'ओपन जीप में बदलने पड़ते थे कपड़े, वॉशरूम के लिए तरसते थे...' – 'बालिका वधू' फेम स्मिता बंसल का छलका दर्द

90 के दशक के संघर्षों को याद कर भावुक हुईं एक्ट्रेस; बताया क्यों शूटिंग के दौरान पानी पीने से भी कतराती थीं अभिनेत्रियां।

11 Jun 2026  |  112

 

 

मुंबई।

कलर्स टीवी के ब्लॉकबस्टर सीरियल 'बालिका वधू' में 'आनंदी की सास' (सुमित्रा) का यादगार किरदार निभाने वाली मशहूर एक्ट्रेस स्मिता बंसल इन दिनों अपने एक बेबाक इंटरव्यू को लेकर सुर्खियों में हैं। स्मिता ने मनोरंजन जगत के चकाचौंध के पीछे छिपे उस दौर के कड़वे सच और संघर्षों को उजागर किया है, जिसे सुनकर आज की पीढ़ी के कलाकार और फैंस हैरान हैं। उन्होंने बताया कि आज जैसी लग्जरी सुविधाएं पहले के दौर में महज़ एक सपना थीं।

जब चारों तरफ पर्दे टांगकर ओपन जीप में बदलने पड़े कपड़े

'बॉलीवुड बबल' को दिए एक इंटरव्यू में स्मिता बंसल ने अपने शुरुआती दिनों के एक खौफनाक और असहज कर देने वाले अनुभव को साझा किया। उन्होंने बताया:

"शुरुआती दौर में मैं एक हॉरर फिल्म की शूटिंग कर रही थी। उस समय इंडस्ट्री में 'वैनिटी वैन' जैसी कोई चीज नहीं होती थी। हमें एक ओपन जीप के चारों तरफ सिर्फ पर्दे लटका कर कपड़े बदलने पड़ते थे। सेट पर न तो कोई पर्सनल मेकअप रूम होता था और न ही बैठने के लिए ढंग की कुर्सियां मिलती थीं।"

वॉशरूम के लिए दूसरों के आगे हाथ फैलाना, पानी पीने पर भी पाबंदी!

स्मिता ने महिलाओं के लिए सबसे बुनियादी और बड़ी समस्या—वॉशरूम (शौचालय) की किल्लत पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि आउटडोर शूटिंग के दौरान अभिनेत्रियों को किन हालातों से गुजरना पड़ता था:

दूसरों के घरों के चक्कर: जब किसी मोहल्ले या तंग गलियों में शूटिंग होती थी, तो वॉशरूम के लिए स्थानीय लोगों के घरों का दरवाजा खटखटाना पड़ता था।

अपमान और बेरुखी का सामना: स्मिता के मुताबिक, "कुछ लोग तो कलाकारों को देखकर खुश हो जाते थे और स्वागत करते थे, लेकिन कई लोग साफ मना कर देते थे और घर के अंदर घुसने तक नहीं देते थे।"

कम पानी पीना मजबूरी: हालांकि प्रोडक्शन की तरफ से दिन में एक बार वॉशरूम ले जाने के लिए बस आती थी, लेकिन शूटिंग के बीच में जरूरत पड़ने पर कोई विकल्प नहीं होता था। यही वजह थी कि सेट पर अभिनेत्रियां पानी पीने से भी बचती थीं ताकि वॉशरूम जाने की नौबत ही न आए।

"आज की पीढ़ी खुशकिस्मत है, पर उस संघर्ष ने मुझे मजबूत बनाया"

आज के दौर की तुलना करते हुए स्मिता ने कहा कि अब वक्त पूरी तरह बदल चुका है। आज हर छोटे-बड़े कलाकार के लिए वैनिटी वैन और बेहतरीन सुविधाएं पहले से सेट मिलती हैं, इसलिए नए कलाकारों को वैसा कड़ा संघर्ष नहीं करना पड़ता।

स्मिता ने मुस्कुराते हुए कहा, "अब मैं भी वैनिटी वैन की मांग करती हूं, लेकिन अगर कभी आउटडोर शूट में यह न मिले, तो मुझे फर्क नहीं पड़ता। मैं आज भी मैनेज कर सकती हूं, क्योंकि उस दौर के संघर्ष और कड़वे अनुभवों ने ही मुझे मानसिक रूप से मजबूत बनाया है और बहुत कुछ सिखाया है।"

1998 से शुरू हुआ सफर, 'सुमित्रा' बन जीता दिल

बता दें कि स्मिता बंसल ने साल 1998 में एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा था। सालों की मेहनत के बाद उन्हें असली पहचान और घर-घर में लोकप्रियता सुपरहिट शो 'बालिका वधू' से मिली। इसके अलावा उन्होंने 'अमानत', 'अलादीन - नाम तो सुना होगा' और 'भाग्य लक्ष्मी' जैसे कई बड़े और चर्चित टीवी सीरियल्स में अपनी दमदार अदाकारी का लोहा मनवाया है।

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