बंगाल में तृणमूल का 'महा-संकट': 4 दिनों में 4 राज्यसभा सांसदों का इस्तीफा, 59 बागी विधायकों के साथ ऋतब्रत बने नेता प्रतिपक्ष

चुनावी शिकस्त के बाद बगावत की आग; दिल्ली में केंद्रीय मंत्री और शुभेंदु संग सांसदों की सीक्रेट मीटिंग से सायोनी घोष पर सस्पेंस गहराया, हाई कोर्ट से भी ममता को झटका।

11 Jun 2026  |  51

 

 

कोलकाता/नई दिल्ली।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर शुरू हुआ सियासी भूचाल अब बेकाबू हो चुका है। पार्टी के भीतर की बगावत विधानसभा से लेकर देश के उच्च सदन (संसद) तक पहुंच गई है। पिछले चार दिनों के भीतर तृणमूल कांग्रेस के चार दिग्गज राज्यसभा सांसदों ने अपने पदों से इस्तीफा दे कर पार्टी को बैकफुट पर धकेल दिया है। वहीं दूसरी तरफ, विधानसभा में भी ममता बनर्जी के हाथ से 'नेता प्रतिपक्ष' (LoP) का पद फिसल गया है।

संसद में टूटा नंबर गेम: 13 से घटकर 9 पर पहुंची टीएमसी

गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस को दिल्ली में तब दो बड़े झटके लगे, जब राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक और मशहूर अभिनेत्री-सांसद कोयल मल्लिक ने संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।

इस्तीफों की झड़ी: इन दोनों से पहले तृणमूल के बेहद वरिष्ठ सांसद सुखेंदु शेखर राय और सुष्मिता देव भी उच्च सदन से इस्तीफा दे चुके हैं। यानी महज 96 घंटों में 4 सांसदों ने साथ छोड़ दिया।

बदला समीकरण: लगातार होते इन इस्तीफों के कारण राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों की संख्या 13 से घटकर महज 9 रह गई है। सूत्रों की मानें तो लोकसभा और राज्यसभा के कई और असंतुष्ट सांसद भी जल्द ही बागी खेमे में जा सकते हैं।

शत्रुघ्न सिन्हा ने जताई निष्ठा: इस सियासी उथल-पुथल के बीच आसनसोल से अभिनेता और सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने ममता बनर्जी के प्रति अपनी वफादारी दोहराई है। उन्होंने कहा, "कठिन समय में मैं अपनी नेता का साथ नहीं छोड़ूंगा। इस मोड़ पर नैतिक रूप से ममता जी के साथ खड़ा रहना ही सही है।"

दिल्ली में 'सीक्रेट मीटिंग' और सायोनी घोष पर बढ़ता सस्पेंस

पार्टी में मचे इस घमासान के बीच युवा तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और सांसद सायोनी घोष को लेकर सस्पेंस चरम पर है। सूत्रों के मुताबिक, बुधवार रात दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर एक बेहद गोपनीय और महत्वपूर्ण बैठक हुई।

बैठक में कौन था शामिल?: इस बैठक में सायोनी घोष के साथ तृणमूल सांसद माला राय, यूसुफ पठान, प्रतिमा मंडल और मिताली बाग मौजूद थीं।

शुभेंदु अधिकारी की एंट्री: इस बैठक में बाद में पश्चिम बंगाल के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी भी पहुंचे, जिन्होंने बागी सांसदों के साथ भविष्य की रणनीति पर लंबी चर्चा की।

एयरपोर्ट पर चुप्पी: इस बैठक के बाद गुरुवार को जब सायोनी घोष कोलकाता एयरपोर्ट पहुंचीं, तो उन्होंने चेहरे पर मास्क और सिर पर टोपी लगा रखी थी। मीडिया ने जब उनसे पाला बदलने को लेकर सवाल किए, तो उन्होंने पूरी तरह चुप्पी साधे रखी और सीधे गाड़ी में बैठकर रवाना हो गईं।

कलकत्ता हाई कोर्ट से भी ममता को राहत नहीं; ऋतब्रत बनर्जी बने रहेंगे LoP

एक तरफ जहां दिल्ली में संसद हिल रही है, वहीं कोलकाता में कलकत्ता हाई कोर्ट से भी ममता बनर्जी सरकार को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने विधानसभा में ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष (LoP) नियुक्त करने के स्पीकर के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है।

क्या है विधानसभा का पूरा विवाद? विधानसभा चुनाव के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने टीएमसी के 59 बागी विधायकों के साथ मिलकर एक अलग गुट बना लिया था। विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) ने इस गुट को मान्यता देते हुए ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दे दिया।

इसके खिलाफ ममता बनर्जी की पार्टी कोर्ट पहुंची। टीएमसी के वरिष्ठ वकील कल्याण बंदोपाध्याय ने दलील दी कि पार्टी ने 6 मई की बैठक में सोभनदेब चट्टोपाध्याय को इस पद के लिए चुना था, इसलिए स्पीकर का यह फैसला संविधान की 10वीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के खिलाफ है।

हाई कोर्ट का बड़ा सवाल:

हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक तो नहीं लगाई, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा स्पीकर से एक बड़ा सवाल पूछा है—"क्या स्पीकर किसी राजनीतिक दल की सहमति के बिना, उसकी मूल इच्छा के विपरीत किसी विधायक को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दे सकते हैं?" अदालत अब इस मामले पर अगली सुनवाई 16 जून को करेगी, तब तक ऋतब्रत बनर्जी ही पद पर बने रहेंगे।

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