1 जून से UPI पेमेंट का नया नियम लागू: QR कोड स्कैन करते ही दिखेगा खाताधारक का 'असली नाम', ठगी पर लगेगी लगाम

डिजिटल फ्रॉड और गलत ट्रांजैक्शन रोकने के लिए उठाया गया बड़ा कदम; व्यापारियों को बदलनी होगी अपनी रणनीति, ग्राहकों को सीधा फायदा

01 Jun 2026  |  98

 

 

नई दिल्ली / बिजनेस डेस्क

यदि आप भी रोजमर्रा की जिंदगी में चाय की दुकान से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल्स तक भुगतान करने के लिए यूपीआई (UPI) का इस्तेमाल करते हैं, तो आज से आपके लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव लागू हो गया है। 1 जून (आज) से देश के यूपीआई पेमेंट सिस्टम में एक नया नियम प्रभावी हो गया है, जिसके तहत अब किसी भी क्यूआर (QR) कोड को स्कैन करने पर ग्राहक को उस बैंक खाताधारक (Account Holder) का असली नाम दिखाई देगा, जिसके खाते में पैसे भेजे जा रहे हैं।

इससे पहले, कई मामलों में क्यूआर कोड स्कैन करने पर केवल व्यापारी या दुकान का छद्म/काल्पनिक नाम ही दिखाई देता था, जिससे ग्राहकों के मन में असमंजस (कन्फ्यूजन) की स्थिति बनी रहती थी।

क्यों पड़ी इस नए नियम की जरूरत?

इस क्रांतिकारी बदलाव का मुख्य उद्देश्य देश में बढ़ते डिजिटल ट्रांजैक्शन को और अधिक सुरक्षित (Safe) बनाना और ऑनलाइन धोखाधड़ी पर लगाम कसना है।

फर्जी QR कोड पर वार: पिछले कुछ समय से बाजार में फर्जी क्यूआर कोड लगाने और गलत पहचान बताकर ग्राहकों से ऑनलाइन ठगी करने के मामले तेजी से बढ़े हैं। अब नए नियम के आने से ग्राहक पैसे ट्रांसफर करने से ठीक पहले खाताधारक का असली नाम देखकर यह सुनिश्चित कर सकेंगे कि पैसा सही व्यक्ति या संस्था के पास जा रहा है या नहीं। इससे 'रॉन्ग ट्रांजैक्शन' (गलत खाते में पैसा जाना) की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।

व्यापारियों के सामने नई चुनौती: ग्राहकों में बढ़ सकती है हिचकिचाहट

इस नए नियम का सीधा असर छोटे-बड़े कारोबारियों और दुकानदारों के बिजनेस पर पड़ सकता है। इसकी मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:

नाम का अंतर: कई कमर्शियल प्रतिष्ठानों, दुकानों या स्टार्टअप्स के व्यापारिक नाम (Business Name) और उनके रजिस्टर्ड बैंक अकाउंट के नाम में काफी अंतर होता है।

भरोसे की कमी: अब अगर कोई ग्राहक किसी प्रसिद्ध दुकान पर क्यूआर कोड स्कैन करता है और स्क्रीन पर दुकान के नाम की जगह किसी अज्ञात व्यक्ति का नाम आता है, तो वह सुरक्षा के लिहाज से भुगतान करने में हिचकिचा सकता है।

समाधान: इस समस्या से बचने के लिए अब व्यापारियों को अपनी व्यावसायिक पहचान (Business Identity) और बैंक अकाउंट के नाम के बीच सही तालमेल और पारदर्शिता बनानी होगी, ताकि ग्राहकों का भरोसा प्रभावित न हो।

ग्राहकों के लिए 'डबल सेफ्टी नेट'

कुल मिलाकर, यह नया नियम आम ग्राहकों के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच साबित होने वाला है। डिजिटल पेमेंट करते समय अब किसी भी तरह के भ्रम की स्थिति नहीं रहेगी। फर्जी वित्तीय धोखाधड़ी और गलत अकाउंट में पैसे ट्रांसफर होने जैसी रोजमर्रा की समस्याओं पर इस कदम से काफी हद तक रोक लग सकेगी।

निष्कर्ष: 1 जून से लागू हुआ यह नियम भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को और अधिक परिपक्व और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है। ग्राहकों को अब भुगतान करने से पहले स्क्रीन पर दिखने वाले 'असली नाम' को ध्यान से चेक करने की आदत डालनी होगी।

अन्य खबरें