संयुक्त राष्ट्र / नई दिल्ली। वैश्विक शांति और मानवता की रक्षा के लिए भारतीय सैनिकों का समर्पण और सर्वोच्च बलिदान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित होने जा रहा है। 'अंतरराष्ट्रीय संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षक दिवस' (29 मई) के अवसर पर, कर्तव्य की राह में अपने प्राणों की आहुति देने वाले दो भारतीय शांति रक्षकों को मरणोपरांत प्रतिष्ठित 'डैग हैमरस्कजोल्ड पदक' (Dag Hammarskjöld Medal) से सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही, भारतीय सेना की महिला अधिकारी मेजर अभिलाषा बराक को उनके अनुकरणीय कार्यों के लिए एक शीर्ष वैश्विक पुरस्कार से नवाजा जाएगा।
सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारत के दो वीर
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस द्वारा इस वर्ष जिन दो भारतीय जांबाजों को मरणोपरांत यह सर्वोच्च सम्मान दिया जा रहा है, उन्होंने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में 'ब्लू हेलमेट' (संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक) के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं:
लांस हवलदार हरभजन सिंह: उन्होंने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में संयुक्त राष्ट्र संगठन स्थिरीकरण मिशन (MONUSCO) में सेवा करते हुए देश और मानवता का मान बढ़ाया।
नायब सूबेदार सुजीत कुमार प्रधान: उन्होंने दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन (UNMISS) में तैनात रहकर शांति स्थापना के प्रयासों में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
मेजर अभिलाषा बराक को 'मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर'
भारत के लिए एक और गौरवपूर्ण क्षण में, संयुक्त राष्ट्र महासचिव द्वारा लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) में कार्यरत मेजर अभिलाषा बराक को वर्ष 2025 का 'मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर' पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।
मेजर अभिलाषा बराक को यह सम्मान पश्चिम एशियाई देश (लेबनान) में उनकी तैनाती के दौरान महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों, उनकी सुरक्षा और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए किए गए उनके असाधारण और उल्लेखनीय कार्यों के लिए दिया जा रहा है।
क्यों खास है 29 मई?
विश्व भर में हर साल 29 मई को 'संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों का अंतरराष्ट्रीय दिवस' मनाया जाता है।
उद्देश्य: यह दिन उन सभी पुरुषों और महिलाओं को समर्पित है जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में अदम्य साहस का प्रदर्शन किया।
श्रद्धांजलि: इस विशेष दिन पर दुनिया भर के उन शहीद 'ब्लू हेलमेट' सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी जाती है, जिन्होंने वैश्विक शांति और सुरक्षा की वेदी पर अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। भारत हमेशा से संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सबसे बड़ा सैन्य योगदान देने वाले देशों में अग्रणी रहा है, और यह सम्मान उसी अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है।