TMC में बगावत के बीच राहुल गांधी से मिले अभिषेक बनर्जी, क्या होने जा रहा है कांग्रेस-तृणमूल का विलय?

ममता-सोनिया की 'जादुई झप्पी' के बाद अब 10 जनपथ पर 90 मिनट का महामंथन; सुष्मिता देव के इस्तीफे और बंगाल में हार के बाद बैकफुट पर तृणमूल।

10 Jun 2026  |  120

 

राजनीतिक डेस्क। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सुलग रही बगावत की चिंगारी अब एक बड़े राजनीतिक भूकंप का रूप लेती दिख रही है। इस आंतरिक संकट के बीच, टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को नई दिल्ली में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की।

10 जनपथ पर दोनों युवा नेताओं के बीच करीब 90 मिनट (डेढ़ घंटे) तक चली इस मैराथन बैठक ने देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। इसके साथ ही टीएमसी और कांग्रेस के संभावित विलय (TMC-Congress Merger) की अटकलें एक बार फिर चरम पर पहुंच गई हैं।

10 जनपथ पर क्या पका?

सूत्रों के मुताबिक, इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य एजेंडा विपक्षी INDIA गठबंधन को मजबूत करना और भविष्य की संयुक्त रणनीति तैयार करना था। बड़ी बात यह निकलकर आ रही है कि तृणमूल कांग्रेस ने अब राष्ट्रीय स्तर पर राहुल गांधी के नेतृत्व को खुले दिल से स्वीकार करने के संकेत दिए हैं।

यह मुलाकात ठीक उस तस्वीर के बाद हुई है, जिसमें मंगलवार को टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की थी। दोनों महिला नेताओं के गले मिलने की 'वॉर्म' तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं।

विलय पर कांग्रेस का रुख: 'गेंद ममता के पाले में'

अभिषेक-राहुल की मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में दोनों पार्टियों के एक होने (विलय) की चर्चाएं गर्म हैं। हालांकि, कांग्रेस ने इस पर बेहद सधा हुआ रुख अपनाया है:

कांग्रेस आलाकमान ने साफ किया है कि उनकी तरफ से विलय को लेकर कोई जल्दबाजी या दबाव नहीं है।

अगर ऐसा कोई प्रस्ताव आता है, तो वह पहल तृणमूल कांग्रेस की तरफ से होनी चाहिए।

इतिहास का पहिया: 1998 से 2026 तक का सफर

यदि यह विलय होता है, तो भारतीय राजनीति का इतिहास एक पूरा चक्र (Full Circle) पूरा कर लेगा:

1998: ममता बनर्जी ने कांग्रेस आलाकमान से मतभेदों के बाद पार्टी छोड़ी और तृणमूल कांग्रेस का गठन किया।

2011: दोनों पार्टियों ने मिलकर बंगाल से 34 साल के वामपंथी शासन (वाम मोर्चा) को उखाड़ फेंका।

2024: लोकसभा चुनाव में दोनों दल INDIA ब्लॉक के तहत फिर करीब आए।

2026: बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की करारी हार के बाद पार्टी ताश के पत्तों की तरह बिखरने लगी है। कई विधायकों और सांसदों के बागी तेवरों के बीच ममता को एक बार फिर अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस की याद आई है।

सुष्मिता देव का इस्तीफा: टीएमसी को असम में बड़ा झटका

बगावत की इस कहानी में बुधवार को उस समय एक और बड़ा मोड़ आ गया, जब टीएमसी की फायरब्रांड सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। साल 2021 में कांग्रेस छोड़कर टीएमसी में आईं सुष्मिता की अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की प्रबल संभावना है। हाल ही में उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से भी मुलाकात की है, जिससे उनके अगले कदम के संकेत मिल चुके हैं।

बीजेपी का तीखा तंज: 'जिसके पास खुद छत नहीं, वो दूसरों को क्या शरण देगा'

इस पूरे घटनाक्रम पर चुटकी लेते हुए बीजेपी नेता राजू तिब्रेवाल ने कहा, "ये सिर्फ सत्ता का खेल है। राहुल गांधी और सोनिया गांधी के पास खुद राजनीतिक रूप से कोई मजबूत छत नहीं बची है, ऐसे में वो डूबती हुई टीएमसी को क्या शरण देंगे?"

संपादकीय टिप्पणी: बंगाल में जमीन खिसकने और आंतरिक कलह से जूझ रहीं ममता बनर्जी के लिए कांग्रेस के साथ करीबी बढ़ाना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। देखना दिलचस्प होगा कि क्या 'दीदी' अपनी 28 साल पुरानी पार्टी का अस्तित्व कांग्रेस में विलीन करेंगी, या यह सिर्फ बीजेपी के खिलाफ एक अस्थाई रक्षाकवच है।

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