कोलकाता/नई दिल्ली:
पश्चिम बंगाल की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। बंगाल में 15 साल की सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) का संकट गहराता ही जा रहा है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि ममता बनर्जी की बेहद करीबी और पार्टी की फायरब्रांड चेहरा मानी जाने वाली सयानी घोष ने भी बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है। बंगाल में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद अब टीएमसी ताश के पत्तों की तरह बिखरती नजर आ रही है।
20 लोकसभा सांसदों का बागी गुट, सुदीप बंदोपाध्याय भी शामिल
जादवपुर लोकसभा क्षेत्र से टीएमसी सांसद सयानी घोष अकेली नहीं हैं, बल्कि उनके साथ पार्टी के कुल 20 लोकसभा सांसदों का एक बड़ा गुट बागी हो चुका है। इस बागी गुट में टीएमसी के कद्दावर नेता सुदीप बंदोपाध्याय का नाम भी शामिल है। लोकसभा में तृणमूल के कुल 28 सांसद हैं, जिनमें से 20 सांसदों के अलग होने के बाद ममता बनर्जी संसद में बिल्कुल अलग-थलग पड़ गई हैं।
भूपेंद्र यादव के घर गुप्त बैठक और स्पीकर को पत्र
इस पूरी बगावत की पटकथा बीते दिनों दिल्ली में लिखी गई।
बड़ी बैठक: टीएमसी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष की अगुवाई में बागी सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पर एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी विशेष रूप से मौजूद थे।
लोकसभा में नया गुट: बैठक के बाद इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र सौंपा, जिसमें 20 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। सांसद काकोली घोष ने संसद में एक अलग गुट बनाने का दावा भी पेश कर दिया है।
राज्यसभा से दो बड़े इस्तीफे; ममता को दिल्ली में लगा झटका
एक तरफ लोकसभा सांसदों ने मोर्चा खोला, तो दूसरी तरफ राज्यसभा में भी टीएमसी को दो करारे झटके लगे हैं:
सुखेंदु शेखर राय (8 जून): जब ममता बनर्जी दिल्ली में 'इंडिया गठबंधन' की बैठक में हिस्सा ले रही थीं, ठीक उसी वक्त सुखेंदु शेखर राय ने राज्यसभा से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया।
सुष्मिता देव (10 जून): इसके ठीक दो दिन बाद, बुधवार को असम की कद्दावर नेता सुष्मिता देव ने भी टीएमसी से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने के तुरंत बाद उन्होंने असम के सीएम हिमंता बिस्व सरमा से मुलाकात की, जिससे उनके अगले राजनीतिक कदम के संकेत मिल गए हैं।
बगावत का सिलसिला: ऋतब्रत बनर्जी से शुरू हुई थी कहानी
| बागी नेता / घटनाक्रम | राजनीतिक असर | वर्तमान स्थिति |
|---|---|---|
| ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा | पार्टी से निष्कासन के बाद बने बागी | ऋतब्रत अपने साथ 58 विधायकों को लेकर विपक्ष के नेता बने (विधायक तकनीकी रूप से TMC में हैं)। |
| काकोली घोष व 20 सांसद | लोकसभा स्पीकर को सौंपा पत्र | लोकसभा में अलग गुट बनाने का किया दावा। |
| सुखेंदु शेखर व सुष्मिता देव | राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा | ममता बनर्जी के केंद्रीय नेतृत्व को सीधी चुनौती। |
वजूद की लड़ाई लड़ रही हैं ममता बनर्जी
ममता बनर्जी इस समय अपने राजनीतिक जीवन के सबसे कठिन और बुरे दौर से गुजर रही हैं। जो नेता कभी उनके सबसे वफादार और 'अपने' हुआ करते थे, वे अब एक-एक कर उनका साथ छोड़ रहे हैं। विरोधियों के इन तीखे तेवरों ने ममता को बिल्कुल अकेला कर दिया है। अब दीदी के सामने न सिर्फ अपनी पार्टी को बिखरने से बचाने की चुनौती है, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के राजनीतिक अस्तित्व को बचाए रखने का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है।