटे खिलाड़ियों को बराबरी का मौका देने के लिए डिजिटल मार्केट्स एक्ट (DMA) कानून लागू किया है।

यूरोपीय कमीशन के प्रवक्ता थॉमस रेग्नियर ने इस मामले पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि फिलहाल रेगुलेटर का ध्यान बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर है, लेकिन अगर गूगल नियमों के दायरे में नहीं आता है, तो सख्त से सख्त दंडात्मक कदम उठाने में कोई देरी नहीं की जाएगी। हाल ही में ईयू ने गूगल को अपनी सफाई और समाधान पेश करने के लिए अतिरिक्त समय भी दिया था।

गूगल का पलटवार: "यह सर्च इतिहास का सबसे बड़ा डाउनग्रेड"

दूसरी तरफ, गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट (Alphabet) ने यूरोपीय यूनियन के इन तमाम आरोपों और शर्तों का पुरजोर विरोध किया है। गूगल का तर्क है कि ईयू के नियमों और डीएमए (DMA) के दबाव में आकर जो बदलाव करने पड़े हैं, उससे यूजर्स का नुकसान हो रहा है।

यूजर एक्सपीरियंस हुआ खराब: गूगल के आधिकारिक प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा, "सर्च इंजन में किए गए ये बदलाव हमारी कंपनी के इतिहास का सबसे बड़ा डाउनग्रेड (स्तर में गिरावट) साबित हुए हैं। इससे यूरोपीय यूजर्स को अब बेहतर सर्च रिजल्ट नहीं मिल पा रहे हैं।"

शिकायतकर्ताओं को फायदा: कंपनी का आरोप है कि कुछ खास शिकायतकर्ता कंपनियों के व्यावसायिक फायदे के लिए आम यूजर्स के सर्च अनुभव को कमजोर किया जा रहा है।

आगे क्या होगा?

भले ही गूगल इस कानून को यूजर्स के लिए सिरदर्द बता रहा हो, लेकिन उसने यह भी स्पष्ट किया है कि वह भारी-भरकम जुर्माने से बचने के लिए रेगुलेटर्स के साथ बातचीत जारी रखने और बीच का रास्ता निकालने के लिए पूरी तरह तैयार है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या टेक किंग गूगल यूरोपीय यूनियन के आगे झुकता है या फिर उसे अरबों रुपये के इस जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।

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