वॉशिंगटन / अंतरराष्ट्रीय डेस्क
आधुनिक दौर में युद्ध सिर्फ गोलियों और मिसाइलों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) युद्ध का नया और सबसे खतरनाक हथियार बनकर उभर रहा है। 'फाइनेंशियल टाइम्स' की एक हालिया रिपोर्ट ने वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका (US) द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बीच अब ईरान अपनी साइबर क्षमताओं को घातक बनाने और दुष्प्रचार (गलत जानकारी फैलाने वाले कैंपेन) के लिए एआई टूल्स का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहा है।
Gemini और ChatGPT से बन रहे हैं खतरनाक मैलवेयर
इस चौंकाने वाली रिपोर्ट में बताया गया है कि ईरानी हैकर्स और ऑपरेटर Gemini, ChatGPT और अन्य प्रसिद्ध एआई प्रोग्राम्स का इस्तेमाल करके खतरनाक मैलवेयर (Malware) कोड तैयार कर रहे हैं।
फिशिंग अटैक: हैकर्स इन एआई टूल्स की मदद से हिब्रू और अरबी भाषाओं में बेहद सटीक और भ्रमित करने वाले 'फिशिंग' मैसेज तैयार कर रहे हैं, ताकि इजरायल और अमेरिका के महत्वपूर्ण नेटवर्क्स में सेंध लगाई जा सके।
फर्जी पहचान: टारगेट का भरोसा जीतने के लिए ईरानी ऑपरेटर एआई जनित (AI-generated) फर्जी इंसानी चेहरों और पहचान का इस्तेमाल कर रहे हैं। यहाँ तक कि इजरायल में कई लोगों को ऐसे फिशिंग ईमेल और टेक्स्ट मैसेज मिले हैं, जिनमें उन्हें ईरानी इंटेलिजेंस के साथ मिलकर काम करने का लालच दिया गया है।
यूएई पर हर दिन 5 लाख हमले: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने खुलासा किया था कि वह हर दिन 5 लाख से ज्यादा साइबर हमलों का सामना कर रहा है, जिनमें से कई हमलों में OpenAI के ChatGPT जैसे एआई टूल्स की मदद ली जा रही है।
गूगल ने पकड़ा ईरानी ग्रुप 'APT42' का खतरनाक मंसूबा
टेक कंपनियों के लिए इन खतरों को रोकना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, टेक दिग्गज गूगल (Google) ने फरवरी के आखिर में अपने जेमिनी एआई मॉडल का गलत इस्तेमाल करते हुए ईरान के सरकारी हैकर ग्रुप 'APT42' का पता लगाया था।
यह ग्रुप जेमिनी सिस्टम का इस्तेमाल कई संवेदनशील मिलिट्री रिसर्च के लिए कर रहा था, जिसमें अमेरिकी F-35 फाइटर जेट से जुड़ी तकनीकों और प्रणालियों की खुफिया स्टडी करना भी शामिल था। हालांकि, टेक्नोलॉजी कंपनियां लगातार ऐसे संदिग्ध अकाउंट्स की पहचान कर उन्हें ब्लॉक कर रही हैं।
साइबर अटैक ही नहीं, मिसाइल और ड्रोन को भी 'स्मार्ट' बना रहा है ईरान
ईरान में एआई का इस्तेमाल सिर्फ ऑनलाइन स्कैम या साइबर हमलों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह इसे अपनी मुख्य सैन्य शक्ति का हिस्सा बना रहा है:
| सैन्य क्षेत्र | एआई (AI) का इस्तेमाल और प्रभाव |
|---|---|
| क्रूज मिसाइलें | ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का दावा है कि उनकी कुछ क्रूज मिसाइलों में एआई-असिस्टेड गाइडेंस, नेविगेशन और दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से बचने की क्षमता आ चुकी है। |
| ड्रोन और अंडरवाटर सिस्टम | बैटलफील्ड कमांड सेंटर्स में फैसले लेने की रफ्तार बढ़ाने, ड्रोन गाइडेंस को सटीक करने और अंडरवाटर टारगेटिंग सिस्टम (पनडुब्बी रोधी प्रणाली) को बेहतर बनाने में एआई का उपयोग हो रहा है। |
| मिलिट्री इंटेलिजेंस | ईरान पश्चिमी देशों की सैन्य रिसर्च और खुफिया दस्तावेजों को समझने के लिए एआई ट्रांसलेशन टूल्स का इस्तेमाल कर रहा है, जिससे उनके एनालिस्ट विदेशी भाषाओं के डेटा को बेहद तेजी से प्रोसेस कर पा रहे हैं। |
निष्कर्ष: ईरान द्वारा एआई का यह बहुआयामी इस्तेमाल यह साफ संकेत देता है कि आने वाले समय में वैश्विक महाशक्तियों के बीच की जंग अब कंप्यूटर स्क्रीन्स और एल्गोरिदम पर लड़ी जाएगी। एआई के इस सैन्यीकरण (Militarization) ने टेक कंपनियों और वैश्विक सुरक्षा नेटवर्क्स के सामने एक ऐसी चुनौती खड़ी कर दी है, जिससे निपटने के लिए अब नए सिरे से साइबर डिफेंस नीतियां बनानी होंगी।