मुंबई।
महाराष्ट्र की राजनीति में क्षेत्रीय दलों के कांग्रेस में संभावित विलय को लेकर शुरू हुई बयानबाजी अब एक बड़े सियासी दंगल में बदल गई है। शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत द्वारा शरद पवार की एनसीपी (SP) और अन्य क्षेत्रीय दलों के कांग्रेस में विलय की वकालत करने पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कड़ा पलटवार किया है। सीएम फडणवीस ने कांग्रेस को एक 'डूबता हुआ जहाज' बताते हुए कहा कि कोई भी समझदार नेता खुद को डूबने के लिए उस पर सवार नहीं करेगा।
"बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना"
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बेहद आक्रामक अंदाज में मुहावरे का इस्तेमाल करते हुए संजय राउत पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिनका इन पार्टियों (कांग्रेस और एनसीपी) के आंतरिक फैसलों से कोई लेना-देना नहीं है, वही इस मामले में सबसे ज्यादा बयानबाजी कर रहे हैं।
भाजपा स्थिति पर रखे है नजर: सीएम फडणवीस ने ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शरद पवार की पार्टी के विलय की अटकलों पर तंज कसते हुए कहा, "कांग्रेस एक डूबता हुआ जहाज है और ये सभी समझदार नेता हैं, वे इस पर सवार नहीं होंगे। और यदि भविष्य में ऐसा कोई विलय होता भी है, तो इससे केवल भाजपा को ही राजनीतिक फायदा पहुंचेगा। हम पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।"
क्यों उठी विलय की बात? दलबदल का डर!
पर्दे के पीछे चल रही इस सियासी हलचल की वजह एनसीपी (SP) के भीतर की अंदरूनी कलह को माना जा रहा है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक:
विद्रोह रोकने की कवायद: शरद पवार अपनी पार्टी में एक और बड़े विद्रोह को रोकने के लिए कांग्रेस में विलय के विचार पर गंभीरता से विचार कर सकते हैं।
भाजपा के संपर्क में सांसद: एनसीपी (SP) के कुछ मौजूदा सांसदों के भाजपा के करीब आने की खबरें हैं, जो कभी भी पाला बदल सकते हैं। ऐसे में शरद पवार का यह संभावित कदम दलबदल को रोकने का एक आखिरी प्रयास हो सकता है।
कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं ने क्या कहा?
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब शिवसेना (UBT) के संजय राउत ने कहा कि शरद पवार को कांग्रेस से अलग होकर बनीं छोटी पार्टियों का मुख्य कांग्रेस में विलय कराने का नेतृत्व करना चाहिए। इस पर अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाएं इस प्रकार रहीं:
नाना पाटोले (प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष): उन्होंने दावा किया कि शरद पवार की तरफ से यह प्रस्ताव पहले ही दिया जा चुका था, लेकिन कुछ कारणों से इसमें देरी हो गई। देश की मौजूदा राजनीति में धर्मनिरपेक्ष विचारधारा वाले वोटों के बिखराव को रोकने के लिए सभी समान विचारधारा वाले दलों को एकजुट होना ही होगा।
सुप्रिया सुले (एनसीपी-एसपी नेता): उन्होंने इस प्रस्ताव को खारिज नहीं किया बल्कि इसे एक "अच्छा प्रस्ताव" बताया। हालांकि, आगे की रणनीति पर उन्होंने बेहद रहस्यमयी अंदाज में कहा— "पहले बारिश होने दीजिए, फिर देखेंगे कि छाता लेना है या रेनकोट।"
निष्कर्ष:
महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से पहले विपक्षी खेमे में चल रही विलय की यह सुगबुगाहट और उस पर मुख्यमंत्री फडणवीस का यह तीखा हमला साफ संकेत देता है कि आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में कई नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं।