20 साल बाद मौत के मुंह से लौट आया 'रहीम': 34 करोड़ की इंसानियत ने दिया जीवनदान, मां के गले लग छलके आंसू

सऊदी अरब की जेल से रिहा होकर बकरीद पर केरल पहुंचे अब्दुल रहीम; दुनिया भर के मलयाली समुदाय ने क्राउडफंडिंग से जुटाई थी 'ब्लड मनी'।

28 May 2026  |  93

 

 

केरल। कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों और इंसानियत जिंदा हो, तो मौत के मुंह से भी किसी को वापस लाया जा सकता है। केरल के अब्दुल रहीम की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है। सऊदी अरब की जेल में पिछले 20 सालों से मौत की सजा का सामना कर रहे अब्दुल रहीम आखिरकार इस हफ्ते अपने वतन, अपने घर लौट आए हैं। बकरीद के खास मौके पर जब रहीम ने अपने घर की चौखट पर कदम रखा, तो वहां का माहौल बेहद भावुक हो गया। दो दशकों से राह देख रही बूढ़ी मां के गले लगकर रहीम फूट-फूटकर रो पड़े। इस मिलन को देख वहां मौजूद हर शख्स की आंखें छलक आईं।

एक अनजानी भूल और 20 साल का सन्नाटा

यह दर्दनाक दास्तां नवंबर 2006 में शुरू हुई थी, जब रहीम अपने परिवार की आर्थिक तंगहाली को दूर करने और उनका सहारा बनने की उम्मीद के साथ सऊदी अरब गए थे। रियाद पहुंचने के कुछ ही हफ्तों के भीतर उनके जीवन ने एक ऐसा मोड़ लिया जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।

रहीम को एक सऊदी परिवार के दिव्यांग बेटे, 15 वर्षीय अनस अल फायिस की देखभाल का जिम्मा सौंपा गया था। एक दिन कार यात्रा के दौरान, रहीम के हाथ से गलती से अनस के लाइफ सपोर्ट सिस्टम (चिकित्सकीय उपकरण) की ट्यूब टूट गई। पलक झपकते ही अनस का दम घुट गया और उसकी मृत्यु हो गई। हालांकि रहीम ने अदालत में बार-बार कहा कि यह महज एक दुर्घटना थी, लेकिन दिसंबर 2006 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और साल 2012 में सऊदी की अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुना दी।

जब इंसानियत ने रचा इतिहास: ₹34 करोड़ की 'ब्लड मनी'

रहीम की जिंदगी की आस लगभग टूट चुकी थी, लेकिन तभी दुनिया भर में फैले मलयाली (केरल) समुदाय ने एक ऐसा मानवीय अभियान शुरू किया जिसकी मिसाल मिलना मुश्किल है। जब मृतक अनस का परिवार 'ब्लड मनी' (मुआवजा) के बदले रहीम को माफ करने के लिए तैयार हुआ, तो 'अब्दुल रहीम कानूनी सहायता समिति' का गठन किया गया।

इस समिति के जरिए दुनिया भर के लोगों से मदद की अपील की गई। देखते ही देखते एक सामूहिक लहर उठी और क्राउडफंडिंग के माध्यम से 34 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जुटा ली गई। यह अभियान आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े सामूहिक मानवीय प्रयासों में से एक बन गया।

असंभव से संभव तक का सफर

इस भारी रकम के भुगतान के बाद, जुलाई 2024 में सऊदी अदालत ने रहीम की मृत्युदंड की सजा को आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया। हालांकि, वहां के सार्वजनिक अधिकार कानून के तहत उन्हें 20 साल की जेल की सजा पूरी करनी थी, जो इस हफ्ते समाप्त हो गई।

20 साल बाद जब रहीम सऊदी अरब की जेल की कालकोठरी से बाहर निकलकर केरल की खुली हवा में पहुंचे, तो उनके लिए यह एक नया जन्म था। सामूहिक प्रयासों और करुणा की इस अविश्वसनीय कहानी ने साबित कर दिया है कि दुनिया में चाहे कितनी भी दूरियां हों, इंसानियत की ताकत हर दीवार को गिरा सकती है।

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