मॉस्को / बीजिंग: क्या इंसान की उम्र को बढ़ाकर 150 साल किया जा सकता है? क्या विज्ञान की मदद से बुढ़ापे को हमेशा के लिए टाला जा सकता है? ये सवाल अब कोरी कल्पना नहीं, बल्कि दुनिया की दो महाशक्तियों के राष्ट्रध्यक्षों की गहरी दिलचस्पी और अरबों डॉलर के खुफिया प्रोजेक्ट का हिस्सा बन चुके हैं।
'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की एक सनसनीखेज रिपोर्ट के अनुसार, रूसी राष्ट्रपति कार्यालय (क्रेमलिन) उम्र बढ़ाने के आधुनिक तौर-तरीकों और तकनीकों की खोज के लिए एक बेहद गुप्त और महत्वाकांक्षी वैज्ञानिक शोध करवा रहा है। इस सीक्रेट प्रोजेक्ट पर रूस पानी की तरह पैसा बहा रहा है और इस पर 26 अरब डॉलर (करीब 2,500 अरब रुपये) खर्च किए जा रहे हैं।
बीजिंग से लीक हुआ था पुतिन-जिनपिंग का 'ऑडियो'
दरअसल, इस महाप्रोजेक्ट की सुगबुगाहट सितंबर 2025 में बीजिंग से सामने आए एक लीक ऑडियो से हुई थी। इस ऑडियो में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच बेहद गोपनीय बातचीत दर्ज थी।
लीक बातचीत का सच: बातचीत के दौरान पुतिन ने जिनपिंग से कहा था कि इंसानी शरीर के खराब हो रहे अंगों (Organs) में बदलाव करके मनुष्य की उम्र को 150 साल तक बढ़ाया जा सकता है। इस लीक के बाद दुनिया भर में बहस छिड़ गई थी कि क्या ये दोनों वैश्विक नेता खुद को 150 साल तक जीवित रखने के लिए किसी गुप्त तकनीक पर काम कर रहे हैं? अब क्रेमलिन की नई रिपोर्ट ने इन कयासों पर मुहर लगा दी है।
पुतिन खुद कर रहे हैं निगरानी, बेटी मारिया के हाथों में कमान
73 वर्षीय राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन खुद इस अति-संवेदनशील और सीक्रेट वैज्ञानिक प्रोजेक्ट की कड़े स्तर पर देखरेख (मॉनिटरिंग) कर रहे हैं। इस अभियान को पूरी तरह वफादार और पारिवारिक घेरे में रखा गया है:
प्रोजेक्ट लीडर: इस मिशन का नेतृत्व पुतिन की बेटी मारिया वोरोंत्सोवा (जो खुद एक जानी-मानी एंडोक्रिनोलॉजिस्ट हैं) कर रही हैं।
सह-प्रमुख: रूस के प्रतिष्ठित 'कुरचातोव इंस्टीट्यूट' के प्रमुख और पुतिन के बेहद करीबी वैज्ञानिक मिखाइल कोवैल्चुक को इसकी जिम्मेदारी दी गई है।
रूसी प्रयोगशालाओं का 'अमरत्व' प्लान: 3 मुख्य तकनीकों पर काम
साल 2024 में बेहद धीमी गति से शुरू हुए इस प्रोजेक्ट ने अब सुपर-फास्ट रफ्तार पकड़ ली है। रूस के वैज्ञानिक बुढ़ापे को रोकने के लिए मुख्य रूप से तीन क्रांतिकारी मोर्चों पर काम कर रहे हैं:
1. जीन थेरेपी से बुढ़ापा रोकना
वैज्ञानिक जीन थेरेपी (Gene Therapy) के जरिए सेलुलर एजिंग (कोशिकाओं के बूढ़े होने की प्रक्रिया) को धीमा करने में जुटे हैं। इसका उद्देश्य शरीर के उन जीन्स को निष्क्रिय या खत्म करना है जो बुढ़ापे और शारीरिक कमजोरी के लिए जिम्मेदार होते हैं।
2. 3D बायोप्रिंटिंग से नए अंग
पुतिन की 'अंग बदलो, उम्र बढ़ाओ' थ्योरी के तहत खराब हो चुके इंसानी अंगों को प्रयोगशाला में फिर से तैयार किया जा रहा है। रूसी वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि वे चूहे का थाइरॉयड ग्लैंड और मानव कार्टिलेज ऊतक (Tissue) सफलतापूर्वक बायोप्रिंट कर चुके हैं।
3. सूअर के शरीर में मानव अंगों का विकास
मानव शरीर से जीन-मैच किए गए छोटे सूअरों (Gene-Matched Mini Pigs) के भीतर मानव अंगों को विकसित करने का प्रयोग चल रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर इन्हें इंसानों में ट्रांसप्लांट किया जा सके। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यह पूरी प्रक्रिया साल 2030 तक शत-प्रतिशत सफल हो जाएगी।
आबादी के संकट से जूझ रहा है रूस
| क्षेत्र / मापदंड | पुरुषों की औसत आयु | स्थिति |
|---|---|---|
| रूस | 68 वर्ष | यूरोप में सबसे कम |
| यूरोप (औसत) | 78 वर्ष | बेहतर स्वास्थ्य सूचकांक |
इस सीक्रेट प्रोजेक्ट के पीछे सिर्फ पुतिन की लंबी उम्र की चाहत नहीं, बल्कि रूस का गहरा जनसंख्या संकट भी है। रूस में पुरुषों की औसत आयु महज 68 साल है, जो पूरे यूरोप में सबसे कम है। क्रेमलिन को उम्मीद है कि यदि यह शोध सफल रहा, तो यह न केवल देश की वर्कफोर्स (कामकाजी आबादी) की उम्र बढ़ाएगा, बल्कि चिकित्सा विज्ञान के इतिहास में रूस को हमेशा के लिए अमर कर देगा।