सैम ऑल्टमैन का यू-टर्न: बोले- "मुझे खुशी है कि AI से नौकरियां जाने का मेरा डर गलत साबित हुआ"

एआई से नहीं छिनेगा रोजगार! टेक दिग्गजों के बदले सुर; इंसानी क्रिएटिविटी और इमोशन्स को रिप्लेस करना नामुमकिन।

27 May 2026  |  58

 

 

सिडनी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के आने के बाद से दुनिया भर में सबसे बड़ा डर यह था कि यह तकनीक इंसानों की नौकरियां निगल जाएगी। जब ओपनएआई (OpenAI) का चैटजीपीटी (ChatGPT) लॉन्च हुआ, तब खुद टेक दिग्गजों ने चेतावनी दी थी कि लाखों व्हाइट-कॉलर जॉब्स खतरे में हैं। लेकिन अब, एआई क्रांति के अगुवा और ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन के सुर पूरी तरह बदल चुके हैं। सिडनी में आयोजित 'कॉमनवेल्थ बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया' की एक कॉन्फ्रेंस में ऑल्टमैन ने खुलकर स्वीकार किया कि एआई को लेकर उनका शुरुआती डर पूरी तरह गलत था।

"मुझे खुशी है कि मैं गलत साबित हुआ"

सैम ऑल्टमैन ने कॉन्फ्रेंस में कहा कि शुरुआती दौर में कंपनी ने इस बात का गलत अंदाजा लगाया था कि समाज और वर्कप्लेस इस नई टेक्नोलॉजी पर कैसे रिएक्ट करेंगे।

"मुझे बेहद खुशी है कि मैं इस मामले में गलत साबित हुआ। मुझे लगा था कि अब तक एंट्री-लेवल व्हाइट-कॉलर जॉब्स पर इसका बहुत बुरा असर पड़ेगा, लेकिन असलियत में ऐसा कुछ नहीं हुआ। जितनी नौकरियां जाने की आशंका थी, नुकसान उससे कहीं कम हुआ है।" —— सैम ऑल्टमैन, सीईओ, ओपनएआई

ऑल्टमैन ने जोर देकर कहा कि वे और उनकी कंपनी सच में लोगों के भविष्य की परवाह करते हैं। उन्होंने माना कि इंसानों के बीच होने वाली बातचीत, तालमेल और उनके अनुभवों को पूरी तरह से किसी सॉफ्टवेयर या कोड से बदलना अभी भी नामुमकिन है।

नौकरियां खत्म नहीं होंगी, बस उनका स्वरूप बदलेगा

इस जमीनी हकीकत ने एआई को लेकर ऑल्टमैन की पूरी समझ को बदल दिया है। उनका मानना है कि एआई के आने से अचानक नौकरियां खत्म होने के बजाय, काम करने का तरीका और नौकरियों का स्वरूप बदल जाएगा। नई वर्क-संस्कृति में भी निम्नलिखित मानवीय खूबियों की अहम भूमिका बनी रहेगी:

ह्यूमन कम्युनिकेशन (मानवीय संवाद)

क्रिएटिविटी (रचनात्मकता)

निर्णय लेने की क्षमता (Decision Making)

इमोशनल इंटेलिजेंस (भावनात्मक समझ)

ऑल्टमैन ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया कि भविष्य में नौकरियां पूरी तरह खत्म हो जाएंगी।

अमेज़न के जेफ बेजोस ने भी सुर में मिलाया सुर

एआई को लेकर अपना नजरिया बदलने वाले सैम ऑल्टमैन अकेले टेक लीडर नहीं हैं। ई-कॉमर्स दिग्गज अमेज़न (Amazon) के फाउंडर जेफ बेजोस ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त किए हैं। बेजोस का मानना है कि एआई वर्कर्स को रिप्लेस (स्थापित) करने के बजाय उन्हें और अधिक प्रोडक्टिव (उत्पादक) बनाएगा।

एक हालिया इंटरव्यू में बेजोस ने उन दावों को पूरी तरह नकार दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि एआई के कारण सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग या रेडियोलॉजी जैसे प्रोफेशन पूरी तरह गायब हो जाएंगे।

जेफ बेजोस का टेक मंत्र: "एआई कुछ रूटीन कामों को ऑटोमेट (स्वचालित) करने में मदद जरूर कर सकता है, लेकिन किसी बड़ी समस्या को पहचानने, क्रिएटिव तरीके से सोचने और जटिल सिस्टम को डिजाइन करने के लिए दुनिया को हमेशा इंसानी दिमाग की ही जरूरत रहेगी।"

निष्कर्ष: साफ है कि टेक जगत के शीर्ष कप्तानों के इस बदले रुख से उन लाखों युवाओं और प्रोफेशनल्स को बड़ी राहत मिलेगी, जो एआई के कारण अपने करियर को लेकर असमंजस में थे। एआई इंसानों का दुश्मन नहीं, बल्कि उनका सबसे बड़ा मददगार साबित होने जा रहा है।

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