उत्तराखंड में 'मिशन हैट्रिक' के लिए भाजपा का चक्रव्यूह: हारी हुई 23 सीटों पर सांसदों को कमान, दो महीने का अल्टीमेटम

राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का 'माइक्रो मैनेजमेंट' फॉर्मूला; पीएम मोदी के 12 वर्षों के कार्यों और राज्य सरकार की 10 साल की उपलब्धियों के दम पर देवभूमि में फिर भगवा लहराने की तैयारी।

30 May 2026  |  83

 

 

देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में जीत की ऐतिहासिक हैट्रिक लगाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी चुनावी बिसात बिछा दी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उत्तराखंड प्रवास के दूसरे दिन सांसदों, विधायकों, संगठन के पदाधिकारियों और निकाय प्रतिनिधियों के साथ सिलसिलेवार बैठकें कर एक बेहद आक्रामक और रणनीतिक खाका तैयार किया है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इस दौरान साफ किया कि उत्तराखंड में सांस्कृतिक राष्ट्रवादी विचारों की सरकार की वापसी देश के लिए आवश्यक है और इसके लिए संगठन को अगले 20 वर्षों के लिहाज से मजबूत करना होगा।

'हाई रिस्क' सीटों के लिए विशेष रणनीति

भाजपा ने उन 23 विधानसभा सीटों को 'हाई रिस्क' श्रेणी में रखा है, जहाँ पिछला चुनाव पार्टी हार गई थी या बेहद मामूली अंतर से जीती थी।

सांसदों को जिम्मेदारी: इन कमजोर सीटों को फतह करने का सीधा जिम्मा लोकसभा व राज्यसभा सांसदों को सौंपा गया है।

पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं की तैनाती: इन क्षेत्रों में विशेष निगरानी के लिए पूर्णकालिक (Full-time) कार्यकर्ताओं को मैदान में उतारा जाएगा।

2 महीने का अल्टीमेटम: राष्ट्रीय अध्यक्ष ने दोटूक शब्दों में कहा कि जिन सीटों पर विधायकों का रिपोर्ट कार्ड संतोषजनक नहीं है या जहाँ जीत का अंतर कम था, वहाँ दो महीने के भीतर संगठन और बूथ स्तर की कमियों को दुरुस्त कर लिया जाए। दो माह बाद इसकी दोबारा कड़ी समीक्षा होगी।

प्रबुद्धजन संपर्क और ग्राम संवाद योजना

चुनावी रणनीति के तहत भाजपा अब समाज के प्रभावशाली और बौद्धिक वर्ग के जरिए अपनी पैठ मजबूत करेगी।

100 प्रबुद्धजनों की सूची: प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से 100 प्रतिष्ठित और प्रभावशाली लोगों की सूची तैयार की जाएगी। ये लोग भाजपा की विचारधारा और कल्याणकारी योजनाओं को आमजन तक पहुँचाने में सेतु का काम करेंगे।

ग्राम संपर्क अभियान: सांसद और विधायक गाँवों का दौरा करेंगे। इसके तहत केंद्र की मोदी सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल और राज्य सरकार की 10 वर्षों की उपलब्धियों को पंफलेट, पत्रिकाओं और जनसंपर्क के जरिए गाँव-गाँव तक पहुँचाया जाएगा।

प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का बयान: "आगामी चुनाव में बूथ स्तर तक संगठन को अभेद्य बनाने के लिए भाजपा पूरी तरह से 'माइक्रो मैनेजमेंट मॉडल' को अपनाएगी। जहाँ भी बूथ समितियां अधूरी हैं, उन्हें विधायक और मंडल संगठन मिलकर तुरंत पूरा करेंगे।"

चुनावी फतह के लिए नितिन नवीन के '10 अचूक नुस्खे'

बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पार्टी को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने के लिए 10 सूत्रीय गाइडलाइन जारी की:

बूथ स्तर पर सक्रियता: पदाधिकारी से लेकर आम कार्यकर्ता तक हर स्तर पर बूथ पर डटे रहें।

मजबूत नेटवर्क: प्रत्येक बूथ पर कार्यकर्ताओं का एक मजबूत और सक्रिय जाल तैयार हो।

योजनाओं का प्रचार: केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी घर-घर पहुँचाई जाए।

लाभार्थी संपर्क: सरकारी योजनाओं का लाभ पाने वाले लाभार्थियों से गाँव स्तर तक सीधा संपर्क साधा जाए।

व्यापक पहुँच: संगठन की पैठ केवल शहरों तक न रहे, बल्कि सुदूर गाँवों तक मजबूत की जाए।

लघु संवाद कार्यक्रम: वार्ड, गाँव और मोहल्ला स्तर पर छोटी-छोटी बैठकें और संवाद आयोजित हों।

उपलब्धियों का प्रसार: विकास कार्यों का जमीनी स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित हो।

डिजिटल और फिजिकल तालमेल: बूथ समितियों, शक्ति केंद्रों और सोशल मीडिया के जरिए प्रचार तंत्र को और धार दी जाए।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका: निकाय और पंचायत के जनप्रतिनिधि सरकारी योजनाओं के प्रचार का मुख्य चेहरा बनें।

सकारात्मक माहौल: जनता की छोटी-बड़ी समस्याओं का त्वरित समाधान कर पार्टी के पक्ष में सकारात्मक माहौल तैयार किया जाए।

निष्कर्ष: भाजपा का यह नया चुनावी रोडमैप साफ संकेत देता है कि पार्टी एंटी-इंकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) को कम करने के लिए पूरी तरह से बूथ-स्तरीय और जमीनी माइक्रो-मैनेजमेंट पर भरोसा कर रही है, जहाँ सांसदों से लेकर पंचायत प्रतिनिधियों तक की जवाबदेही तय कर दी गई है।

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