दिल्ली की नौकरी छोड़ खेतों में उगाया 'सोना': शाहजहांपुर के सरताज खान ने गन्ने की खेती से खड़ा किया 2 करोड़ का टर्नओवर

एयरपोर्ट की नौकरी से मिलेनियर फार्मर तक का सफर; ट्रेंच विधि और रंगीन शिमला मिर्च की इंटरक्रॉपिंग से बदली खेती की तस्वीर

31 May 2026  |  94

 

 

कृषि डेस्क, शाहजहांपुर। अगर खेती को सिर्फ एक पारंपरिक काम न मानकर आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक सोच और सही बिजनेस मैनेजमेंट के साथ किया जाए, तो यह कॉर्पोरेट नौकरियों से कहीं ज्यादा मुनाफा दे सकती है। इस बात को सच साबित कर दिखाया है उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के एक प्रगतिशील किसान सरताज खान ने।

कभी दिल्ली एयरपोर्ट पर नौकरी करने वाले सरताज खान आज अपनी पैतृक 72 एकड़ भूमि पर “शाहीद फार्म्स एंड गन्ना नर्सरी” के जरिए आधुनिक कृषि का एक बेमिसाल मॉडल चला रहे हैं। कृषि क्षेत्र में उनके इस क्रांतिकारी योगदान के लिए उन्हें 'मिलेनियर फार्मर ऑफ इंडिया अवार्ड्स' में नेशनल अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। आज उनका सालाना टर्नओवर करीब 2 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।

आइए जानते हैं सरताज खान की सफलता की कहानी, खुद उनकी जुबानी:

सफलता की कहानी: सरताज खान से विशेष बातचीत के अंश

सवाल: दिल्ली एयरपोर्ट की नौकरी छोड़कर खेती में आने का फैसला क्यों किया?

सरताज खान: हमारी लगभग 72 एकड़ पैतृक जमीन थी, जहां हमेशा से पारंपरिक तरीके से ही खेती होती आ रही थी। मैं दिल्ली एयरपोर्ट पर नौकरी करता था, लेकिन मंदी (Recession) के दौर में मेरी नौकरी प्रभावित हुई और मुझे गांव वापस लौटना पड़ा।

गांव आकर मैंने महसूस किया कि यहाँ खेती तो हो रही है, लेकिन उसे एक बिजनेस की तरह प्रोफेशनल तरीके से नहीं किया जा रहा। मैंने अपने पिता और भाइयों से बात की और तय किया कि हम खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ेंगे। इसी सोच के साथ हमने “शाहीद फार्म्स एंड गन्ना नर्सरी” को रजिस्टर कराया और आज हम उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद के रजिस्टर्ड सीडर (Seed Provider) हैं।

सवाल: पारंपरिक गन्ना खेती में आपने क्या बड़े बदलाव किए?

सरताज खान: हमारे इलाके में किसान गन्ने की बुवाई के समय लाइन से लाइन की दूरी बहुत कम (लगभग सवा दो फीट) रखते थे। इससे पौधों को न तो पर्याप्त धूप मिलती थी और न ही हवा, जिससे बीमारियां बढ़ती थीं और गन्ने का वजन कम रहता था।

मैंने इस ढर्रे को बदला और 4 से 4.5 फीट की दूरी वाला मॉडल अपनाया। इससे फसल की ग्रोथ शानदार हुई और उत्पादन भी रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ गया।

सरताज खान का 'सफलता मंत्र'

गन्ने की उन्नत किस्में: 13235, 0118, 14201 और 16202 का इस्तेमाल।

बंपर उत्पादन: वैज्ञानिक प्रबंधन की बदौलत लगभग 2200 से 2300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक का रिकॉर्ड उत्पादन।

बीज उत्पादन: 72 एकड़ में से 20-25 एकड़ क्षेत्र सिर्फ उन्नत गन्ना बीज उत्पादन के लिए आरक्षित, जिसकी सप्लाई शुगर मिलों और किसानों को की जाती है।

सवाल: ट्रेंच विधि (Trench Method) अपनाने से आपको क्या फायदे मिले?

सरताज खान: ट्रेंच विधि ने हमारी खेती की पूरी तस्वीर ही बदल दी। जब दो लाइनों के बीच 4.5 फीट की जगह होती है, तो खेत में मिनी ट्रैक्टर, पावर वीडर और स्प्रेयर जैसी मशीनें आसानी से चलाई जा सकती हैं। इससे हमारी लेबर कॉस्ट (मजदूरी की लागत) बेहद कम हो गई है। अब गन्ना बड़ा होने के बाद भी हम खेत के अंदर जाकर आसानी से खाद और स्प्रे दे सकते हैं।

सवाल: गन्ने के साथ 'इंटरक्रॉपिंग' (सह-फसली खेती) का आपका मॉडल क्या है?

सरताज खान: इंटरक्रॉपिंग किसानों की किस्मत बदल सकती है। गन्ने की दो लाइनों के बीच जो खाली जगह बचती है, हम उसमें दूसरी फसलें उगाते हैं। इससे मुख्य फसल की लागत उसी खाली जगह से निकल आती है और मुनाफा दोगुना हो जाता है।

हम गन्ने के बीच में सरसों, मसूर, उड़द, मूंग, गेहूं और चना तो उगा ही रहे हैं, लेकिन इस बार हमने रंगीन शिमला मिर्च, ब्रोकली और गांठ गोभी जैसी नकदी फसलें उगाई हैं। हमारे खेत में गन्ने के साथ लहलहाती रंगीन शिमला मिर्च को देखने के लिए दूर-दूर से किसान आ रहे हैं।

भविष्य का प्लान: पूरी तरह ऑर्गेनिक और ऑटोमेशन आधारित खेती

सरताज खान अब सिर्फ गन्ने तक सीमित नहीं रहना चाहते। वे अब अपनी खेती को डेयरी उद्योग से जोड़कर सस्टेनेबल और ऑर्गेनिक फार्मिंग (जैविक खेती) की तरफ ले जा रहे हैं। उनका मानना है कि भविष्य की खेती में मिट्टी की सेहत और पर्यावरण का ध्यान रखना सबसे जरूरी है। उनका अगला लक्ष्य अपने पूरे फार्म को कम लागत वाले ऑटोमेशन मॉडल में बदलना है।

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