केरल में जनसांख्यिकीय संकट: हिंदू और ईसाई आबादी में 'नेगेटिव ग्रोथ', मरने वालों की संख्या जन्म लेने वालों से ज्यादा

इकोनॉमिक्स और स्टैटिस्टिक्स डिपार्टमेंट का चौंकाने वाला खुलासा; विशेषज्ञ बोले- 2041 तक घटने लगेगी केरल की कुल जनसंख्या! हर साल घट रही हिंदुओं की आबादी, ठीक नहीं ईसाइयों का भी हाल

11 Jun 2026  |  108

 

 

तिरुवनंतपुरम:

केरल में जनसांख्यिकीय (Demographic) संतुलन को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली और गंभीर रिपोर्ट सामने आई है। राज्य के इकोनॉमिक्स और स्टैटिस्टिक्स डिपार्टमेंट द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, केरल में हिंदू और ईसाई समुदायों की जनसंख्या में प्राकृतिक रूप से लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। इन दोनों धर्मों में अब जन्म लेने वाले बच्चों की तुलना में मरने वाले लोगों की संख्या अधिक हो गई है, जिसे विज्ञान की भाषा में ‘नेगेटिव नेचुरल ग्रोथ रेट’ (NGR) कहा जाता है।

लगातार गिर रहा है ग्राफ: आंकड़ों की जुबानी

रिपोर्ट के अनुसार, केरल में सिर्फ मुस्लिम समुदाय ही ऐसा है जहां जन्म दर, मृत्यु दर से अधिक है, जिसके कारण राज्य की कुल आबादी की वृद्धि दर (Natural Growth Rate) साल 2023 में मामूली रूप से पॉजिटिव (0.249%) बनी हुई है। हालांकि, हिंदू और ईसाई समुदायों में स्थिति चिंताजनक है:

हिंदू समुदाय: हिंदुओं की नेचुरल ग्रोथ रेट साल 2022 में पहली बार नेगेटिव (-0.080%) हुई थी, जो साल 2023 में और गिरकर -0.115% पर पहुंच गई है। यह लगातार दूसरा साल है जब हिंदुओं की आबादी प्राकृतिक रूप से घटी है।

ईसाई समुदाय: ईसाई समुदाय पिछले तीन सालों से लगातार नेगेटिव दायरे में बना हुआ है। साल 2021 में यह -0.095% था, जो 2023 में -0.084% दर्ज किया गया।

केरल की डेमोग्राफी का तुलनात्मक विश्लेषण (2023)

समुदायनेचुरल ग्रोथ रेट (NGR)स्थिति (Status)
हिंदू-0.115%लगातार दूसरे साल भारी गिरावट
ईसाई-0.084%लगातार तीसरे साल गिरावट के दायरे में
मुस्लिमपॉजिटिव (सकारात्मक)जन्म लेने वालों की संख्या मौतों से अधिक
कुल केरल0.249%मुस्लिम समुदाय के कारण मामूली पॉजिटिव

 

विशेषज्ञों की चेतावनी: 2041 के आसपास घटने लगेगी कुल आबादी

जनसांख्यिकीय विशेषज्ञों का कहना है कि केरल में सभी समुदायों के भीतर जन्म दर में लगातार गिरावट देखी जा रही है। यदि यही ट्रेंड जारी रहा, तो आने वाले 15 से 20 वर्षों में राज्य की आबादी का ढांचा पूरी तरह बदल जाएगा। अनुमान है कि साल 2041 के आसपास केरल की कुल जनसंख्या बढ़ने के बजाय स्थाई रूप से घटने (श्रिंक होने) लगेगी।

आखिर क्यों घट रही है आबादी? ये हैं 4 मुख्य कारण

1. उच्च साक्षरता और करियर फोकस: केरल की साक्षरता दर देश में सबसे अधिक है। यहां पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं का भी उच्च शिक्षा और करियर पर बहुत ज्यादा फोकस है।

2. देर से शादी और छोटा परिवार: आत्मनिर्भरता और करियर के चलते युवा अब काफी देर से शादियां कर रहे हैं, जिससे अधिकांश लोग 'सिंगल चाइल्ड' या बहुत छोटा परिवार पसंद कर रहे हैं।

3. कामकाजी महिलाएं: कार्यबल (Workforce) में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के कारण भी जन्म दर में प्राकृतिक कमी आई है।

4. युवाओं का बड़े पैमाने पर पलायन (Migration): केरल के बेहतर शिक्षित युवा नौकरी और उच्च जीवन स्तर के लिए बड़े पैमाने पर राज्य और देश (विशेषकर खाड़ी देशों और पश्चिम) को छोड़कर बाहर जा रहे हैं, जिससे राज्य में बुजुर्गों की आबादी बढ़ रही है।

यह रिपोर्ट नीति निर्माताओं और समाजशास्त्रियों के लिए एक बड़ा अलार्म है, क्योंकि आबादी का यह असंतुलन भविष्य में केरल की अर्थव्यवस्था, कार्यबल और सामाजिक ताने-बाने को गहरे रूप से प्रभावित कर सकता है।

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