नन्हीं निक्षा का बड़ा कमाल: 8 साल की उम्र में फतह किया एवरेस्ट बेस कैंप, माइनस डिग्री तापमान में किया योग

गुजरात के पालनपुर की कक्षा 3 की छात्रा ने 17,598 फीट की ऊंचाई पर लहराया तिरंगा; ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण संरक्षण का दिया वैश्विक संदेश।

30 May 2026  |  79

 

 

 

पालनपुर (गुजरात): हौसले बुलंद हों तो उम्र कभी आड़े नहीं आती, इस बात को सच कर दिखाया है गुजरात के पालनपुर की रहने वाली मात्र आठ वर्षीय निक्षा बारोट ने। निक्षा ने बेहद कम उम्र में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप (Everest Base Camp) पर कदम रखकर एक नया कीर्तिमान रच दिया है। समुद्र तल से 17,598 फीट की हाड़ कंपा देने वाली ऊंचाई पर पहुंचकर जब इस नन्हीं पर्वतारोही ने तिरंगा लहराया, तो पूरा देश गर्व से ऊठ खड़ा हुआ।

पालनपुर के गोविंदा स्कूल से हाल ही में कक्षा दो उत्तीर्ण कर तीसरी कक्षा में पहुंची निक्षा ने इस मुश्किल ट्रैकिंग को मात्र सात दिनों में पूरा कर अपनी अद्भुत शारीरिक और मानसिक क्षमता का परिचय दिया है।

हाड़ कंपाने वाली ठंड में योग और पर्यावरण का संदेश

निक्षा की यह साहसिक यात्रा केवल एक रिकॉर्ड बनाने तक सीमित नहीं थी। पहाड़ों पर जहां बड़ों-बड़ों को सांस लेने में तकलीफ होने लगती है, वहां निक्षा बारोट ने माइनस डिग्री तापमान की भीषण ठंड के बीच एवरेस्ट बेस कैंप पर योग किया। निक्षा के इस प्रयास का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर पैर पसार रही ग्लोबल वार्मिंग के प्रति लोगों को सचेत करना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना था।

130 किलोमीटर का कठिन सफर और विपरीत परिस्थितियां

निक्षा के पिता नीलेश बारोट ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए बताया कि एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचने की यह राह बेहद कटीली और चुनौतीपूर्ण थी।

"दुनिया की सबसे ऊंची चोटी की तलहटी तक पहुंचने के लिए निक्षा ने बेहद विपरीत और अस्थिर मौसम के बीच लगभग 130 किलोमीटर की लंबी व दुर्गम चढ़ाई को पूरा किया। इस दौरान उसका हौसला और आत्मविश्वास देखने लायक था।"

समीक्षा: इतनी छोटी सी उम्र में एवरेस्ट बेस कैंप जैसे अत्यधिक जोखिम भरे ट्रैक को फतह करना और वहां से पर्यावरण का संदेश देना यह साबित करता है कि भारत की नई पीढ़ी न केवल साहसी है, बल्कि वैश्विक मुद्दों के प्रति बेहद संवेदनशील भी है। पालनपुर की इस 'माउंटेन गर्ल' की सफलता आज देश के लाखों बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है।

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