भजनलाल सरकार का 'जीरो टॉलरेंस' प्रहार: IAS समेत 103 अफसर सस्पेंड, 6 बर्खास्त; 11 दागी अधिकारियों की आजीवन पेंशन पर लगी रोक

भ्रष्टाचार के खिलाफ राजस्थान में ढाई साल का सबसे बड़ा एक्शन; घूसखोरों और फर्जी रिपोर्ट बनाने वालों को नौकरी से निकाला, 108 मामलों में अभियोजन स्वीकृति।

29 May 2026  |  36

 

 

 

जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री के कड़े रुख के चलते पिछले ढाई वर्षों के भीतर एक आईएएस (IAS) अधिकारी सहित कुल 103 अधिकारियों को सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया है, जबकि गंभीर आरोपों में घिरे 6 अधिकारियों को सेवा से पूरी तरह बर्खास्त कर दिया गया है।

यही नहीं, भ्रष्टाचार की जड़ों पर कड़ा प्रहार करते हुए सरकार ने 11 भ्रष्ट अधिकारियों की आजीवन मिलने वाली शत-प्रतिशत पेंशन पर भी हमेशा के लिए रोक लगा दी है। रिश्वतखोरी, पद के दुरुपयोग और आय से अधिक संपत्ति से जुड़े 108 मामलों में सरकार ने कोर्ट ट्रायल के लिए अभियोजन स्वीकृति जारी कर दी है।

मुख्यमंत्री की दो टूक: "जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वाले बख्शे नहीं जाएंगे"

इस बड़ी प्रशासनिक सर्जरी पर बोलते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट किया कि प्रदेश की जनता को पारदर्शी, संवेदनशील और भ्रष्टाचार मुक्त शासन देना उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा, "जनता के पैसे की लूट करने वाले और व्यवस्था में दीमक की तरह बैठे भ्रष्ट अधिकारियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। कार्रवाई की यह रफ्तार आगे भी जारी रहेगी।"

दोष सिद्ध होते ही इन बड़े अधिकारियों पर गिरी बर्खास्तगी की गाज

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत 37 मामलों में कठोर कार्रवाई करते हुए न्यायालय से दोष सिद्ध होने के बाद कई रसूखदार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नौकरी से हटा दिया गया है। बर्खास्त होने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल हैं:

भरत प्रकाश मेघवाल (तत्कालीन विकास अधिकारी, PWD)

राजेश कुमार नैनावत (उप निदेशक, कृषि विभाग)

महावीर सिंह आसीवाल (सहायक आयुक्त, वित्त कर विभाग)

तीन चिकित्सा अधिकारी: डॉ. राम मोहन सिंह चौहान, डॉ. मुरलीधर शर्मा और डॉ. मनोहर लाल।

RAS और RPS अधिकारियों की बुढ़ापे की लाठी (पेंशन) छीनी

प्रशासनिक अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी पाए जाने के बाद जिन 11 अधिकारियों की पेंशन पर आजीवन पूर्ण रोक लगाई गई है, उनमें राज्य सेवा के कई बड़े नाम शामिल हैं। इनमें आरएएस (RAS) अधिकारी बनवारी लाल मीणा, देवेन्द्र सिंह ढिल्लो और आरपीएस (RPS) अधिकारी महेन्द्र सिंह के नाम प्रमुख हैं। इसके अलावा आईजीएनपी मोहनगढ़ के अधिशाषी अभियंता देशराज नूनिया की भी पेंशन रोक दी गई है, जबकि वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. विलास राव गुल्हाने को अनिवार्य सेवानिवृत्ति (VRS) देकर घर भेज दिया गया है।

पानी की जांच में 'फर्जीवाड़ा' करने वाले केमिस्ट भी बाहर

हाल ही में मुख्यमंत्री ने जनता के स्वास्थ्य और पेयजल गुणवत्ता से खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों पर भी हंटर चलाया है। पीएचईडी (PHED) की अलवर प्रयोगशाला के वरिष्ठ रसायनज्ञ (Senior Chemist) प्रदीप कुमार हजरती को पेयजल जांच में फर्जी रिपोर्ट तैयार करने का दोषी पाए जाने पर सेवा से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। वहीं, एसीबी (ACB) कोर्ट से सजा मिलने के बाद हरिसिंह मीना को भी नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है।

ब्यूरोक्रेसी में हड़कंप, सुशासन की दिशा में बड़ा कदम

भजनलाल सरकार के इस अभूतपूर्व और चौतरफा एक्शन से राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी में हड़कंप मचा हुआ है। सचिवालय से लेकर जिला स्तर के दफ्तरों तक हड़कंप का माहौल है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में उच्च अधिकारियों पर एक साथ कार्रवाई कर मुख्यमंत्री ने साफ संदेश दे दिया है कि काम में लापरवाही और जनता की फाइलों पर कुंडली मारकर बैठना अब अधिकारियों को भारी पड़ेगा।

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