कैलिफोर्निया (यूएसए):
कैलिफोर्निया के न्यूपोर्ट बीच स्थित एक पॉश तटीय इलाके 'कोरोना डेल मार' में संघीय एजेंटों (Federal Agents) ने तड़के छापेमारी कर भारतीय मूल के मशहूर फाइनेंसर महेंद्र मखीजानी (44) को गिरफ्तार कर लिया है। मखीजानी पर 100 मिलियन डॉलर (लगभग ₹830 करोड़ से अधिक) के भारी-भरकम बैंक धोखाधड़ी रैकेट को चलाने का आरोप है। गिरफ्तारी के वक्त हथियारबंद एजेंटों ने मखीजानी को पजामे में ही हथकड़ी लगाई और जेल ले गए। दोषी पाए जाने पर आरोपी को 30 साल तक की कैद हो सकती है।
सफेदपोश अपराधी की दोहरी जिंदगी: अय्याशी, ड्रग्स और ब्लैकमेल
न्यूयॉर्क पोस्ट के अनुसार, मखीजानी केवल वित्तीय हेराफेरी तक सीमित नहीं था, बल्कि वह खौफ और अय्याशी की दोहरी जिंदगी जी रहा था। अदालती दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि वह भारी मात्रा में ड्रग्स और सेक्स वर्कर्स के साथ गुप्त और आलीशान प्राइवेट पार्टियां आयोजित करता था।
ब्लैकमेलिंग का घिनौना खेल:
इन बदनाम पार्टियों में कुछ बैंक कर्मचारियों और सहयोगियों को भी शामिल किया जाता था। बाद में मखीजानी इन आयोजनों के गुप्त वीडियो और जानकारियों का इस्तेमाल कर उन अधिकारियों को ब्लैकमेल करता था, ताकि बैंक पर अपना पूरा नियंत्रण रख सके और घोटाले को छुपाया जा सके।
कैसे दिया $100 मिलियन के महाघोटाले को अंजाम?
मखीजानी ने रियल एस्टेट दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की। उसने बैंक में गिरवी रखी संपत्तियों की कीमतों को फर्जी तरीके से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया और एक स्थानीय बैंक को $100 मिलियन का चूना लगा दिया।
फर्जी कंपनियों का नेटवर्क: घोटाले के लिए न्यूपोर्ट बीच स्थित 'कैंटर ग्रुप वी एलएलसी' और कई शेल (फर्जी) कंपनियों के नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया।
सॉफ्टवेयर से जालसाजी: मखीजानी और उसके एक कर्मचारी ने एडोब (Adobe) सॉफ्टवेयर का उपयोग करके टाइटल इंश्योरेंस रिकॉर्ड्स और मेटाडेटा में बदलाव किए। सितंबर 2024 से अप्रैल 2025 के बीच बैंक को लगातार फर्जी दस्तावेज सौंपे गए।
गुमराह करने वाली स्प्रेडशीट्स: बैंक अधिकारियों को लगातार झांसे में रखने के लिए फर्जी कॉल्स और जाली स्प्रेडशीट्स का सहारा लिया गया। लूटी गई यह बड़ी रकम अभी तक बरामद नहीं हो सकी है।
क्राइम प्रोफाइल: दहशत का दूसरा नाम था मखीजानी
| मुख्य पहलू | विवरण |
|---|---|
| आरोपी | महेंद्र मखीजानी (उम्र 44 वर्ष) |
| घोटाले की राशि | 100 मिलियन डॉलर ($100 Million) |
| संभावित सजा | 30 साल तक की जेल |
| लग्जरी गाड़ियां | बेंटले, पोर्शे और मर्सिडीज जी-वैगन |
| मुख्य तौर-तरीके | दस्तावेज जालसाजी, ड्रग्स पार्टियां, ब्लैकमेलिंग और हिंसा |
विरोधियों पर हमले और बर्बर धमकियां
मखीजानी ने अपना साम्राज्य डराने-धमकाने और हिंसा के बल पर खड़ा किया था। वह अपने गुर्गों के जरिए प्रतिस्पर्धियों के व्यवसायों में तोड़फोड़ करवाता था। एक मामले में तो उसने प्रतिद्वंदी के घर पर बेदखली के फर्जी नोटिस चिपका दिए और होर्डिंग्स लगाकर डकैती के झूठे आरोप मढ़े। अभियोजकों द्वारा पेश वीडियो में वह खुद डिजाइनर कपड़े पहने सुरक्षा गार्डों पर हमला करने और खिड़कियां तोड़ने के निर्देश देता दिख रहा है।
यही नहीं, वह अपने मातहत काम करने वाले कर्मचारियों को जान से मारने, उनके परिवारों को सड़क पर लाने और बच्चों को सरकारी खैरात (welfare) पर जीने के लिए मजबूर करने जैसी खौफनाक धमकियां देता था।
निजी जेट, हवेलियां और भारत भागने की फिराक
मखीजानी की जीवनशैली बेहद आलीशान थी। वह प्राइवेट जेट से चलता था, महंगे डिजाइनर ब्रांड्स पहनता था और उसके पास बेंटले, पोर्शे व मर्सिडीज जी-वैगन जैसी गाड़ियां थीं। उसने न्यूपोर्ट बीच पर अगल-बगल दो आलीशान हवेलियां खरीदी थीं, जिनमें से एक सिर्फ उसके ससुराल वालों के लिए थी।
अधिकारियों के मुताबिक, मखीजानी के पास बेहिसाब बेनामी संपत्ति है जिसे उसने दूसरों के नाम पर छुपा रखा है। यह मामला 'होटल लागुना' से जुड़े एक पुराने हिंसक विवाद से भी जुड़ा है। इसी साल मई में एक मध्यस्थता कोर्ट ने व्यवसायी मोहम्मद होनारकर के पक्ष में फैसला सुनाते हुए मखीजानी को समझौते के उल्लंघन का दोषी पाया था और $1.34 बिलियन का भारी जुर्माना लगाया था। कानूनी शिकंजा कसता देख आरोपी भारत भागने की फिराक में था, लेकिन समय रहते अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने उसे दबोच लिया।