चंडीगढ़।
धान की रोपाई के मौजूदा सीजन के बीच भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) ने पंजाब और हरियाणा सहित अपने सभी साझेदार राज्यों के लिए एक महत्वपूर्ण परामर्श जारी किया है। चंडीगढ़ में आयोजित बीबीएमबी की तकनीकी समिति की बैठक में राज्यों को सलाह दी गई है कि वे भाखड़ा जलाशय से सिंचाई के लिए अधिक से अधिक पानी उठाएं। बोर्ड का उद्देश्य आगामी मानसून और पहाड़ों पर बर्फ पिघलने से होने वाले अतिरिक्त जल प्रवाह से पहले बांध में पर्याप्त सुरक्षात्मक भंडारण क्षमता (फ्लड कुशन) बनाए रखना है।
पिछले साल के मुकाबले 21 फीट अधिक पानी
बीबीएमबी द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस साल भाखड़ा जलाशय की स्थिति पिछले वर्षों की तुलना में काफी मजबूत है:
9 जून को जलस्तर: 1,578.07 फीट दर्ज किया गया।
पिछले वर्ष इसी दिन का स्तर: 1,556.60 फीट था (यानी पिछले साल से 21.47 फीट अधिक)।
दीर्घकालिक औसत: इस अवधि का सामान्य औसत 1,543.72 फीट रहता है, जिससे वर्तमान स्तर काफी ऊपर है।
चिंता: भारी बारिश की स्थिति में सीमित रह जाएगी क्षमता
पूर्ण जलस्तर से सिर्फ 102 फीट नीचे: अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जलाशय इस समय अपनी अधिकतम भराव क्षमता से केवल 102 फीट नीचे है। ऐसी स्थिति में यदि सतलुज बेसिन में भारी बारिश होती है या अचानक पानी की आवक बढ़ती है, तो अतिरिक्त पानी को रोकने की क्षमता सीमित रह जाएगी। इसीलिए राज्यों से उपलब्ध जल का अधिकतम उपयोग करने को कहा गया है।
भंडारण की स्थिति: आंकड़ों पर एक नजर
| पैरामीटर | वर्तमान स्थिति (9 जून) | पिछले वर्ष की स्थिति | दीर्घकालिक औसत |
|---|---|---|---|
| जीवित भंडारण (Live Storage) | 1.75 अरब घन मीटर (BCM) | 1.27 अरब घन मीटर (BCM) | - |
| कुल भराव क्षमता (प्रतिशत में) | 31% | 22% (9 जून 2025) | 18% |
| पानी की आवक (Inflow) | 13,748 क्यूसेक | 21,792 क्यूसेक | - |
| पानी की निकासी (Outflow) | 20,763 क्यूसेक | 30,528 क्यूसेक | - |
मांग में कमी से बढ़ी चिंता
तकनीकी समिति की बैठक में यह बात भी सामने आई कि राज्यों में धान की रोपाई शुरू हो चुकी है, जिसके लिए भारी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। इसके बावजूद साझेदार राज्यों ने अभी तक अपने कोटे का अपेक्षित पानी उठाना शुरू नहीं किया है। यही कारण है कि वर्तमान में बांध से पानी की निकासी (20,763 क्यूसेक) पिछले साल (30,528 क्यूसेक) के मुकाबले काफी कम रखी गई है।
बीबीएमबी ने राज्यों से अपील की है कि वे अपनी सिंचाई आवश्यकताओं को तेजी से पूरा करें, ताकि किसानों को भी भरपूर पानी मिले और बांध प्रशासन को आगामी मानसून सीजन में जल प्रबंधन करने में कोई असुविधा न हो।