यरूशलेम / कुवैत सिटी। मध्य पूर्व (Middle East) में करीब तीन महीने से चला आ रहा नाजुक युद्धविराम (Ceasefire) आखिरकार गुरुवार तड़के पूरी तरह से टूट गया। ईरान के रणनीतिक तटीय शहर बंदर अब्बास के पास अमेरिकी सेना द्वारा किए गए एक बड़े हमले के जवाब में, ईरान के 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स' (IRGC) ने कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने 'अली अल-सलेम एयरबेस' पर मिसाइलों और ड्रोनों से भीषण जवाबी हमला कर दिया।
इस अचानक भड़की सैन्य झड़प के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। कुवैती सेना ने तुरंत अपने एयर डिफेंस सिस्टम (वायु रक्षा प्रणाली) को एक्टिवेट कर दिया और नागरिकों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किया है।
तड़के 4:50 बजे बंदर अब्बास पर अमेरिकी कार्रवाई
तस्नीम समाचार एजेंसी और अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह हाई-वोल्टेज ड्रामा बुधवार रात और गुरुवार तड़के शुरू हुआ:
व्यापारिक जहाज पर हमला: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजर रहे एक अमेरिकी वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाकर ईरान ने 4 वन-वे अटैक ड्रोन दागे।
अमेरिका का 'डिफेंसिव' एक्शन: अमेरिकी सेना ने मुस्तैदी दिखाते हुए चारों ईरानी ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया। इसके तुरंत बाद, ईरानी समयानुसार सुबह 4:50 बजे, अमेरिकी वायुसेना ने बंदर अब्बास एयरपोर्ट के पास मौजूद उस ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और ड्रोन लॉन्चर ठिकाने को बमबारी कर नेस्तनाबूद कर दिया, जहां से पांचवां ड्रोन लॉन्च करने की तैयारी चल रही थी। पेंटागन ने इसे पूरी तरह 'रक्षात्मक और सीजफायर बनाए रखने के लिए की गई कार्रवाई' करार दिया।
तिलमिलाए ईरान का कुवैत पर पलटवार
ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को युद्धविराम का सीधा उल्लंघन और अपनी संप्रभुता पर हमला माना। अमेरिकी हमले के ठीक दो घंटे बाद, IRGC ने कुवैत में अमेरिकी सैनिकों की मेजबानी करने वाले 'अली अल-सलेम एयरबेस' पर मिसाइलें दाग दीं।
कुवैत सेना का बयान:
"देश में सुनाई दे रहे धमाके दुश्मन के मिसाइल और ड्रोन हमलों को हमारे एयर डिफेंस नेटवर्क द्वारा हवा में ही इंटरसेप्ट (ध्वस्त) किए जाने के कारण हो रहे हैं। सभी नागरिक सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन करें।"
क्यों पटरी से उतरी शांति वार्ता?
इसी साल अप्रैल में दोनों देशों के बीच युद्धविराम की घोषणा हुई थी और अंतिम शांति समझौते के मसौदे (Final Draft) को तैयार करने के लिए ईरानी प्रतिनिधि कुवैत में ही मौजूद थे। लेकिन बातचीत के अचानक टूटने के पीछे दो बड़ी वजहें सामने आ रही हैं:
संवर्धित यूरेनियम पर ट्रंप का अड़ियल रुख: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कैबिनेट बैठक के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया कि अमेरिका को किसी भी कीमत पर ईरान का संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) चाहिए, जिसे सौंपने से ईरान ने साफ इनकार कर दिया।
होर्मुज जलमार्ग पर प्रभुत्व की जंग: ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान और ओमान के संयुक्त प्रबंधन वाले दावों को 'पूरी तरह से मनगढ़ंत' बताते हुए खारिज कर दिया, जिससे कूटनीतिक रास्ते बंद हो गए।
मौके का फायदा उठा इजरायल ने लेबनान पर बोला धावा
जैसे ही अमेरिका और ईरान के बीच सीधी भिड़ंत शुरू हुई, क्षेत्र में एक और मोर्चा खुल गया। इजरायल ने तुरंत इस स्थिति का फायदा उठाते हुए लेबनान पर अपने हमले तेज कर दिए।
| देश/संगठन | वर्तमान स्थिति और भूमिका |
|---|---|
| इजरायल | पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की हरी झंडी के बाद लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर ताबड़तोड़ बमबारी शुरू। |
| हिजबुल्लाह (लेबनान) | ईरान के नेतृत्व वाले 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' (Axis of Resistance) का मुख्य हिस्सा, इजरायली हमलों का कर रहा सामना। |
| कुवैत | दो महाशक्तियों की जंग के बीच फंसा; अमेरिकी बेस होने के कारण ईरान के सीधे निशाने पर आया। |
इस ताजा सैन्य टकराव ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों और व्यापारिक जलमार्गों की सुरक्षा को एक बार फिर बेहद गंभीर और अनिश्चित मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है।