वॉशिंगटन / बीजिंग। अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में एक बार फिर शीत युद्ध के दौर जैसी 'स्पेस रेस' (अंतरिक्ष दौड़) तेज हो गई है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने चंद्रमा पर इंसानों के रहने के लिए एक स्थायी बेस (Lunar Base) बनाने के अपने महत्वाकांक्षी मेगा-प्लान के अगले चरण का ब्लूप्रिंट जारी किया है। अमेरिका का लक्ष्य साल 2032 तक चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सेमी-परमानेंट (अर्ध-स्थायी) घर तैयार करना है, जहाँ इंसान लंबे समय तक रह सकेंगे।
हालांकि, इस रेस में अमेरिका को चीन से कड़ी चुनौती मिल रही है, जो खुद 2030 तक अपने अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर उतारने की तैयारी में जुटा है।
तीन चरणों में पूरा होगा नासा का $20 अरब का महामिशन
नासा ने मार्च 2026 में करीब 20 अरब डॉलर की इस विशालकाय योजना का आधिकारिक ऐलान किया था। नासा प्रमुख जेरेड इसाकमैन ने स्पष्ट शब्दों में अमेरिकी संकल्प को दोहराते हुए कहा है, "अमेरिका अब चांद को दोबारा नहीं छोड़ेगा।" नासा का यह पूरा प्लान तीन मुख्य हिस्सों में बंटा है:
चरण-1: रोबोटिक मैपिंग और लैंडिंग: शुरुआती चरण में एडवांस्ड रोबोटिक लैंडर और ड्रोन चांद की सतह का बारीकी से नक्शा तैयार करेंगे। इसी कड़ी में 'एस्ट्रोबोटिक' कंपनी का ग्रिफिन-1 लैंडर चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास स्थित 'नोबाइल क्रेटर' में लैंड करेगा। ये मशीनें हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों और अत्याधुनिक लेजर तकनीक से लैस होंगी।
चरण-2: लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट: नासा का लक्ष्य है कि 2029 तक 25 लॉन्च के जरिए करीब 4 मीट्रिक टन जरूरी सामान और विशेष रोवर्स (वाहन) चांद पर पहुंचाए जाएं, जो भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों को सामान ले जाने और घूमने में मदद करेंगे।
चरण-3: ऊर्जा और बुनियादी ढांचा (2032): चांद पर जीवन को सुचारू रखने के लिए वहां परमाणु रिएक्टर (Nuclear Reactor) और सोलर पावर सिस्टम स्थापित किए जाएंगे, जिसके बाद 2032 तक इंसानी बस्तियां बनकर तैयार हो जाएंगी।
अमेजन के बेजोस समेत निजी कंपनियों का मिला साथ
इस ऐतिहासिक मिशन को गति देने के लिए नासा ने निजी क्षेत्र के दिग्गजों से हाथ मिलाया है। इसमें मुख्य रूप से जेफ बेजोस (अमेजन के संस्थापक) की स्पेस कंपनी 'ब्लू ओरिजिन' शामिल है, जो 'एंड्योरेंस' नामक एक विशेष और बेहद शक्तिशाली लूनर लैंडर का निर्माण कर रही है। इसके अलावा इंट्यूटिव मशीन्स और एस्ट्रोबोटिक जैसी टेक कंपनियां भी इस मिशन का हिस्सा हैं। अमेरिका की योजना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कार्यकाल खत्म होने से पहले, यानी साल 2029 तक हर हाल में इंसानों को दोबारा चांद की सरजमीं पर उतार दिया जाए।
ड्रैगन की चुनौती: चीन का शेनझोउ-23 मिशन
अमेरिका के इस अभियान को मात देने के लिए चीन पूरी ताकत लगा रहा है। चीन ने 2030 तक इंसानों को चांद पर भेजने का लक्ष्य रखा है। हाल ही में चीन ने अपने 'शेनझोउ-23' (Shenzhou-23) मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च कर अपने अंतरिक्ष यात्रियों को 'तियांगोंग स्पेस स्टेशन' भेजा है, जो यह साबित करता है कि ड्रैगन अंतरिक्ष की इस जंग में अमेरिका के ठीक पीछे खड़ा है।
आखिर 'दक्षिणी ध्रुव' पर ही क्यों है सबकी नजर?
चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव (South Pole) इस समय पूरी दुनिया के लिए सबसे कीमती रणनीतिक इलाका बन चुका है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि:
वैज्ञानिकों का मानना है कि दक्षिणी ध्रुव के गहरे गड्ढों में अरबों टन जमी हुई बर्फ (Water Ice) मौजूद है। अगर इस बर्फ को निकालने में कामयाबी मिलती है, तो इससे अंतरिक्ष यात्रियों के लिए पीने का पानी, सांस लेने के लिए ऑक्सीजन और रॉकेट्स के लिए लिक्विड हाइड्रोजन-ऑक्सीजन जैसा कीमती ईंधन चांद पर ही तैयार किया जा सकेगा। इससे मंगल (Mars) जैसे भविष्य के अंतरग्रहीय मिशनों के लिए चांद एक बेहतरीन रीफ्यूलिंग स्टेशन बन जाएगा।
वैज्ञानिकों की चिंता: हालांकि, कई स्वतंत्र अंतरिक्ष विशेषज्ञों का मानना है कि नासा ने जो समयसीमा (2029 और 2032) तय की है, उसे हासिल करना बेहद कठिन होगा। रेडिएशन, शून्य गुरुत्वाकर्षण और इंसानों को वहां सुरक्षित लैंड कराना आज के दौर में भी विज्ञान की सबसे जटिल चुनौतियों में से एक है।