मणिपुर में फिर भड़की हिंसा की आग: अगवा किए गए 6 नागा नागरिकों के शव मिलने से आक्रोश, सुलग उठा पूरा राज्य

24 घंटे के सर्च ऑपरेशन के बाद बरामद हुए शव; नेशनल हाईवे जाम, तीन साल से जारी जातीय संघर्ष में नया मोड़।

11 Jun 2026  |  119

 

 

इम्फाल:

पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में शांति की बहाली की कोशिशों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। पिछले कुछ समय से लापता छह नागा नागरिकों के शव बरामद होने के बाद पूरे राज्य में तनाव और विरोध प्रदर्शनों की नई लहर फैल गई है। इस हृदयविदारक घटना के बाद से राज्य का माहौल बेहद संवेदनशील और विस्फोटक हो गया है।

450 जवानों के महा-सर्च ऑपरेशन में मिले शव

मणिपुर पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और असम राइफल्स के करीब 450 जवानों ने संयुक्त रूप से एक बड़ा तलाशी अभियान चलाया। स्निफर डॉग्स और फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से लगभग 24 घंटे तक चले इस गहन सर्च ऑपरेशन के बाद बुधवार दोपहर को पुलिस ने छह लापता नागा पुरुषों के शव बरामद किए। शव मिलने की खबर फैलते ही नागा समुदाय में भारी आक्रोश फैल गया।

13 मई से शुरू हुआ था बंधक बनाने का खूनी खेल

इस ताजा विवाद की शुरुआत 13 मई 2026 को हुई थी, जब कांगपोकपी और सेनापति जिलों में कुकी और नागा समुदायों के सशस्त्र गुटों के बीच झड़प हुई और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के करीब 48 से अधिक लोगों को बंधक बना लिया।

विवाद की पृष्ठभूमि: इस तनाव के पीछे कांगपोकपी में तीन चर्च नेताओं की घात लगाकर की गई हत्या थी। ये नेता नागालैंड में कुकी और नागा समुदायों के बीच शांति वार्ता में शामिल होकर लौट रहे थे, तभी उन पर हमला किया गया था।

शांति की उम्मीदों पर फिरा पानी: 14 कुकी हुए थे रिहा

हाल ही में शांति की एक उम्मीद जगी थी जब मंगलवार (9 जून) को नागा संगठनों ने मानवीय आधार पर अपने कब्जे में मौजूद 14 कुकी बंधकों को सुरक्षित रिहा कर दिया था। यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) के अध्यक्ष एन. लोहरो ने तब उम्मीद जताई थी कि इसके बदले में दूसरे पक्ष द्वारा बंधक बनाए गए छह नागा पुरुषों को भी जल्द ही सुरक्षित छोड़ दिया जाएगा। लेकिन अगले ही दिन उनकी लाशें मिलने से शांति की सारी उम्मीदें टूट गईं।

सड़कों पर उतरा जनआक्रोश, ठप पड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग

शव मिलने के विरोध में 'कोउब्रो रेंज लियांगमेई महिला संघ' के नेतृत्व में सैकड़ों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। आक्रोशित महिलाओं ने नेशनल हाईवे-2 पर नामडिलोंग गांव गेट के पास धरना देकर सड़क पूरी तरह जाम कर दी। प्रदर्शनकारियों ने राज्य और केंद्र सरकार दोनों पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने बंधकों को बचाने के लिए समय रहते पर्याप्त कदम नहीं उठाए। दोनों समूहों द्वारा की गई आर्थिक नाकेबंदी के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और यातायात पूरी तरह बाधित है।

तीन साल से हिंसा के साये में मणिपुर

गौरतलब है कि मणिपुर 3 मई 2023 से शुरू हुई जातीय हिंसा की आग में पिछले तीन साल से सुलग रहा है। इस संघर्ष में अब तक:

200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

60,000 से अधिक लोग बेघर होकर विस्थापित शिविरों में रहने को मजबूर हैं।

हजारों घर, व्यापारिक प्रतिष्ठान, गाँव और पूजा स्थल पूरी तरह जलाए और लूटे जा चुके हैं।

हालात की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने साल 2025 में राज्य में राष्ट्रपति शासन भी लगाया था, जिसे इसी साल फरवरी 2026 में हटाया गया था। लेकिन इस ताजा घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि मणिपुर में जमीन पर हालात अब भी बेहद चिंताजनक बने हुए हैं।

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