कोलकाता।
ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक तरफ जहाँ पार्टी के विधायक और सांसद लगातार साथ छोड़ रहे हैं, वहीं अब पार्टी के भीतर एक नया और बड़ा कानूनी-राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, चार बार के लोकसभा सांसद और जाने-माने वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का केस लड़ने से साफ इनकार कर दिया है। इसे ममता बनर्जी के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है।
'अहंकार बर्दाश्त नहीं'... इसलिए कोर्ट नहीं पहुंचे कल्याण बनर्जी
विधायकों के हस्ताक्षर मेल न खाने (फर्जीवाड़ा) के मामले में सीआईडी (CID) के समन को चुनौती देने वाली अभिषेक बनर्जी की याचिका पर गुरुवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी अदालत में पेश नहीं हुए और उनकी जगह वकील अयान भट्टाचार्य ने जस्टिस कौशिक चंदा की सिंगल-जज वेकेशन बेंच के सामने अभिषेक का पक्ष रखा।
अदालत से दूरी बनाने पर कल्याण बनर्जी ने मीडिया के सामने खुलकर अपना गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने कहा:
"मैंने अभिषेक बनर्जी से जुड़े किसी भी कानूनी मामले से दूर रहने का फैसला किया है। उनका लगातार बढ़ता अहंकार अकल्पनीय है। हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की भारी हार के मुख्य सूत्रधार होने के बावजूद अभिषेक बनर्जी का अहंकारी स्वभाव नहीं बदला है। उनके चलते पार्टी बर्बाद हो गई, लेकिन उनका घमंड नहीं गया।"
जूनियर को आगे करने पर भड़के वरिष्ठ सांसद
कल्याण बनर्जी ने पूरे विवाद की वजह बताते हुए कहा कि उन्होंने खुद जस्टिस चंदा की बेंच के सामने इस मामले को उठाकर तत्काल सुनवाई की अपील की थी। लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाई।
कल्याण बनर्जी के मुताबिक:
"बुधवार रात अभिषेक ने मेरे बेटे को फोन किया और कहा कि गुरुवार को सुनवाई में उनका पक्ष कोई और वकील रखेगा, जो कानूनी पेशे में मुझसे काफी जूनियर है।"
इस घटना के बाद न केवल कल्याण बनर्जी, बल्कि उनके बेटे शिरशान्य बनर्जी (जो खुद एक प्रैक्टिसिंग वकील हैं) और उनके जूनियर वकीलों ने भी अभिषेक बनर्जी के सभी मामलों से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया है।
ममता बनर्जी को सीधा अल्टीमेटम
कल्याण बनर्जी ने इस पूरे मामले को सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पाले में डाल दिया है। पिछले 45 वर्षों से वकालत के पेशे में सक्रिय सांसद ने ममता बनर्जी को अल्टीमेटम देते हुए कहा:
"मैं अभिषेक बनर्जी का अहंकार बर्दाश्त नहीं करूंगा। मैं ममता बनर्जी से कहूंगा कि वह अब अभिषेक और हम जैसे वफादार लोगों में से किसी एक को चुन लें। तृणमूल कांग्रेस की मौजूदा दयनीय स्थिति के लिए अभिषेक ही पूरी तरह जिम्मेदार हैं।"
कोर्ट अपडेट: अभिषेक बनर्जी को 3 हफ्ते की अंतरिम राहत
इस अंदरूनी कलह के बीच, कानूनी मोर्चे पर अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से थोड़ी राहत जरूर मिली है। फर्जी हस्ताक्षर मामले में जस्टिस कौशिक चंदा की बेंच ने अभिषेक बनर्जी को गिरफ्तारी से तीन हफ्ते की अंतरिम राहत दे दी है।
अदालत के मुख्य आदेश इस प्रकार हैं:
जांच में सहयोग का निर्देश: अदालत ने अभिषेक बनर्जी को जांच में पूरा सहयोग करने को कहा है। दिल्ली से लौटने के बाद उन्हें पूछताछ के लिए पुलिस के सिटी कार्यालय में पेश होना होगा।
दंडात्मक कार्रवाई पर रोक: अगले दो हफ्तों तक जांच एजेंसी उनके खिलाफ कोई भी सख्त या दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर सकती।
पूछताछ के लिए 24 घंटे का नोटिस: यदि आगे पूछताछ की आवश्यकता होती है, तो एजेंसी को 24 घंटे पहले नोटिस देना होगा।
तलाशी की आजादी: अदालत ने साफ किया कि दस्तावेजों को सुरक्षित करने के लिए जांच एजेंसी कानून के मुताबिक तलाशी और जब्ती करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।
इस मामले की अगली सुनवाई अब से दो सप्ताह बाद होगी। कानूनी राहत मिलने के बावजूद, कल्याण बनर्जी के इस बगावती रुख ने टीएमसी के भीतर की गुटबाजी और कलह को सरेआम उजागर कर दिया है।