खेल जगत में शोक की लहर: एशियाई खेलों में देश को पहला शूटिंग गोल्ड दिलाने वाले राजा रणधीर सिंह का निधन

5 ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व, OCA के पहले भारतीय अध्यक्ष; खेल प्रशासन के 'भीष्म पितामह' ने 79 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस!

27 May 2026  |  67

 

 

नई दिल्ली/पटियाला: भारतीय खेल इतिहास के सबसे सुनहरे पन्नों को लिखने वाले दिग्गज निशानेबाज और वरिष्ठ खेल प्रशासक राजा रणधीर सिंह का निधन हो गया है। 79 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने आवास पर अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि वे पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी बीमारियों से पीड़ित थे और अस्पताल में भर्ती थे। उनके निधन की खबर आते ही देश-विदेश के खेल गलियारों और प्रशासनिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई है।

1978 बैंकॉक एशियाड: जब रणधीर ने रचा था इतिहास

18 अक्टूबर 1946 को पंजाब के पटियाला राजघराने में जन्मे राजा रणधीर सिंह ने भारतीय निशानेबाजी को वैश्विक पटल पर पहचान दिलाई।

ऐतिहासिक स्वर्ण: साल 1978 में बैंकॉक में आयोजित एशियाई खेलों में उन्होंने ट्रैप शूटिंग इवेंट में स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीतकर इतिहास रच दिया था। वे एशियाई खेलों में शूटिंग का गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय निशानेबाज बने थे।

ओलंपिक का सफर: उन्होंने 1968 से 1984 तक लगातार पांच ओलंपिक खेलों में तिरंगे का प्रतिनिधित्व किया। उनके इस बेमिसाल योगदान के लिए उन्हें प्रतिष्ठित अर्जुन अवॉर्ड से भी नवाजा गया था।

प्रशासनिक करियर में भी रहे 'किंग': निर्विरोध बने थे OCA अध्यक्ष

निशानेबाजी से संन्यास लेने के बाद राजा रणधीर सिंह ने खेल प्रशासन में कदम रखा और वहाँ भी अपनी अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने भारतीय और एशियाई खेलों को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया:

भारतीय ओलंपिक संघ (IOA): वे 1987 से 2014 तक आईओए के मानद सचिव-जनरल रहे।

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC): वे 2001 से 2014 तक आईओसी के सम्मानित सदस्य रहे।

ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया (OCA): रणधीर सिंह 1991 से 2015 तक इसके सचिव-जनरल रहे। इसके बाद सितंबर 2024 में उन्होंने इतिहास रचा, जब वे निर्विरोध ओसीए (OCA) के अध्यक्ष चुने गए। वे इस शीर्ष पद पर पहुंचने वाले पहले भारतीय बने और 45 एशियाई देशों ने एकमत से उन पर भरोसा जताया था। हालांकि, स्वास्थ्य कारणों के चलते 26 जनवरी 2026 को उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया था।

विरासत में मिला था खेलों से नाता

रणधीर सिंह को खेलों का शौक और प्रशासनिक कौशल अपने परिवार से विरासत में मिला था। उनका परिवार दशकों से भारतीय खेल विकास की रीढ़ रहा है:

गौरवशाली पारिवारिक इतिहास:

पिता (राजा भलिंद्र सिंह): साल 1947 से 1992 तक अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) के सदस्य रहे।

चाचा (महाराजा यादवेंद्र सिंह): इन्होंने साल 1951 में नई दिल्ली में आयोजित हुए देश के पहले एशियाई खेलों के सफल आयोजन में मुख्य सूत्रधार की भूमिका निभाई थी।

राजा रणधीर सिंह का जाना भारतीय खेल जगत के एक युग का अंत है। खेल के मैदान से लेकर दुनिया के सबसे बड़े खेल संघों के बोर्डरूम तक, भारत का मान बढ़ाने वाले इस दिग्गज को हमेशा याद किया जाएगा।

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