गन्ना किसानों की बड़ी जीत: केंद्र सरकार ने वापस लिया सुगरकेन कंट्रोल ऑर्डर का ड्राफ्ट; चौतरफा विरोध के आगे झुकी सरकार

'गुड़' और 'खांडसारी' उद्योग पर पाबंदी लगाने वाले नियमों का हो रहा था भारी विरोध; जयंत चौधरी, BKU और AIKS ने किया फैसले का स्वागत

01 Jun 2026  |  118

 

 

नई दिल्ली / नीतिगत डेस्क

देश के गन्ना किसानों, किसान संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। केंद्र सरकार ने चौतरफा विरोध और चौतरफा दबाव के बाद सुगरकेन (कंट्रोल) अमेंडमेंट ऑर्डर, 2026 के उस विवादित ड्राफ्ट (मसौदे) को वापस ले लिया है, जिसे 20 अप्रैल 2026 को जारी किया गया था। इस मसौदे के जरिए सरकार असंगठित क्षेत्र के 'गुड़' (Jaggery/Gur) और 'खांडसारी' (पारंपरिक अपरिष्कृत कच्ची चीनी) इकाइयों को विनियमित (Regulate) करना चाहती थी, जिसका किसान संगठन पुरजोर विरोध कर रहे थे।

केंद्रीय खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा जारी एक आधिकारिक ज्ञापन (Office Memorandum) के अनुसार, परामर्श अवधि के दौरान राज्य सरकारों और विभिन्न हितधारकों से भारी मात्रा में सुझाव और आपत्तियां प्राप्त हुईं। इन पर समीक्षा करने के बाद केंद्र ने माना कि इस प्रस्तावित आदेश पर अभी और अधिक विचार-विमर्श तथा गहन परीक्षण की आवश्यकता है, इसलिए फिलहाल इस ड्राफ्ट को वापस लिया जा रहा है।

क्यों हो रहा था ड्राफ्ट का विरोध? समझें गणित

किसान संगठनों का आरोप था कि इस ड्राफ्ट के प्रावधानों से गन्ना उत्पादकों के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले गुड़ और खांडसारी उद्योगों पर बेहद बुरा असर पड़ता।

भारतीय कृषि में गुड़-खांडसारी का महत्व:

उत्पादन की खपत: एक मोटे अनुमान के मुताबिक, भारत के कुल वार्षिक गन्ना उत्पादन (लगभग 435 मिलियन टन) का करीब 31 प्रतिशत हिस्सा इन स्थानीय गुड़, खांडसारी और जागरी इकाइयों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है।

रोजगार और ओनरशिप: ये इकाइयां बड़े पैमाने पर सूक्ष्म और लघु उद्योग (MSMEs) के अंतर्गत आती हैं, जिन्हें या तो खुद गन्ना किसान चलाते हैं या फिर स्थानीय ग्रामीण उद्यमी।

उत्तर प्रदेश के 'कोल्हू-क्रशर्स' को बड़ी राहत

इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना बेल्ट को मिलने जा रहा है। यूपी के शीर्ष 10-12 गन्ना उत्पादक जिलों में स्थानीय भाषा में 'कोल्हू-क्रशर' कहे जाने वाले इन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स की भरमार है।

इकाइयों की संख्या: प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों में प्रति जिला लगभग 2,000 से 3,000 ऐसी स्थानीय इकाइयां सक्रिय हैं।

प्रभावित क्षेत्र: यह फैसला मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत, सहारनपुर, बिजनौर, अमरोहा और बरेली जैसे क्षेत्रों के लाखों किसानों को सीधी राहत देगा। अकेले बिजनौर जिले में भारतीय किसान यूनियन (BKU) के जरिए करीब 2,000 किसानों ने ईमेल भेजकर सरकार के सामने अपना विरोध दर्ज कराया था।

किसान संगठनों ने मनाया जीत का जश्न

सरकार के इस 'यू-टर्न' को किसान संगठनों ने अपनी एकजुटता की जीत बताया है:

संगठन / प्रतिनिधिप्रतिक्रिया एवं कदम
भारतीय किसान यूनियन (BKU)गैर-राजनीतिक संगठन BKU ने शुरुआत से ही इस ड्रॉफ्ट का कड़ा विरोध किया और हजारों किसानों से सरकार को विरोध-ईमेल भिजवाए।
ऑल इंडिया किसान सभा (AIKS)वामपंथी झुकाव वाले इस संगठन ने इसे देश के मेहनतकश गन्ना किसानों की बड़ी जीत बताया। AIKS के अध्यक्ष राजन क्षीरसागर ने कहा, "सरकार को झुकना पड़ा।" संगठन ने पिछले 5 हफ्तों में यूपी, तमिल नाडु, बिहार, हरियाणा, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन किए थे।

 

केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने भी किया स्वागत

इस बीच, केंद्रीय कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर सरकार के इस संवेदनशील फैसले की सराहना की है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय व्यापक परामर्श प्रक्रिया के आधार पर नीतिगत फैसले लेने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

गौरतलब है कि कुछ हफ्ते पहले ही किसान संगठनों ने जयंत चौधरी से मुलाकात कर इस ड्राफ्ट को लेकर अपनी चिंताएं जताई थीं, जिसके बाद माना जा रहा है कि मंत्री ने इन चिंताओं को सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाया था।

निष्कर्ष: सुगरकेन कंट्रोल ऑर्डर के ड्राफ्ट को वापस लिया जाना यह साबित करता है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नीति निर्धारण के दौरान जमीनी स्तर के हितधारकों (Stakholders) की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकार के इस कदम से आगामी पेराई सीजन से पहले देश के करोड़ों गन्ना किसानों और छोटे क्रशर मालिकों ने चैन की सांस ली है।

अन्य खबरें