कृषि क्षेत्र में हरियाणा की ऐतिहासिक छलांग: एक पौधे से बनाए 60 आलू, अब बिना मिट्टी-पानी, हवा में पैदा होंगे रिकॉर्ड तोड़ आलू

एरोपोनिक तकनीक का कमाल, एक पौधे से मिलेंगे 60 आलू बीज; दूसरे राज्यों की निर्भरता खत्म करेगा हरियाणा!

11 Jun 2026  |  123

 

 

करनाल/शामगढ़:

पारंपरिक खेती की सीमाओं को लांघते हुए हरियाणा के शामगढ़ स्थित आलू प्रौद्योगिकी केंद्र (PTC) ने कृषि जगत में एक नया इतिहास रच दिया है। केंद्र ने 'एरोपोनिक तकनीक' (Aeroponic Technology) का सफल प्रयोग करते हुए एक ही पौधे से रिकॉर्ड 60 मिनी ट्यूबर (बीज के आलू) उगाने में बड़ी सफलता हासिल की है। यह तकनीक न केवल किसानों की आमदनी को कई गुना बढ़ाएगी, बल्कि हरियाणा को देश में उच्च गुणवत्ता वाले आलू बीज का सबसे बड़ा 'हब' बना देगी।

सात गुना बढ़ा उत्पादन: परंपरागत खेती को पीछे छोड़ा

अब तक नेट हाउस या पारंपरिक रूप से मिट्टी और कोकोपिट के जरिए एक पौधे से महज 8 मिनी ट्यूबर ही मिल पाते थे। लेकिन शामगढ़ केंद्र के वैज्ञानिकों ने एरोपोनिक तकनीक से इसे सात गुना बढ़ाकर प्रति पौधा 60 आलू बीज तक पहुंचा दिया है।

क्या है एरोपोनिक तकनीक?

इस आधुनिक तकनीक में पौधों को मिट्टी या पानी में उगाने के बजाय हवा में लटकाया जाता है। पौधों की लटकती हुई जड़ों पर कंप्यूटर नियंत्रित मशीनों द्वारा आवश्यक पोषक तत्वों की बौछार (mist) की जाती है। मिट्टी के संपर्क में न रहने के कारण यह बीज पूरी तरह से फंगस, बैक्टीरिया और वायरस से मुक्त (100% रोगमुक्त) रहता है।

'कुफरी उदय' किस्म ने रचा इतिहास

इस पूरे शोध में आलू की नई किस्म 'कुफरी उदय' पर विशेष फोकस किया गया। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस किस्म में ट्यूबर (आलू) बनने की रफ्तार सबसे तेज पाई गई है। वर्तमान में हरियाणा में करीब 34 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की खेती होती है, जिसमें मुख्य रूप से कुफरी उदय, पुखराज, कुफरी मोहन, चिपसोना, कुफरी सूर्या, आनंद और पुष्कर जैसी सात प्रमुख किस्में शामिल हैं।

UP, MP और बंगाल तक फैलेगा हरियाणा का नेटवर्क

वर्तमान में शामगढ़ केंद्र लगभग 4,500 मीट्रिक टन उच्च गुणवत्ता वाला आलू बीज दूसरे राज्यों को भेज रहा है। लेकिन इस नई तकनीक की सफलता के बाद केंद्र की बीज उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

हरियाणा अब देश की सबसे बड़ी आलू उत्पादक बेल्ट को कवर करने की योजना बना रहा है। राज्य अब अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले आलू बीज का प्रमुख आपूर्तिकर्ता (सप्लायर) बनने के लिए पूरी तरह तैयार है।

आंकड़ों की नजर में आलू क्रांति

मुख्य बिंदुविवरण
पारंपरिक विधि से उत्पादन8 मिनी ट्यूबर (प्रति पौधा)
एरोपोनिक विधि से उत्पादन60 मिनी ट्यूबर (प्रति पौधा)
उत्पादन में वृद्धिलगभग 7 गुना अधिक
हरियाणा में आलू का रकबा34,000 हेक्टेयर
प्रमुख लाभार्थी राज्यउत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल

 

बागवानी की तरफ बढ़ता किसान

यह शोध ऐसे समय में आया है जब हरियाणा का किसान धान और गेहूं के पारंपरिक चक्र को छोड़कर सब्जी और बागवानी की ओर तेजी से रुख कर रहा है। पिछले कुछ सालों में आलू की खेती के प्रति किसानों का रुझान काफी बढ़ा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह एरोपोनिक क्रांति आने वाले समय में देश के कृषि परिदृश्य के लिए एक बड़ा 'गेम चेंजर' साबित होगी।

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