सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला:' SIR पूरी तरह से संवैधानिक और वैध , मतदाता सूचियों के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' को हरी झंडी

सामान्य प्रक्रिया से अलग होने मात्र से रद्द नहीं हो सकता 'SIR'; सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के फैसले को सही ठहराते हुए खारिज कीं याचिकाएं।

27 May 2026  |  104

 

 

नई दिल्ली। बिहार में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को लेकर चल रहे कानूनी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के उस फैसले को पूरी तरह वैध और संवैधानिक ठहराया है, जिसके तहत बिहार में मतदाता सूचियों का 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (Special Intensive Revision - SIR) शुरू किया गया था।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि एसआईआर (SIR) प्रक्रिया को केवल इस आधार पर 'अल्ट्रा वायर्स' (अवैध) घोषित कर रद्द नहीं किया जा सकता कि यह मतदाता सूचियों के संशोधन की सामान्य प्रक्रिया से भिन्न है।

पहचान दस्तावेजों की मांग मनमानी नहीं: शीर्ष अदालत

सुनवाई के दौरान अदालत ने निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाताओं से मांगे जाने वाले पहचान दस्तावेजों के समूह को पूरी तरह सही ठहराया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा:

"यह प्रक्रिया कानूनी रूप से पूरी तरह मान्य है। मतदाता सत्यापन के लिए निर्धारित 11 जरूरी दस्तावेजों पर विचार करने और हमारे आदेश के माध्यम से पहचान के अन्य वैध सरकारी दस्तावेजों को शामिल किए जाने के बाद, हम इस तर्क को कतई स्वीकार नहीं कर सकते कि चुनाव आयोग द्वारा मांगे गए दस्तावेजों का समूह मनमाना है।"

अदालत ने आगे स्पष्ट किया कि यदि किसी मामले में चुनाव आयोग इस बात से संतुष्ट नहीं होता कि कोई व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल होने की वैधानिक शर्तों को पूरा करता है, तो आयोग का यह दायित्व होगा कि वह ऐसे मामलों को कानून के अनुसार निर्णय के लिए केंद्र सरकार के सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) के पास भेज दे।

'चुनाव आयोग ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग नहीं किया'

सर्वोच्च अदालत ने याचिकाओं को खारिज करते हुए निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर मुहर लगाई। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा:

कानून का पूर्ण पालन: एसआईआर प्रक्रिया के दौरान पूरी तरह से कानून और नियमों का पालन किया गया है और इस पूरी प्रक्रिया में कोई भी कानूनी खामी नहीं है। यह पुनरीक्षण कार्य इसी तरह आगे भी जारी रहेगा।

अधिकार सुरक्षित: इस फैसले के साथ ही चुनाव आयोग की सभी अंतर्निहित शक्तियां बरकरार रहेंगी। कोर्ट ने माना कि चुनाव आयोग ने अपने अधिकारों या शक्तियों का कोई दुरुपयोग नहीं किया है।

पीठ ने सुरक्षित रख लिया था फैसला

उल्लेखनीय है कि इस साल की शुरुआत में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इस मामले से जुड़ी सभी दलीलों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। दायर याचिकाओं में मुख्य रूप से यह दावा किया गया था कि चुनाव आयोग के पास इतने बड़े पैमाने पर 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) अभियान चलाने का कोई कानूनी या वैधानिक अधिकार नहीं है, जिसे अदालत ने सिरे से खारिज कर दिया।

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