बंगाल की बगावत का महाराष्ट्र कनेक्शन: TMC में टूट से कैसे घटेगी दिल्ली में एकनाथ शिंदे की 'बार्गेनिंग पावर'?

ममता को झटका तो शिंदे की बढ़ी टेंशन; लोकसभा में एनडीए का कुनबा बढ़ने से बीजेपी पर सहयोगियों का दबाव होगा कम, उद्धव को फिर 'डैमेज' करने के मिशन में जुटे शिंदे।

12 Jun 2026  |  117

 

 

मुंबई/नई दिल्ली। राजनीति का एक शाश्वत नियम है—'असर बहुत दूर तक होता है।' पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मचे ऐतिहासिक राजनीतिक भूचाल ने हजारों किलोमीटर दूर महाराष्ट्र की सियासत के समीकरणों को गर्मा दिया है। पहली नजर में यह कनेक्शन अजीब लग सकता है, लेकिन दिल्ली और मुंबई के सत्ता के गलियारों को जोड़ने वाली कड़ियों को देखें तो पूरी तस्वीर साफ हो जाती है।

बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद टीएमसी में भगदड़ मची है, जहां पहले राज्य के 80 में से 58 विधायकों ने पाला बदला और अब लोकसभा में 28 में से 19 सांसदों ने अलग गुट बनाकर एनडीए (NDA) को समर्थन देने का मन बना लिया है। संसद में होने वाले इस बड़े उलटफेर का सीधा असर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे की 'बार्गेनिंग पावर' (मोलभाव की ताकत) पर पड़ने जा रहा है।

2024 का समीकरण: 7 सांसदों के दम पर था शिंदे का 'दबदबा'

वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) अकेले 240 सीटों पर सिमट गई, तब केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार की स्थिरता के लिए चंद्रबाबू नायडू (TDP), नीतीश कुमार (JDU) और एकनाथ शिंदे (7 सांसद) जैसे क्षेत्रीय क्षत्रप बेहद महत्वपूर्ण हो गए थे।

बीजेपी के बहुमत से चूकने के कारण दिल्ली के दरबार में एकनाथ शिंदे का राजनीतिक वजन अचानक बढ़ गया था। लेकिन, महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य के भीतर पावर गेम को पूरी तरह बदल दिया:

सीटों का भारी फासला: राज्य में बीजेपी ने अकेले 132 सीटें जीतीं, जो शिवसेना की 57 सीटों के मुकाबले दोगुनी से भी ज्यादा थीं। इसी अंतर के कारण शिंदे को सीएम की कुर्सी छोड़नी पड़ी और देवेंद्र फडणवीस की मुख्यमंत्री के रूप में वापसी हुई।

अजीत पवार फैक्टर: महाराष्ट्र में बीजेपी अब केवल शिंदे की शिवसेना पर निर्भर नहीं है, क्योंकि उसे सुनेत्रा पवार की एनसीपी (NCP) के 41 विधायकों का भी समर्थन हासिल है। ऐसे में शिंदे के पास दिल्ली में दबाव बनाने के लिए केंद्र के केवल 7 सांसद ही सबसे बड़ा जरिया बचे थे।

टीएमसी के 19 बागी सांसद कैसे बिगाड़ेंगे शिंदे का खेल?

लोकसभा में जैसे ही टीएमसी के 19 बागी सांसदों के एनडीए को समर्थन देने की औपचारिक घोषणा होगी, दिल्ली में 'पावर बैलेंस' पूरी तरह बदल जाएगा।

घटेगी निर्भरता, कमजोर पड़ेगा दबाव: हालांकि बीजेपी को सरकार बचाने के लिए तुरंत नए आंकड़ों की जरूरत नहीं है, लेकिन संसद में एक और बड़ा 19 सांसदों का गुट साथ आने से मौजूदा सहयोगियों पर बीजेपी की निर्भरता काफी कम हो जाएगी। नतीजा यह होगा कि सहयोगियों की ब्लैकमेलिंग या दबाव बनाने की क्षमता कमजोर पड़ेगी।

फडणवीस को सीधा फायदा: केंद्र में सहयोगियों पर निर्भरता कम होते ही, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस राज्य स्तर पर बेहद मजबूत हो जाएंगे और शिंदे गुट की तरफ से राज्य सरकार में बीजेपी पर दबाव बनाना बेहद मुश्किल हो जाएगा।

इतिहास का यू-टर्न: यह नियति का दिलचस्प मोड़ है कि एकनाथ शिंदे का खुद का राजनीतिक उदय एक क्षेत्रीय पार्टी (शिवसेना) में बगावत के जरिए हुआ था, जिससे बीजेपी को मजबूती मिली थी। अब किसी दूसरी क्षेत्रीय पार्टी (TMC) में वैसी ही बगावत शिंदे के ही राजनीतिक प्रभाव को सीमित करने जा रही है।

शिंदे और फडणवीस के बीच अंदरूनी खींचतान

महाराष्ट्र में 'महायुति' सरकार के भीतर पावर शेयरिंग को लेकर तनाव अक्सर सतह पर आता रहा है, जो विधानसभा चुनाव के बाद और गहरा गया है:

गार्डियन मिनिस्टर पर विवाद: नासिक और रायगढ़ जिलों के 'गार्डियन मिनिस्टर' (पालक मंत्री) की नियुक्ति को लेकर दोनों खेमों में इतना टकराव बढ़ा कि फिलहाल नियुक्तियों को रोकना पड़ा है।

फंड और बोर्ड में हिस्सेदारी: कैबिनेट विस्तार, राज्य के निगमों-बोर्डों में नियुक्तियों और बजट फंड आवंटन को लेकर लगातार मतभेद बने हुए हैं।

दिल्ली का 'बायपास' रास्ता बंद: अब तक मुंबई या नागपुर में बात बिगड़ने पर शिंदे तुरंत दिल्ली जाकर गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर अपनी बात मनवा लेते थे क्योंकि उनके पास 7 सांसदों का समर्थन था। टीएमसी में टूट के बाद बीजेपी आलाकमान के लिए इन 7 सांसदों की अपरिहार्यता पहले जैसी नहीं रहेगी।

काउंटर अटैक: उद्धव ठाकरे को दोबारा 'डैमेज' करने के मिशन पर शिंदे

नया मिशन-14: बंगाल के इस घटनाक्रम के बाद एकनाथ शिंदे भी भांप चुके हैं कि अगर उन्हें एनडीए में अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखनी है, तो उन्हें अपनी ताकत दोगुनी करनी होगी। सूत्रों का दावा है कि शिंदे अब उद्धव ठाकरे गुट के 10 में से 7 सांसदों को अपने पाले में लाने की बड़ी तैयारी कर रहे हैं।

अगर शिंदे अपने सांसदों की संख्या 7 से बढ़ाकर 14 करने में कामयाब हो जाते हैं, तो वे एक बार फिर बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व के सामने मजबूती से खड़े हो सकेंगे। दरअसल, बीजेपी इस समय लोकसभा में दो-तिहाई (2/3) बहुमत जुटाने की पुरजोर कोशिश में है ताकि वह 'लोकसभा सीटें बढ़ाने के विधेयक' (परिसीमन) जैसे बड़े संवैधानिक सुधारों को आसानी से पास करा सके। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि क्या शिंदे का यह 'काउंटर-प्लान' उन्हें दिल्ली में दोबारा वही पुरानी बार्गेनिंग पावर दिला पाता है या नहीं।

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