ट्रंप की 'रेड लाइन्स' पर अड़ा ईरान: सिचुएशन रूम की हाई-प्रोफाइल बैठक बेनतीजा खत्म

कैचलाइन: मध्यावधि चुनावों के दबाव और तेल बाजारों की तेजी के बीच व्हाइट हाउस में दो घंटे तक चला महामंथन; $12 अरब की जब्त संपत्ति और परमाणु कार्यक्रम पर फंसा पेंच।

30 May 2026  |  30

 

 

वाशिंगटन डीसी: वैश्विक ऊर्जा बाजारों में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और आगामी नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) के राजनीतिक दबाव को दरकिनार करते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शनिवार को व्हाइट हाउस के 'सिचुएशन रूम' से बिना किसी ठोस नतीजे के बाहर आ गए। ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए एक संभावित ऐतिहासिक समझौते पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई यह बेहद संवेदनशील बैठक करीब दो घंटे तक चली, लेकिन अंततः बेनतीजा समाप्त हो गई।

प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने न्यूयॉक टाइम्स को दिए बयान में संकेत दिए हैं कि हालांकि दोनों देश समझौते के बेहद करीब हैं, लेकिन ईरान के लिए फंड जारी करने जैसे संवेदनशील और जटिल मुद्दों पर अभी भी पेंच फंसा हुआ है।

'अमेरिका के हित में ही होगा समझौता' — व्हाइट हाउस

बैठक के समापन के बाद व्हाइट हाउस के एक आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया कि राष्ट्रपति ट्रंप केवल उसी समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे जो पूरी तरह से अमेरिका के राष्ट्रीय हितों के अनुकूल हो और उनकी तयशुदा 'रेड लाइन्स' (लक्ष्मण रेखा) का सम्मान करता हो। व्हाइट हाउस ने अपने कड़े रुख को दोहराते हुए कहा, "ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।"

गौरतलब है कि बैठक से पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद इस बात का संकेत दिया था कि वे इस बैठक में संभावित सीजफायर (युद्धविराम) को लेकर अंतिम फैसला करने जा रहे हैं। लेकिन फिलहाल तेहरान और वाशिंगटन के बीच तनाव कम होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को व्यापार के लिए दोबारा खोलने और ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम की शर्तों पर दोनों देशों के बीच गहरे मतभेद बरकरार हैं।

ट्रंप का दोटूक रुख: "अगले आदेश तक नहीं होगा कोई लेन-देन"

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट के जरिए अमेरिका की शर्तों को खुलकर सामने रखा। उन्होंने लिखा:

"ईरान को 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में बिछाई गई बारूदी सुरंगों (माइंस) को हटाना होगा, जिसके बदले में अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाएगा ताकि जहाजों की सुरक्षित आवाजाही फिर से शुरू हो सके।"

ट्रंप ने आगे कहा कि ईरान के अत्यधिक संवर्धित (Highly Enriched) यूरेनियम को देश से बाहर निकालकर पूरी तरह नष्ट किया जाएगा। उन मीडिया रिपोर्टों पर विराम लगाते हुए, जिनमें दावा किया जा रहा था कि तेहरान बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका द्वारा जब्त की गई अपनी $12 अरब की संपत्ति को तुरंत जारी करने की मांग कर रहा है, ट्रंप ने दोटूक शब्दों में कहा— "अगले आदेश तक किसी भी तरह के धन का लेन-देन नहीं होगा।"

ईरान का पलटवार: "अभी कुछ भी तय नहीं"

दूसरी तरफ, ईरान ने भी अमेरिका के दावों और शर्तों पर सधा हुआ रुख अपनाया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने सरकारी टीवी चैनल IRIB TV को दिए एक टेलीफोनिक इंटरव्यू में स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ फिलहाल कोई भी समझौता अंतिम रूप से पक्का नहीं हुआ है, हालांकि दोनों पक्षों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान जारी है।

बगाई ने कहा कि इस समय ईरान का पूरा ध्यान केवल युद्ध को समाप्त करने पर केंद्रित है। उन्होंने साफ किया:

"फिलहाल हम ईरान के यूरेनियम संवर्धन या उससे जुड़े तकनीकी विवरणों पर कोई बात नहीं कर रहे हैं।"

रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के नियंत्रण पर अमेरिकी दखल को खारिज करते हुए बगाई ने कड़े शब्दों में कहा कि इस जलडमरूमध्य (Strait) का भविष्य का प्रबंधन पूरी तरह से एक संप्रभु मामला है, जो केवल ईरान और ओमान के अधिकार क्षेत्र में आता है।

विशेष विश्लेषण: व्हाइट हाउस की इस बेनतीजा बैठक ने साफ कर दिया है कि ईरान के मोर्चे पर कूटनीतिक राह बेहद पथरीली है। जहां ट्रंप घरेलू स्तर पर मजबूत दिखने के लिए अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, वहीं ईरान भी आर्थिक प्रतिबंधों से तुरंत राहत (जब्त फंड की बहाली) के बिना झुकने के मूड में नहीं दिख रहा है।

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