नई दिल्ली / कृषि डेस्क
भारत सरकार ने आगामी खरीफ 2026 सीजन के लिए देश की कुल उर्वरक (फर्टिलाइजर) आवश्यकता के अनुमान में कटौती की है। सरकार के नए आकलन के अनुसार, अब देश को 38.39 मिलियन टन उर्वरक की आवश्यकता होगी, जबकि इससे पहले यह अनुमान 39.05 मिलियन टन का लगाया गया था।
हालांकि इस कटौती के पीछे सरकार की ओर से कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा इस साल 'सामान्य से कम' (Below-Normal) मानसून के पूर्वानुमान को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
उरिया और डीएपी (DAP) की मांग में आई कमी
संशोधित अनुमानों के अनुसार, मुख्य खादों यानी यूरिया और डीएपी की मांग में निम्नलिखित गिरावट दर्ज की गई है:
यूरिया (Urea): देश को अब 19.03 मिलियन टन यूरिया की आवश्यकता होगी। पहले इसके 19.40 मिलियन टन रहने का अनुमान था, जिसमें 1.9 प्रतिशत की कमी आई है।
डीएपी (DAP): डाई-अमोनियम फॉस्फेट की आवश्यकता अब 5.62 मिलियन टन आंकी गई है, जो पहले के 5.91 मिलियन टन के अनुमान से 4.9 प्रतिशत कम है।
एडवांस प्लानिंग: आधा से ज्यादा स्टॉक पहले से तैयार
भले ही मानसून को लेकर चिंताएं हों, लेकिन देश में खाद की किल्लत जैसी कोई स्थिति नहीं है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत के पास वर्तमान में 19.98 मिलियन टन उर्वरक का स्टॉक उपलब्ध है।
मजबूत स्थिति में भारत:
इसका मतलब यह है कि वर्तमान में देश के पास नई संशोधित आवश्यकता का लगभग 52 प्रतिशत हिस्सा पहले से ही बफर स्टॉक में मौजूद है। सरकार के एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, "यह स्थिति सरकार द्वारा बेहतर प्लानिंग, एडवांस स्टॉकिंग और कुशल लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट (आपूर्ति प्रबंधन) को दर्शाती है।"
पश्चिम एशिया संकट के बावजूद आपूर्ति मजबूत
पश्चिम एशिया (West Asia Crisis) में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और लॉजिस्टिक्स संबंधी बाधाओं के बावजूद भारत ने अपनी खाद आपूर्ति को प्रभावित नहीं होने दिया है। सरकार ने जानकारी दी है कि इस संकट के शुरू होने के बाद से अब तक आयात (Imports) और घरेलू उत्पादन (Domestic Production) के जरिए कुल उपलब्धता में लगभग 13.24 मिलियन टन उर्वरक और जोड़ा गया है।
निष्कर्ष: मांग में आई यह मामूली कमी मुख्य रूप से मानसून के मिजाज को देखते हुए की गई एक रणनीतिक री-असेसमेंट है। राहत की बात यह है कि पर्याप्त एडवांस स्टॉक और मजबूत घरेलू उत्पादन के दम पर भारत आगामी खरीफ सीजन में अपने किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह से आत्मनिर्भर और तैयार नजर आ रहा है।