गुजरात सरकार का बड़ा फैसला: आज से खुलेगा नर्मदा नहर का पानी, खरीफ सीजन में किसानों को बड़ी राहत

मानसून आने से पहले ही खेतों तक पहुंचेगी 'नर्मदा मैया'; राज्य के 1.73 लाख हेक्टेयर में बुआई को मिलेगा नया जीवन।

10 Jun 2026  |  115

 

गांधीनगर। गुजरात के किसानों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। राज्य में खरीफ फसलों की बुआई शुरू होने के साथ ही गुजरात सरकार ने खेतों को सिंचाई सहायता देने के लिए 11 जून (गुरुवार) से ही नर्मदा नहर नेटवर्क के जरिए पानी छोड़ने का एक बड़ा फैसला किया है। यह कदम मॉनसून के आगमन से पहले फसलों को सूखने से बचाने और बुआई की गति को बनाए रखने में जीवनदायिनी साबित होगा।

यह निर्णय मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया, जहां नर्मदा परियोजना के मौजूदा जल स्टॉक और फसलों की जरूरतों की गहन समीक्षा की गई।

नेताओं की मांग और समय से पहले पानी छोड़ने का फैसला

आमतौर पर तय शेड्यूल के मुताबिक पानी बाद में जारी किया जाता है, लेकिन नर्मदा कमांड एरिया के सांसदों और विधायकों (MPs and MLAs) ने सरकार से गुहार लगाई थी कि शुरुआती कृषि कार्यों को सहारा देने के लिए पानी जल्दी छोड़ा जाए। इसी जनभावना को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने तय तारीख से पहले ही नहरों में पानी का प्रवाह शुरू करने के निर्देश दिए।

क्यों जरूरी था यह फैसला?

राज्य में अब तक 1.73 लाख हेक्टेयर से अधिक जमीन पर खरीफ की बुआई हो चुकी है। मौसम विभाग के मुताबिक गुजरात में मानसून 15 जून के बाद दस्तक देगा। ऐसे में मानसून आने और उसके पूरे राज्य में सक्रिय होने तक, फसलों के अंकुरण (Germination) और उन्हें जिंदा रखने के लिए यह पानी बेहद जरूरी था।

सौराष्‍ट्र क्षेत्र पर सबसे ज्यादा ध्यान, कपास और मूंगफली मुख्य फसलें

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में अब तक हुई कुल बुआई में दो प्रमुख फसलों का दबदबा है:

कपास (Cotton): लगभग 93,000 हेक्टेयर क्षेत्र।

मूंगफली (Groundnut): लगभग 55,000 हेक्टेयर क्षेत्र।

खरीफ की शुरुआती बुआई का सबसे बड़ा हिस्सा सौराष्ट्र क्षेत्र में केंद्रित है। कुल 1.73 लाख हेक्टेयर में से अकेले 1.1 लाख हेक्टेयर की बुआई सौराष्ट्र के 11 जिलों में की जा चुकी है। यही वजह है कि इस क्षेत्र को समय पर सिंचाई सहायता देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता थी।

गुजरात की 'लाइफलाइन' है नर्मदा नहर नेटवर्क

नर्मदा नहर नेटवर्क को गुजरात की कृषि व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यह प्रणाली न केवल सौराष्ट्र, बल्कि कच्छ, उत्तर गुजरात और राज्य के अन्य हिस्सों में फैले कृषि क्षेत्रों को पानी की आपूर्ति करती है। जब तक मानसूनी बारिश पूरे राज्य में व्यापक रूप से शुरू नहीं हो जाती, तब तक नहर का यह पानी खेतों में नमी बनाए रखने का काम करेगा।

इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेड के अध्यक्ष मुकेश पुरी, जल आपूर्ति विभाग की प्रधान सचिव शाहमीना हुसैन, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव विक्रांत पांडे सहित नर्मदा परियोजना और नहर प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

निष्कर्ष: सरकार के इस समयबद्ध फैसले से किसानों को मानसून की अनिश्चितता से जूझने की ताकत मिलेगी। समय से पहले पानी मिलने से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होने की उम्मीद है, बल्कि जिन किसानों ने अभी तक बुआई शुरू नहीं की है, वे भी बिना डरे अपने कदम आगे बढ़ा सकेंगे।

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