नई दिल्ली।
केंद्र सरकार उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा और शुद्धता की गारंटी सुनिश्चित करने के लिए सोने की तर्ज पर चांदी के जेवरों और कलाकृतियों पर भी हॉलमार्किंग को पूरी तरह अनिवार्य बनाना चाहती है। हालांकि, मौजूदा व्यवस्था में चांदी पर हॉलमार्किंग स्वैच्छिक (Voluntary) है। खरीदारों को शुद्धता की सटीक जांच की सुविधा देने के लिए सितंबर 2025 से चांदी की वस्तुओं पर 'हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन' (HUID) नंबर को भी लागू किया जा चुका है।
लेकिन, इसे देशभर में अनिवार्य कानून के रूप में लागू करने की राह में सरकार और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के सामने कई गंभीर कूटनीतिक और ढांचागत चुनौतियाँ खड़ी हैं।
क्यों पेचीदा है चांदी का बाजार?
ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) के महानिदेशक संजय गर्ग के अनुसार, सोने और चांदी के बाजारों के चरित्र में बहुत बड़ा अंतर है:
व्यापक दायरा: सोने के विपरीत, चांदी के उत्पाद सिर्फ चुनिंदा आभूषणों तक सीमित नहीं हैं। चांदी के छोटे-बड़े गहनों और बर्तनों से लेकर भारी-भरकम फर्नीचर तक बाजार में बिकते हैं।
असंगठित रिटेल नेटवर्क: चांदी का कारोबार देश के सुदूर इलाकों में बेहद छोटे से लेकर बड़े कॉर्पोरेट स्टोर्स तक फैला हुआ है, जिससे इसकी हर कड़ी पर नजर रखना बेहद मुश्किल काम है।
फिलहाल बीआईएस चांदी की अनिवार्य हॉलमार्किंग के लिए जरूरी रेगुलेटरी फ्रेमवर्क और टेस्टिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर की व्यवहार्यता का गहन अध्ययन कर रहा है।
'मैनपावर' का भारी संकट: सिर्फ 5 लोगों के भरोसे BIS
चांदी की हॉलमार्किंग को अनिवार्य करने की राह में सबसे बड़ा रोड़ा कर्मचारियों की भारी कमी है। महानिदेशक के मुताबिक, बीआईएस में हॉलमार्किंग का पूरा केंद्रीय जिम्मा सिर्फ 5 अधिकारियों की कोर टीम संभालती है। बाकी के कार्यों के लिए निजी संस्थाओं या आउटसोर्स कर्मचारियों पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसी स्थिति में निजी सेंटर्स के माध्यम से शुद्धता की उच्च गुणवत्ता बनाए रखना और जनता का भरोसा जीतना एक बहुत बड़ी चुनौती है।
"हम जानबूझकर थोड़ी धीमी गति से आगे बढ़ रहे हैं क्योंकि हम कोई बड़ी चूक नहीं करना चाहते। अनिवार्य कानून बनाने से पहले हम पूरे सिस्टम को फूलप्रूफ (दोषमुक्त) करना चाहते हैं।"
- संजय गर्ग, महानिदेशक (BIS)
चांदी हॉलमार्किंग: अब तक का सफरनामा (आंकड़ों की नजर से)
यद्यपि अभी यह व्यवस्था स्वैच्छिक है, फिर भी पिछले कुछ समय में चांदी की टेस्टिंग में अच्छी प्रगति देखी गई है:
| विवरण / वित्तीय वर्ष | प्रगति के आंकड़े |
|---|---|
| वित्त वर्ष 2025-26 | 32 लाख से अधिक चांदी के उत्पादों की हॉलमार्किंग की गई। |
| कुल हॉलमार्क उत्पाद (अब तक) | लगभग 59 लाख चांदी के गहनों/कलाकृतियों की जांच पूरी। |
| सक्रिय टेस्टिंग सेंटर्स (2024-25) | चांदी के परीक्षण के लिए देश में 230 मान्यता प्राप्त केंद्र कार्यरत। |
दूसरी तरफ: सोने की हॉलमार्किंग ने छुए नए आयाम
जहां चांदी को लेकर अभी मंथन चल रहा है, वहीं सोने (Gold) की अनिवार्य हॉलमार्किंग का दायरा देश में लगातार मजबूत हो रहा है। हाल ही में सरकार ने 7 नए जिलों को इस दायरे में शामिल किया है, जिसके बाद अब देश के 380 जिलों में गोल्ड हॉलमार्किंग पूरी तरह अनिवार्य हो चुकी है।
2021 में हुई शुरुआत: वर्ष 2021 में अनिवार्य किए जाने के बाद से अब तक सोने के 60 करोड़ से ज्यादा आभूषणों पर हॉलमार्किंग की जा चुकी है।
कैरेट का दायरा: बीआईएस ने 14, 18, 20, 22, 23 और 24 कैरेट के सोने के लिए हॉलमार्किंग को अनिवार्य किया है। (9 कैरेट पर यह केवल स्वैच्छिक है)।
BIS Care App: उपभोक्ता घर बैठे 'बीआईएस केयर ऐप' पर एचयूआईडी (HUID) नंबर दर्ज कर अपने सोने के गहनों की शुद्धता और उसकी प्रामाणिकता की तुरंत जांच कर सकते हैं।
निष्कर्ष:
साफ है कि सरकार चांदी के बाजार को भी सोने की तरह पारदर्शी बनाना चाहती है। लेकिन जब तक ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) के पास पर्याप्त श्रमशक्ति और मजबूत जांच केंद्र नहीं हो जाते, तब तक चांदी पर हॉलमार्किंग को पूरी तरह अनिवार्य करना जल्दबाजी होगी। इसीलिए सरकार 'धीरे-धीरे और सुरक्षित' नीति के तहत आगे बढ़ रही है।