होर्मुज के 'चक्रव्यूह' से कच्चे तेल के टैंकर निकालने में भारत सफल: युद्ध के बीच जहाजों की सुरक्षित वापसी

ईरान-अमेरिका संघर्ष और नौसैनिक नाकेबंदी के बावजूद भारत का बड़ा कूटनीतिक कौशल; बेहद गोपनीय मिशन के तहत भारतीय जहाजों को मिल रहा है सुरक्षित रास्ता।

30 May 2026  |  42

 

 

नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण युद्ध और तनाव के बीच, रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही पर गहरा संकट मंडरा रहा है। हालांकि, मौजूदा संघर्ष विराम (Ceasefire) ने थोड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन यह जलमार्ग अब भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है और यहां से जहाजों का गुजरना बेहद जोखिम भरा बना हुआ है।

इस बेहद खतरनाक माहौल के बीच भी भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने और वहां फंसे अपने पेट्रोलियम जहाजों को सुरक्षित निकालने में कामयाब रहा है। जहाजरानी मंत्रालय (Ministry of Shipping) ने शुक्रवार को एक अंतर-मंत्रालयीय ब्रीफिंग में इस पूरे घटनाक्रम की महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं, हालांकि सुरक्षा कारणों से मिशन के कई हिस्सों को बेहद गोपनीय रखा गया है।

विदेश मंत्रालय और शिपिंग मंत्रालय का 'सीक्रेट' तालमेल

जहाजरानी मंत्रालय में शिपिंग निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने शुक्रवार को बताया कि युद्ध के मैदान से भारतीय जहाजों को सुरक्षित निकालना एक बेहद जटिल प्रक्रिया है। उन्होंने कहा:

"मैं सुरक्षा और कूटनीतिक कारणों से यह तो सार्वजनिक नहीं कर सकता कि ईरान के साथ जमीनी स्तर पर समन्वय कैसे किया जाता है, लेकिन इस पूरे अभियान में भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और बड़ी है।"

उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि होर्मुज संकट से जहाजों को निकालने की प्राथमिकता पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा उर्वरक मंत्रालय के साथ मिलकर तय की जाती है। जिस ईंधन या कच्चे तेल की देश को सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उस जहाज को पहले निकालने की कोशिश की जाती है।

होर्मुज में फिलहाल मौजूद हैं 13 भारतीय जहाज

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस समय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संवेदनशील क्षेत्र में भारतीय झंडे वाले करीब 13 जहाज मौजूद हैं, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं। इनमें शामिल हैं:

05 कच्चे तेल (Crude Oil) के टैंकर

01 एलपीजी (LPG) टैंकर

01 केमिकल टैंकर

03 कंटेनर जहाज

02 बल्क कैरियर

01 ड्रेजर

जब शिपिंग निदेशक से पूछा गया कि क्या जहाजों का लाइव डेटा सार्वजनिक होने से उनकी सुरक्षा प्रभावित होती है? तो उन्होंने बेहद सधे हुए अंदाज में कहा कि पब्लिक डोमेन में मौजूद डेटा का इस्तेमाल कोई भी कर सकता है, यह पूरी तरह से सामने वाले की मंशा पर निर्भर करता है। यही वजह है कि भारत सरकार इन जहाजों की सटीक लोकेशन और अभियानों को पूरी तरह गोपनीय रख रही है।

अन्य देशों के मुकाबले भारत का दबदबा; ये जहाज लौटे सुरक्षित

गौरतलब है कि इस साल 28 फरवरी को ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से ही होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों का निकलना लगभग नामुमकिन सा हो गया था। इसके बावजूद, भारत की मजबूत कूटनीति का असर है कि अन्य देशों के मुकाबले भारतीय जहाज यहां से अधिक संख्या में और सुरक्षित निकलने में सफल रहे हैं।

सुरक्षित निकले प्रमुख भारतीय जहाज:

खाड़ी के इस तनावपूर्ण रास्ते से जो प्रमुख भारतीय जहाज पेट्रोलियम और अन्य जरूरी पदार्थ लेकर सफलतापूर्वक भारत पहुंचे हैं, उनमें शिवालिक, नंदा देवी, जग लाडकी, पाइन गैस, जग वसंत, बीडब्लू टायर, बीडब्यू एल्म और ग्रीन सान्वी जैसे बड़े पोत शामिल हैं।

विशेष विश्लेषण: युद्ध के इस दौर में जहां दुनिया भर की सप्लाई चेन ठप पड़ी है, वहीं स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से अपने टैंकरों को सुरक्षित निकाल लाना भारत की वैश्विक कूटनीति और मजबूत द्विपक्षीय संबंधों की एक बड़ी जीत मानी जा रही है।

अन्य खबरें