खतरे में धरती: साल 2025 रिकॉर्ड पर तीसरा सबसे गर्म साल, वार्मिंग में 'इंसानी गुनाह' अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर

युद्ध और वैश्विक संघर्षों के बीच हाशिए पर गया पर्यावरण संकट; IGCC की नई स्टडी में खुलासा—2025 की कुल गर्मी में अकेले 1.37°C का जिम्मेदार है मानव विकास और ग्रीनहाउस गैसों का रिकॉर्ड उत्सर्जन।

11 Jun 2026  |  113

 

 

बॉन (जर्मनी)।

वैश्विक युद्धों और भू-राजनीतिक तनावों के बीच उलझी दुनिया के सामने जलवायु परिवर्तन (Climate Change) अब तक का सबसे मूक लेकिन विनाशकारी संकट बनकर उभर रहा है। 'इंडिकेटर्स ऑफ ग्लोबल क्लाइमेट चेंज' (IGCC) के ताजा वार्षिक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि साल 2025 आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड पर तीसरा सबसे गर्म साल दर्ज किया गया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस गर्मी को बढ़ाने में इंसानी गतिविधियों का योगदान अब तक के सर्वकालिक उच्च स्तर (Record High) पर पहुंच गया है।

अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के एक स्वतंत्र समूह, जिसमें 'इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज' (IPCC) के विशेषज्ञ भी शामिल हैं, ने अपनी रिपोर्ट 'अर्थ सिस्टम साइंस डेटा' जर्नल में प्रकाशित की है। यह रिपोर्ट वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन (WMO) के उन पूर्व अनुमानों पर मुहर लगाती है, जिसमें 2025 को 2024 और 2023 के बाद तीसरा सबसे गर्म साल बताया गया था।

तापमान के आंकड़े: क्या कहती है IGCC की रिपोर्ट?

अध्ययन के मुताबिक, साल 2025 में औसत वैश्विक तापमान 1850-1900 के औद्योगिक बेसलाइन औसत से करीब 1.39°C अधिक दर्ज किया गया।

इंसानी बनाम प्राकृतिक योगदान: इस कुल 1.39°C की बढ़ोतरी में से अकेले 1.37°C हिस्सेदारी इंसानी गतिविधियों (विशेषकर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन) की थी, जबकि शेष मामूली हिस्सा प्राकृतिक बदलावों का नतीजा रहा।

पिछले तीन सालों के डराने वाले आंकड़ों पर एक नजर:

साल 2024 (सबसे गर्म साल): यह साल बेसलाइन से 1.55°C अधिक गर्म था, जिसमें इंसानी योगदान 1.36°C था।

साल 2023 (दूसरा सबसे गर्म साल): तापमान में 1.45°C की बढ़ोतरी दर्ज हुई थी, जिसमें मानव जनित हिस्सा 1.31°C था।

साल 2025 (तीसरा सबसे गर्म साल): कुल बढ़ोतरी 1.39°C रही, लेकिन इंसानी योगदान बढ़कर रिकॉर्ड 1.37°C पर पहुंच गया।

'ला नीना' ने रोकी महाविनाश की रफ्तार

वैज्ञानिकों का कहना है कि जब इंसानों की वजह से होने वाली वार्मिंग 2025 में अपने चरम पर थी, तब मौसम के एक प्राकृतिक बदलाव ने धरती को थोड़ी राहत दी। पिछला साल 'ला नीना' (La Nina) का साल था, जिससे दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट के पास प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ठंडा रहा। इस कूलिंग इफेक्ट की वजह से ही 2025 का तापमान 2023 और 2024 के मुकाबले थोड़ा कम रहा।

तेजी से खत्म हो रहा है समय और 'कार्बन बजट'

आईजीसीसी (IGCC) की स्टडी चेतावनी देती है कि ग्रीनहाउस गैसों के बेकाबू उत्सर्जन के कारण इंसानों द्वारा पैदा की जा रही गर्मी हर दशक में 0.27°C की रफ्तार से बढ़ रही है।

रिकॉर्ड उत्सर्जन: साल 2025 में वैश्विक ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन 56.8 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर पहुंच गया, जो मानव इतिहास का सबसे बड़ा स्तर है।

1.5°C की लक्ष्मण रेखा: यदि दुनिया को तापमान बढ़ोतरी को 1.5°C के भीतर सीमित रखना है, तो 2026 की शुरुआत से पूरी दुनिया के पास केवल 130 बिलियन टन CO2 का अतिरिक्त 'कार्बन बजट' बचा है।

2026 में 'हैवी अल नीनो' का बड़ा खतरा

आने वाले दिन और भी भयावह हो सकते हैं। WMO की हालिया रिपोर्ट बताती है कि 91% संभावना इस बात की है कि 2026 से 2030 के बीच कम से कम एक साल 1.5°C की सुरक्षित सीमा को पार कर जाएगा। इसी बीच, प्रशांत महासागर में एक 'हैवी अल नीनो' (Heavy El Nino) बनने का अनुमान है। अल नीनो का असर ला नीना के बिल्कुल विपरीत होता है और यह धरती के तापमान को तेजी से बढ़ाता है। यह खतरा इस साल के अंत से लेकर अगले साल की शुरुआत तक बना रह सकता है।

बॉन क्लाइमेट मीटिंग: फॉसिल फ्यूल से मुक्ति का नया रोडमैप

यह महत्वपूर्ण स्टडी ऐसे समय में जारी की गई है, जब दुनिया भर के प्रतिनिधि सालाना मिड-ईयर क्लाइमेट वार्ता के लिए जर्मनी के बॉन (Bonn) में जुटे हैं। साल 2015 के पेरिस समझौते से अमेरिका के अलग होने के बाद वैश्विक पर्यावरण मुहिम को बड़ा झटका लगा था, जिससे निपटने के लिए अब रणनीतियां बनाई जा रही हैं।

इस बैठक में एक बड़ा वैश्विक प्रस्ताव रखा गया है:

हरित ऊर्जा का संकल्प: प्रस्ताव के अनुसार, साल 2035 तक दुनिया की कुल ऊर्जा खपत में बिजली का हिस्सा बढ़ाकर कम से कम 35% करने का लक्ष्य है, जो वर्तमान में केवल 20% है। इस कदम को फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ईंधन) से क्लीन एनर्जी की तरफ बढ़ने की दिशा में एक क्रांतिकारी और ठोस शुरुआत माना जा रहा है।

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