नई दिल्ली।
देश में कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली बेहद महत्वपूर्ण दवाओं की भारी कमी को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा और नीतिगत कदम उठाया है। सरकार के दवा मूल्य नियामक 'नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी' (NPPA) ने दो प्रमुख प्लैटिनम-आधारित कैंसर दवाओं— सिस्प्लैटिन (Cisplatin) और कार्बोप्लैटिन (Carboplatin) की अधिकतम कीमत सीमा (Price Ceiling) को 50 फीसदी तक बढ़ा दिया है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से दवा कंपनियों के लिए उत्पादन करना फिर से व्यावहारिक होगा और बाजार में दवाओं की किल्लत दूर होगी।
अस्पतालों में दवाओं की कमी बनी बड़ी चिंता
पिछले कुछ महीनों से देश के कई सरकारी और निजी अस्पतालों में इन जीवनरक्षक कैंसर रोधी दवाओं की भारी कमी देखी जा रही थी। ओवरी (अंडाशय), फेफड़ों और ब्लैडर (मूत्राशय) समेत कई प्रकार के कैंसर के इलाज में इन दोनों दवाओं को रीढ़ की हड्डी माना जाता है। सरकारी अस्पतालों में इनकी अनुपलब्धता के कारण गरीब मरीजों का समय पर उपचार नहीं हो पा रहा था, जिससे उनके जीवन पर सीधा संकट मंडरा रहा था।
क्या होंगी नई कीमतें? (एक नजर में)
NPPA द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, संशोधित कीमतें (टैक्स के अलावा) इस प्रकार तय की गई हैं:
| दवा का नाम | पुरानी अधिकतम कीमत | नई अधिकतम कीमत (50% बढ़ोतरी के बाद) |
|---|---|---|
| सिस्प्लैटिन (Cisplatin) | ₹7.26 प्रति मिलीलीटर | ₹10.89 प्रति मिलीलीटर |
| कार्बोप्लैटिन (Carboplatin) | ₹60.49 प्रति मिलीलीटर | ₹90.74 प्रति मिलीलीटर |
क्यों बढ़ानी पड़ी कीमतें? प्लैटिनम की वैश्विक महंगाई जिम्मेदार
फार्मा विशेषज्ञों के अनुसार, यह संकट सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार और भू-राजनीतिक हालातों से जुड़ा हुआ है:
आयात पर निर्भरता: इन कैंसर रोधी दवाओं के निर्माण में मुख्य रूप से प्लैटिनम का इस्तेमाल होता है, जिसके लिए भारत काफी हद तक आयात पर निर्भर है।
वैश्विक आपूर्ति ठप: दक्षिण अफ्रीका जैसे दुनिया के प्रमुख उत्पादक देशों से आपूर्ति घटने और वैश्विक मांग बढ़ने के कारण कच्चे माल की लागत आसमान छूने लगी थी।
सप्लाई चेन पर असर: मध्य-पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों में बाधाओं ने भी लॉजिस्टिक्स और उत्पादन लागत को काफी बढ़ा दिया।
मजबूत सरकारी नियंत्रण और कम कीमत सीमा के कारण भारतीय दवा कंपनियों के लिए बढ़ती लागत के बीच इन दवाओं का निर्माण करना घाटे का सौदा साबित हो रहा था, जिससे उन्होंने उत्पादन कम या बंद कर दिया था।
दवा कंपनियों को प्रोत्साहन, 6 महीने बाद होगी समीक्षा
फार्मास्युटिकल उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि सरकार के इस फैसले से कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी। नई कीमतें बढ़ने के बाद अब कंपनियां उत्पादन को फिर से पुराने स्तर पर ले जाने के लिए प्रोत्साहित होंगी।
मरीजों की जेब पर पड़ने वाले असर और दवाओं की उपलब्धता की स्थिति को संतुलित रखने के लिए NPPA ने स्पष्ट किया है कि यह कीमत संशोधन फिलहाल एक बार के लिए ही किया गया है। सरकार अगले छह महीने बाद इस पूरे फैसले की दोबारा समीक्षा करेगी ताकि यह देखा जा सके कि जमीन पर दवाओं की आपूर्ति कितनी सुधरी है।