भू-राजनीति में बड़ा धमाका: अमेरिका-ईरान गुप्त समझौते का ड्राफ्ट लीक, युद्ध खत्म करने और $24 अरब फंड रिलीज करने समेत 14 शर्तें शामिल

ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी का बड़ा दावा—परमाणु हथियार न बनाने की शर्त पर हटेंगे तेल प्रतिबंध; होर्मुज स्ट्रेट भी 30 दिनों में खुलेगा।

12 Jun 2026  |  104

 

 

 

तेहरान/वाशिंगटन।

लंबे समय से तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे अमेरिका और ईरान के रिश्तों के बीच एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। ईरान की अर्ध-सरकारी 'मेहर न्यूज एजेंसी' ने ईरानी वार्ता टीम के एक करीबी सूत्र के हवाले से दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौते के एक कथित ड्राफ्ट का सनसनीखेज खुलासा किया है। हालांकि, वाशिंगटन या तेहरान की ओर से अभी तक इस ड्राफ्ट की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, और इसे ईरान के शीर्ष नेतृत्व की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है।

इस लीक ड्राफ्ट में कुल 14 प्रमुख बिंदु शामिल हैं, जो पूरे मध्य-पूर्व (मिडल ईस्ट) की तस्वीर बदल सकते हैं।

लीक ड्राफ्ट की 5 सबसे बड़ी शर्तें

युद्ध पर पूर्ण विराम: सभी मोर्चों पर जारी युद्ध को तुरंत और स्थायी रूप से खत्म किया जाएगा, जिसमें लेबनान में चल रहा भीषण संघर्ष भी शामिल है।

प्रतिबंधों और नाकाबंदी से राहत: अमेरिका को 30 दिनों के भीतर नौसैनिक नाकाबंदी हटानी होगी। साथ ही ईरानी तेल पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों को निलंबित किया जाएगा।

होर्मुज स्ट्रेट को खोलना: वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण 'होर्मुज स्ट्रेट' को 30 दिनों के भीतर फिर से खोला जाएगा, जिसका संचालन ईरान की निगरानी में होगा।

फ्रीज फंड की बहाली: समझौते के तहत विभिन्न देशों में फ्रीज (रोके गए) ईरान के 24 अरब डॉलर (लगभग ₹2 लाख करोड़) के फंड को रिलीज करने का प्रस्ताव है।

परमाणु हथियार न बनाने का वादा: ईरान इस बात की लिखित प्रतिबद्धता दोहराएगा कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। बदले में अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत नहीं बढ़ाएगा।

$300 अरब का 'पुनर्निर्माण प्लान' और 60 दिनों की डेडलाइन

लीक रिपोर्ट के मुताबिक, यह समझौता सिर्फ प्रतिबंधों को हटाने तक सीमित नहीं है। ड्राफ्ट में मांग की गई है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की एक वृहद योजना तैयार करनी होगी।

इसके अलावा, दोनों देश 60 दिनों तक सघन बातचीत करेंगे ताकि परमाणु कार्यक्रम और सभी आर्थिक प्रतिबंधों को हमेशा के लिए हटाने पर एक अंतिम सहमति बन सके। इस पूरे समझौते की निगरानी के लिए एक विशेष तंत्र बनाया जाएगा और इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्ताव के जरिए अंतरराष्ट्रीय कानूनी मान्यता दिलाई जाएगी।

ईरान की पूर्व-शर्त: ड्राफ्ट के अनुसार, अंतिम वार्ता तब तक शुरू नहीं होगी जब तक कि अमेरिका ईरान का आधा फ्रीज फंड जारी नहीं कर देता, तेल प्रतिबंधों को सस्पेंड नहीं करता और नौसैनिक नाकाबंदी पूरी तरह नहीं हटा लेता।

ड्राफ्ट में क्या छूटा और क्या है सबसे बड़ी चुनौती?

मिसाइल कार्यक्रम पर चुप्पी: इस मसौदे की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसमें ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सशस्त्र संगठनों (जैसे हिज्बुल्लाह, हूती) को उसके समर्थन के मुद्दे को पूरी तरह से बाहर रखा गया है।

लेबनान संकट और इजराइल का रुख: इस संभावित समझौते की सफलता के आड़े लेबनान की मौजूदा स्थिति आ सकती है। हिज्बुल्लाह मांग कर रहा है कि इजराइली सेना लेबनान से पूरी तरह बाहर जाए, जबकि इजराइल ने साफ कर दिया है कि वह दक्षिणी लेबनान में अपना सैन्य अभियान जारी रखेगा। अप्रैल में हुआ युद्धविराम पहले ही बेअसर हो चुका है।

निष्कर्ष:

यदि इस ड्राफ्ट को दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी मिल जाती है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था, विशेषकर कच्चे तेल के बाजार और मध्य-पूर्व की शांति के लिए इस दशक का सबसे बड़ा घटनाक्रम साबित होगा। हालांकि, इजराइल के आक्रामक रुख को देखते हुए इस समझौते का जमीन पर उतरना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।

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