ममता बनर्जी को लगा बड़ा झटका: टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार का सभी पदों से इस्तीफा, भ्रष्टाचार और RG कर कांड पर उठाई आवाज

संसदीय दल के 'चीफ व्हिप' पद से हटाए जाने के बाद काकोली घोष का बड़ा कदम; शुवेंदु अधिकारी की बैठक में शामिल होने के बाद बंगाल की राजनीति में भूचाल!

27 May 2026  |  54

 

 

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की वरिष्ठ नेता और बारासात से सांसद डॉ. काकोली घोष दस्तीदार ने बुधवार (27 मई) को पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है। ममता बनर्जी और टीएमसी नेतृत्व के लिए इसे एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है। काकोली घोष ने महिला तृणमूल विंग के अध्यक्ष पद सहित अपने सभी पदों को छोड़ दिया है, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह सांसद और पार्टी की साधारण कार्यकर्ता के रूप में काम करती रहेंगी।

यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब हाल ही में ममता बनर्जी ने काकोली घोष दस्तीदार को लोकसभा में टीएमसी संसदीय दल के मुख्य सचेतक (Chief Whip) के पद से हटाकर यह जिम्मेदारी वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी को सौंप दी थी।

अंतरात्मा की आवाज: आरजी कर कांड और भ्रष्टाचार को बताया वजह

पदों से इस्तीफे के बाद काकोली घोष दस्तीदार ने एक बेहद भावुक और तीखा आधिकारिक बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि वह "गहरे मानसिक द्वंद्व और लंबे विचार-विमर्श" के बाद यह नैतिक निर्णय ले रही हैं।

काकोली घोष के बयान के मुख्य अंश:

आरजी कर मेडिकल कॉलेज कांड: "आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक महिला डॉक्टर की अस्वाभाविक मृत्यु और उस घटना से जुड़े सबूतों के साथ छेड़छाड़ के आरोपों ने पूरे समाज और मेरी अंतरात्मा को गहराई से झकझोर दिया है। मैंने इसके नैतिक प्रभाव को बहुत गहराई से महसूस किया है।"

भ्रष्टाचार पर नाराजगी: "पिछले एक दशक में बंगाल में राशन वितरण भ्रष्टाचार, शिक्षक भर्ती घोटाला और विभिन्न प्रशासनिक अनियमितताओं ने आम लोगों के मन में गहरा गुस्सा और अविश्वास पैदा कर दिया है।"

पार्टी के भीतर तानाशाही: "संगठन के भीतर लोकतंत्र खत्म हो रहा है। I-PAC (आई-पैक) से जुड़े परेशान करने वाले आरोपों और अपारदर्शी-अलोकतांत्रिक प्रभाव ने मुझे व्यथित किया है। इसके अलावा, एक अन्य पढ़ी-लिखी महिला सांसद द्वारा महिला सांसदों के प्रति अनुचित व्यवहार को रोकने में शीर्ष नेतृत्व से कोई सहयोग या सहानुभूति नहीं मिली।"

सांसद ने साफ किया कि उनका यह फैसला किसी व्यक्तिगत मनमुटाव के कारण नहीं है, बल्कि सार्वजनिक जीवन और लोकतंत्र के प्रति उनकी नैतिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।

बीजेपी नेता शुवेंदु अधिकारी की बैठक में शामिल होकर बढ़ाईं दूरियां

काकोली घोष दस्तीदार के इस बागी रुख की पटकथा मंगलवार को ही लिखी जा चुकी थी, जब उन्होंने छह अन्य टीएमसी विधायकों के साथ कल्याणी में पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता शुवेंदु अधिकारी की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में हिस्सा लिया था।

बैठक में शामिल अन्य नेता: बारासात सांसद के अलावा इस महत्वपूर्ण बैठक में देगंगा से टीएमसी विधायक अनिसुर रहमान विश्वास, स्वरूपनगर की बीना मंडल, हरोआ के मोहम्मद अब्दुल मतीन और बशीरहाट क्षेत्र के तीन अन्य विधायकों ने भी भाग लिया था। टीएमसी नेताओं का इस तरह विपक्ष के नेता की बैठक में जाना राज्य के राजनीतिक समीकरणों में बड़े उलटफेर की ओर इशारा कर रहा है।

क्या कहती है आगे की राह?

काकोली घोष ने फिलहाल टीएमसी छोड़ने से इनकार किया है। उन्होंने कहा, "मैं पार्टी नहीं छोड़ रही हूं। अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में मैं लोगों के साथ खड़ी रहूंगी और बंगाल के हित में काम करती रहूंगी।"

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चीफ व्हिप के पद से हटाए जाने और फिर शुवेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद काकोली घोष का यह इस्तीफा तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे अंदरूनी कलह को उजागर करता है, जो आने वाले दिनों में ममता बनर्जी की मुश्किलें और बढ़ा सकता है।

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