महाशक्तियों की महाडील: अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते का ब्लूप्रिंट लीक; पाकिस्तान बनेगा 'गारंटर', ट्रंप करेंगे $300 अरब का निवेश

60 दिनों के अंतरिम समझौते से बदलेगी दुनिया की जियोपॉलिटिक्स; 30 दिन में पूरी तरह खुलेगा होर्मुज जलडमरूमध्य। राष्ट्रपति ट्रंप और मुज्तबा खामेनेई के हस्ताक्षरों का इंतजार।

29 May 2026  |  70

 

 

वॉशिंगटन / तेहरान: दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर ले जाने वाले अमेरिका और ईरान के तनावपूर्ण रिश्तों के बीच एक बेहद चौंकाने वाली और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले संभावित परमाणु समझौते (Nuclear Deal) का पूरा ब्योरा (ब्लूप्रिंट) लीक हो गया है। इस समझौते की सबसे बड़ी बात यह है कि पाकिस्तान इस अंतरिम समझौते पर 'गारंटर' (ضामिन) के तौर पर हस्ताक्षर करेगा।

यह समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई के अंतिम हस्ताक्षरों के बाद पूरी तरह अमल में आ जाएगा। अमेरिकी उपराष्ट्रपति और वार्ता दल के प्रमुख जेडी वेंस ने इस बात की पुष्टि की है कि बातचीत में बड़ी प्रगति हुई है, हालांकि अभी राष्ट्रपति ट्रंप के आधिकारिक हस्ताक्षर होना बाकी हैं।

2 फेज में पूरी होगी डील: 60 दिनों का 'MoU' तय करेगा भविष्य

सऊदी अरब के प्रतिष्ठित अखबार 'अल हदथ' के मुताबिक, इस महाडील को दो चरणों (Phases) में पूरा किया जाएगा:

पहला फेज (अंतरिम समझौता): इसके तहत 60 दिनों के लिए एक 'सहमति पत्र' (MoU) लागू होगा, जिसमें दोनों देश एक-दूसरे को तात्कालिक राहत देंगे।

दूसरा फेज (पूर्ण समझौता): अंतरिम पाबंदियां हटने और विश्वास बहाली के बाद पूर्ण व स्थायी समझौते के लिए उच्च स्तरीय बैठकें आयोजित की जाएंगी।

क्या-क्या है इस ऐतिहासिक परमाणु डील में?

अमेरिकी आउटलेट Axios और New York Times के मुताबिक, इस 60-दिवसीय समझौते के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) खुलेगा: वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के लिए सबसे संवेदनशील माने जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग बिना किसी रोक-टोक और बिना किसी 'टोल' के शुरू होगी। ईरान ने वादा किया है कि समझौते के 30 दिनों के भीतर वह इस समुद्री रास्ते को पूरी तरह 'क्लीन' और सुरक्षित कर देगा।

परमाणु हथियारों पर रोक: ईरान ने इस समझौते के तहत परमाणु हथियार न बनाने का लिखित वादा किया है। हालांकि, उसके पास मौजूद 440 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) का क्या किया जाए, इस पर फैसला मुख्य समझौते (Phase 2) में होगा। फिलहाल यह यूरेनियम ईरान में ही रहेगा।

जब्त फंड की वापसी: कतर के बैंकों में फ्रीज (जब्त) पड़ा ईरान का पैसा उसे वापस मिलेगा। ईरान की मांग है कि डील की शुरुआत में ही उसे कम से कम 12 अरब डॉलर ($12 Billion) की राशि दी जाए, जिसे वह देश में राहत एवं विकास कार्यों में खर्च करना चाहता है।

ट्रंप का मास्टरस्ट्रोक: ईरान में $300 अरब का महा-निवेश

इस डील का सबसे चौंकाने वाला आर्थिक पहलू अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का व्यक्तिगत निवेश प्रस्ताव है। 'न्यूयॉर्क टाइम्स' के अनुसार, यदि यह परमाणु समझौता सफल रहता है, तो डोनाल्ड ट्रंप खुद ईरान के तेल (क्रूड ऑयल) और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में 300 अरब डॉलर ($300 Billion) का निवेश कर सकते हैं।

ओमान वार्ता का कनेक्शन: पिछले साल ओमान में हुई गुप्त बातचीत के दौरान खुद ईरान ने अमेरिका को यह ऑफर दिया था कि ट्रंप चाहें तो कच्चे तेल के उत्पादन में अमेरिकी कंपनियों के जरिए निवेश करवा सकते हैं। उस वक्त बात नहीं बन पाई थी, लेकिन अब ट्रंप इस पर गंभीरता से आगे बढ़ रहे हैं।

पाकिस्तान की भूमिका और ईरान का रुख

जहाँ एक तरफ ईरानी सूत्रों ने इस डील पर अभी तक कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान नहीं दिया है, वहीं ईरान की 'मेहर समाचार एजेंसी' ने पाकिस्तानी सूत्रों के हवाले से पुष्टि की है कि दोनों धुर-विरोधी देश इस ऐतिहासिक डील के बेहद करीब हैं। इस समझौते में पाकिस्तान को गारंटर बनाना दक्षिण एशिया और मिडल-ईस्ट की राजनीति में एक नया समीकरण पैदा कर सकता है।

यदि यह समझौता अगले कुछ दिनों में अमलीजामा पहन लेता है, तो न सिर्फ दुनिया में तेल की कीमतें नियंत्रित होंगी, बल्कि डिजिटल युग में वैश्विक मंदी का खतरा भी काफी हद तक टल जाएगा।

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