राहत या जख्मों पर नमक? केंद्र ने ढीले किए प्याज खरीद के नियम, लेकिन ₹3,000 MSP पर अड़े महाराष्ट्र के किसान

नेफेड (NAFED) और NCCF के ₹1,580 प्रति क्विंटल के भाव से नाराज उत्पादक; संगठन का दावा—₹1,800 तो लागत है, घाटे में बेचने को मजबूर किसान; ₹1,500 प्रति क्विंटल सब्सिडी की भी उठी मांग।

07 Jun 2026  |  69

 

 

नासिक/मुंबई।

केंद्र सरकार द्वारा प्याज खरीद (Onion Procurement) के नियमों में ढील दिए जाने के फैसले का महाराष्ट्र के किसानों ने स्वागत तो किया है, लेकिन साथ ही इसे नाकाफी बताया है। किसान संगठनों का कहना है कि नियमों में ढील देने से जमीनी स्तर पर बहुत मामूली राहत मिलेगी। संकट से जूझ रहे प्याज उत्पादकों ने सरकार से मांग की है कि प्याज की न्यूनतम खरीद कीमत कम से कम 3,000 रुपये प्रति क्विंटल तय की जाए।

किसानों के मुताबिक, केंद्रीय एजेंसियों—नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NAFED) और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (NCCF)—द्वारा दिया जा रहा 1,580 रुपये प्रति क्विंटल का मौजूदा भाव बाजार की उम्मीदों से बेहद कम है और इससे फसल की लागत भी नहीं निकल पा रही है।

केंद्र सरकार ने नियमों में क्या दी है ढील?

प्याज खरीद को तेज करने और किसानों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने आकार (Size) और गुणवत्ता (Quality) के कड़े मानकों को आसान बना दिया है:

साइज का दायरा बढ़ा: पहले जहां केवल 45-65 mm साइज के प्याज ही खरीदे जाते थे, वहीं अब 35-70 mm साइज के प्याज भी स्वीकार किए जाएंगे।

क्वालिटी मानकों में रियायत: प्याज पर हल्के दाग-धब्बे, रंग का उतार-चढ़ाव, छिलके के डिफेक्ट और धूप से हुए मामूली नुकसान (Sun Damage) के बावजूद एजेंसियां उसे रिजेक्ट नहीं करेंगी।

"लागत ₹1,800 और मिल रहे ₹1,580"—किसानों का दर्द

महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संगठन के अध्यक्ष भारत दिघोले ने कहा कि राज्य में प्याज उत्पादन की औसत लागत ही लगभग 1,800 रुपये प्रति क्विंटल आती है। ऐसे में किसानों को लागत से भी कम कीमत पर फसल बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया, "जब किसान उत्पादन लागत से नीचे बेचने को मजबूर हैं, तो वे भारी वित्तीय संकट में फंस रहे हैं। केंद्रीय एजेंसियों द्वारा घोषित ये दरें किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसी हैं।"

संगठन के नासिक जिला अध्यक्ष जयदीप भदाणे ने बताया कि पुराने ग्रेडिंग सिस्टम के कारण यदि कोई किसान 30 क्विंटल प्याज लाता था, तो केवल 25 क्विंटल ही पास होता था और बचा हुआ प्याज खुले बाजार में ओने-पौने दाम पर बेचना पड़ता था। नए नियमों से फायदा तभी होगा जब इसे जमीनी स्तर पर सही से लागू किया जाए।

किसान संगठनों की प्रमुख मांगें

क्र.सं.मांगेंविवरण / कारण
1.₹3,000 प्रति क्विंटल दरमौजूदा ₹1,580 की दर बाजार की उम्मीदों और लागत से काफी कम है।
2.₹1,500 क्विंटल सब्सिडीपिछले 4-5 महीनों से कम दामों पर प्याज बेचने वाले लाखों किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए।
3.पारदर्शिता और APMC खरीदनेफेड और NCCF रोजाना किसानों की सूची जारी करें और खरीद कृषि उपज मंडी समितियों (APMCs) के जरिए हो।

 

मंडी फीस माफ, पर असली फायदा किसे?

प्याज खरीद की रफ्तार बढ़ाने और ट्रांजैक्शन कॉस्ट कम करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने नेफेड और NCCF के सौदों पर लगने वाली APMC फीस को माफ कर दिया है। हालांकि, किसान नेताओं का कहना है कि जब तक खरीद की कीमतें नहीं बढ़ाई जातीं, तब तक इस फीस माफी का सीधा फायदा किसानों को मिलने के बजाय सिर्फ सरकारी खरीद एजेंसियों की जेब में ही जाएगा।

निष्कर्ष:

एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडियों में शुमार नासिक की लासलगांव मंडी समेत पूरे महाराष्ट्र के किसान अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। संगठनों ने चेतावनी दी है कि केवल कागजी नियमों को ढीला करने से प्याज उत्पादकों का संकट दूर नहीं होगा। किसानों को वास्तविक न्याय तभी मिलेगा जब उन्हें लाभकारी मूल्य (Fair Prices) और पिछले नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाएगा।

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