आसमान में 'हाई-वोल्टेज ड्रामा': सिरफिरे यात्री ने हवा में तोड़ी फ्लाइट की खिड़की, कस्टडी से भागने की कोशिश भी नाकाम

एयर इंडिया के विमान में लैंडिंग से ठीक पहले मची अफरा-तफरी; आरोपी को 'नो-फ्लाई लिस्ट' में डालने की तैयारी, माता-पिता ने बताया मानसिक बीमार।

10 Jun 2026  |  115

 

 

नई दिल्ली।

चंडीगढ़ से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट (AI1879) में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक यात्री ने हवा में ही विमान की खिड़की के अंदरूनी हिस्से (पैनल) को तोड़ दिया। केबिन क्रू की बार-बार दी गई चेतावनियों के बावजूद यात्री का आक्रामक व्यवहार जारी रहा। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport) पर सुरक्षित लैंडिंग के बाद आरोपी को सुरक्षा एजेंसियों के हवाले कर दिया गया। लेकिन उसका ड्रामा यहीं खत्म नहीं हुआ; उसने पुलिस कस्टडी से भी भागने की नाकाम कोशिश की। एयर इंडिया ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी को 'नो-फ्लाई लिस्ट' में डालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

लैंडिंग से ठीक पहले खिड़की पर हमला

यह पूरी घटना 7 जून की शाम की है। विमान दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड करने ही वाला था कि अचानक एक यात्री विमान की खिड़की के अंदरूनी हिस्से को नुकसान पहुंचाने लगा। केबिन क्रू ने उसे कई बार रोकने की कोशिश की, लेकिन उसने किसी की एक न सुनी।

क्या होती है अंदरूनी खिड़की?

तकनीकी भाषा में जिस हिस्से को नुकसान पहुंचाया गया, उसे 'स्क्रैच पेन' (Scratch Pane) कहा जाता है। यह प्लास्टिक की एक सुरक्षात्मक परत होती है, जो मुख्य खिड़की को सुरक्षित रखती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे विमान की मुख्य संरचना या सुरक्षा को कोई खतरा नहीं हुआ, लेकिन एविएशन नियमों के तहत इसे एक गंभीर अपराध माना जाता है।

थाने में माफीनामा और फिर कस्टडी से भागने का प्रयास

दिल्ली में विमान उतरने के बाद आरोपी को तुरंत सुरक्षाकर्मियों को सौंप दिया गया, जहाँ वह अपनी गलती के लिए माफी मांगने लगा। 8 जून की सुबह पुलिस हिरासत में रात बिताने के बाद आरोपी का एक और ड्रामा सामने आया। सुबह करीब 9:30 बजे आरोपी यात्री टर्मिनल-3 के चेक-इन एरिया से अचानक भागने लगा। उसे भागता देख केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की क्विक रिस्पांस टीम (QRT) के जवानों ने मुस्तैदी दिखाई और दौड़कर उसे दबोच लिया।

एयरलाइन का सख्त एक्शन प्लान

पहलूविवरण
एयरलाइन की नीतिउड़ानों में यात्रियों और स्टाफ की सुरक्षा के लिए 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) पॉलिसी।
जांच समयसीमाडीजीसीए (DGCA) के नियमों के तहत एयरलाइन की इंटरनल कमेटी 30 दिनों के भीतर मामले की जांच करेगी।
संभावित कार्रवाईकमेटी तय करेगी कि यात्री को कितनी अवधि के लिए 'नो-फ्लाई लिस्ट' (No-Fly List) में डाला जाए।

 

परिजनों ने बताया मानसिक रूप से बीमार

पूछताछ के दौरान आरोपी यात्री के माता-पिता ने पुलिस को बताया कि उनका बेटा मानसिक बीमारी से जूझ रहा है। उन्होंने उसे पटना ले जाने के लिए एयर इंडिया से टिकट देने की गुहार भी लगाई, लेकिन एयरलाइन ने सुरक्षा जांच और नियमों का हवाला देते हुए उसे दोबारा फ्लाइट में बिठाने से साफ इनकार कर दिया। फिलहाल, सभी आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पुलिस ने यात्री को उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया है।

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