हाइब्रिड युद्ध और दुष्प्रचार के खिलाफ 'ग्लोबल अलायंस' की तैयारी: इजरायल ने भारत-अमेरिका संग मिलकर नया वैश्विक संगठन बनाने का रखा प्रस्ताव

इंटरनेट मीडिया पर फैलाए जा रहे झूठे नैरेटिव और 'आठवें मोर्चे' से निपटने के लिए इजरायल की बड़ी पहल; पीएम नेतन्याहू के 'हेक्सागन ऑफ अलायंस' में भारत बनेगा मजबूत स्तंभ।

28 May 2026  |  49

 

 

नई दिल्ली / यरूशलेम। दुनियाभर में लोकतांत्रिक मूल्यों, खुली समाज व्यवस्था और आधुनिक संस्कृति के विरुद्ध चल रहे गुप्त और छद्म (हाइब्रिड) हमलों से निपटने के लिए एक बड़ा वैश्विक गठबंधन आकार ले सकता है। इजरायल ने भारत, अमेरिका और अन्य प्रमुख लोकतांत्रिक देशों के साथ मिलकर गलत सूचनाओं (Misinformation) और साइबर खतरों से लड़ने के लिए एक समर्पित वैश्विक संगठन बनाने का प्रस्ताव रखा है। हाल ही में इजरायल आए भारतीय पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल के सामने वहां की सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस रणनीतिक योजना का खुलासा किया।

क्या है 'आठवां मोर्चा', जिससे चिंतित है इजरायल?

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल के दिनों में कई मंचों पर 'आठवें मोर्चे' का जिक्र किया है। अधिकारियों के मुताबिक, इजरायल इस समय गाजा, लेबनान, ईरान और यमन जैसे सात पारंपरिक मोर्चों पर भौतिक युद्ध लड़ रहा है, लेकिन इंटरनेट मीडिया पर फैलाई जा रही झूठी खबरें, बॉट अकाउंट्स और व्यवस्थित दुष्प्रचार उसके लिए 'आठवां मोर्चा' बन गया है।

"हम सात मोर्चों पर तो लड़ सकते हैं, लेकिन यह आठवां मोर्चा हमें बहुत नुकसान पहुंचा रहा है।"

बेंजामिन नेतन्याहू, प्रधानमंत्री, इजरायल

यह मोर्चा अमेरिका और यूरोप जैसे सहयोगी देशों में इजरायल के प्रति जनसमर्थन को कमजोर करने की एक सोची-समझी साजिश है। इजरायली जांच में सामने आया है कि आम नागरिकों जैसी दिखने वाली कई पोस्ट वास्तव में पाकिस्तानी या अन्य विरोधी नेटवर्कों द्वारा संचालित होती हैं, जो लोकतांत्रिक मूल्यों को 'पश्चिमी हस्तक्षेप' का नाम देकर दुष्प्रचार फैलाती हैं।

'ऑपरेशन सिंदूर' और भारत की चिंताएं

गलत सूचनाओं और हाइब्रिड युद्ध का यह खतरा सिर्फ इजरायल तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत भी इसका बड़ा शिकार रहा है। मई 2025 में हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत को भी ऐसे ही भीषण सूचना हमले (Information Warfare) का सामना करना पड़ा था।

प्रोपेगैंडा नेटवर्क: ऑपरेशन सिंदूर के समय पाकिस्तान, तुर्किये और चीन के प्रोपेगैंडा नेटवर्क और चीनी बॉट फार्म्स ने मिलकर भारत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।

झूठा नैरेटिव: भारतीय सेना द्वारा आतंकी ठिकानों पर की गई सटीक और सफल कार्रवाई के बावजूद, इंटरनेट मीडिया पर यह अफवाह फैलाई गई कि पाकिस्तानी सेना ने भारत को रोक दिया। भारतीय खुफिया एजेंसियां आज भी इन विरोधी अभियानों की लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं।

'हेक्सागन ऑफ अलायंस' और भारत की भूमिका

इजरायल का स्पष्ट मानना है कि इस जटिल और डिजिटल लड़ाई को कोई भी देश अकेले नहीं जीत सकता। इसी सोच के तहत पीएम नेतन्याहू 'हेक्सागन ऑफ अलायंस' (गठबंधन का षट्कोण) की अवधारणा पर काम कर रहे हैं, जिसमें भारत एक बेहद मजबूत स्तंभ के रूप में शामिल है। इस प्रस्तावित गठबंधन में ग्रीस और साइप्रस जैसी मध्यम शक्तियों को भी जोड़ने की तैयारी है, ताकि यह चरमपंथी ताकतों और हाइब्रिड खतरों के खिलाफ एक वैश्विक संतुलनकारी शक्ति बन सके।

संगठन/मंचवर्तमान सहयोग और भविष्य की रणनीति
प्रस्तावित नया संगठनमुख्य रूप से सूचना क्षेत्र में युद्ध, एआई-आधारित फैक्ट चेकिंग और साइबर सुरक्षा पर केंद्रित होगा।
I2U2 और क्वाड (QUAD)भारत, अमेरिका और यूएई जैसे देशों के साथ सूचना युद्ध और हाइब्रिड खतरों पर पहले से चर्चा जारी।
भारत-इजरायल द्विपक्षीय साझेदारीसाइबर सुरक्षा, खुफिया जानकारी साझा करने और उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी में घनिष्ठ सहयोग।

 

भारत की बढ़ती तैयारी

यद्यपि इजरायल के इस नए संगठन के प्रस्ताव पर भारत की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन भारत सुरक्षा के इस मोर्चे पर बेहद गंभीर है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद भारत ने अपनी सूचना सुरक्षा क्षमता को काफी उन्नत किया है। इसमें पीआईबी (PIB) की फैक्ट-चेक यूनिट, इंटरनेट मीडिया की चौबीसों घंटे निगरानी और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ साइबर इंटेलिजेंस शेयरिंग को मजबूत करना शामिल है। अब अमेरिका और यूएई जैसे देशों के साथ इस दिशा में बातचीत को और तेज कर दिया गया है।

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