मुंबई।
महाराष्ट्र के लाखों किसान परिवारों के लिए मानसून से पहले बेहद राहत भरी और बड़ी खबर सामने आ रही है। लंबे समय से प्रतीक्षित कर्ज माफी योजना को आखिरकार राज्य मंत्रिमंडल (कैबिनेट) ने अपनी हरी झंडी दे दी है। इस ऐतिहासिक फैसले के तहत प्रदेश के पात्र किसानों का 2 लाख रुपये तक का कृषि ऋण (फसल कर्ज) पूरी तरह माफ किया जाएगा। सरकार के इस कदम से संकट से जूझ रहे खेती-किसानी से जुड़े परिवारों को एक संबल और नई शुरुआत करने का मौका मिलेगा।
चुनावी आचार संहिता के चलते अभी घोषणा पर 'ब्रेक'
कैबिनेट से प्रस्ताव पास होने के बावजूद किसान भाइयों को इसकी आधिकारिक घोषणा के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा। राज्य में फिलहाल विधानसभा उपचुनावों के चलते आदर्श आचार संहिता (Code of Conduct) लागू है। यही कारण है कि सरकार अभी इसका औपचारिक ऐलान नहीं कर रही है। चुनाव प्रक्रिया पूरी होते ही योजना का विस्तृत दिशा-निर्देश (Guidelines) और नियमों व शर्तों का आधिकारिक दस्तावेज जारी कर दिया जाएगा।
योजना का पूरा गणित और प्रमुख शर्तें
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस कर्ज माफी योजना का खाका बेहद व्यापक तैयार किया गया है:
| योजना के मुख्य बिंदु | विवरण और शर्तें |
|---|---|
| कट-ऑफ डेट (समयसीमा) | 30 सितंबर 2025 तक के बकाया फसल ऋण इस योजना के दायरे में आएंगे। |
| माफी की अधिकतम सीमा | प्रति पात्र किसान अधिकतम ₹2,00,000 (दो लाख रुपये) तक का कर्ज माफ होगा। |
| प्रोत्साहन राशि | नियमित और समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों को ₹50,000 तक का इनाम/अनुदान मिलेगा। |
| कुल लाभार्थी | राज्य के करीब 56 लाख किसानों को सीधा फायदा मिलने का अनुमान है। |
| राजकोषीय बोझ | इस महा-योजना से महाराष्ट्र सरकार के खजाने पर करीब ₹25,000 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। |
नियमित कर्ज चुकाने वाले वफादार किसानों का भी सम्मान
अक्सर कर्ज माफी योजनाओं में यह शिकायत रहती है कि समय पर ईमानदारी से पैसा चुकाने वाले किसानों को कुछ नहीं मिलता। लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने इस बार संतुलन बनाने की कोशिश की है। जिन किसानों ने बैंक का ऋण समय पर चुकता किया है, उन्हें हतोत्साहित होने से बचाने के लिए सरकार 50,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि देगी।
ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश की मार के बाद मिला मरहम
बीते साल (2025) राज्य के कई हिस्सों में हुई भारी ओलावृष्टि और खराब मौसम के चलते किसानों की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई थीं। इस भारी नुकसान के बाद से ही विभिन्न किसान संगठनों और राजनीतिक दलों द्वारा कर्ज माफी की मांग को लेकर लगातार आंदोलन किए जा रहे थे। सरकार ने किसानों को आश्वासन दिया था कि 30 जून 2026 से पहले उन्हें बड़ी राहत दी जाएगी, और कैबिनेट की इस मंजूरी के साथ सरकार ने अपना वह वादा पूरा कर दिया है।
खेती-किसानी में दौड़ी खुशी की लहर
मानसून की आहट के बीच कर्ज मुक्ति की इस खबर ने राज्य के ग्रामीण इलाकों और कृषि मंडियों में खुशी का माहौल बना दिया है। किसानों का मानना है कि इस फैसले से उनके सिर से बरसों पुराना कर्ज का बोझ उतरेगा, जिससे वे आगामी खरीफ सीजन की बुआई और नई फसल की तैयारी बिना किसी मानसिक तनाव के और बेहतर ढंग से कर सकेंगे।