नई दिल्ली।
पिछले काफी समय से लगातार नए रिकॉर्ड बना रहे बुलियन मार्केट (सोना-चांदी बाजार) में अचानक एक बड़ा क्रैश (Gold-Silver Price Crash) देखने को मिला है। इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) और कमोडिटी मार्केट के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पिछले महज एक महीने के भीतर सोने की कीमतों में करीब ₹14,000 प्रति 10 ग्राम की जोरदार गिरावट आई है। वहीं, चांदी भी रिकॉर्ड ऊंचाई से ₹45,000 प्रति किलोग्राम से अधिक टूट चुकी है।
इस अप्रत्याशित गिरावट ने आम उपभोक्ताओं से लेकर बड़े निवेशकों तक को हैरान कर दिया है। बाजार में आए इस अचानक यू-टर्न को कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता ने 4 प्रमुख सवालों के जवाबों के जरिए बारीकी से समझाया है:
सवाल 1: सोने की कीमतों में इस लगातार गिरावट की बड़ी वजह क्या है?
एक्सपर्ट का जवाब: सोने पर इस समय कई वैश्विक और स्थानीय कारक एक साथ दबाव बना रहे हैं, जिसके कारण यह गिरावट थम नहीं रही है। इसके 4 मुख्य कारण हैं:
सख्त मौद्रिक नीतियां (Monetary Tightening): अमेरिकी फेडरल रिजर्व सहित दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक उच्च स्तर पर रखने की आशंकाओं के कारण सोने पर दबाव बढ़ा है।
मजबूत डॉलर इंडेक्स (Strong Dollar): अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मजबूत होने से निवेशकों का रुझान सोने से हटकर डॉलर की तरफ शिफ्ट हो रहा है।
महंगाई की चिंता: लगातार उच्च महंगाई के कारण केंद्रीय बैंकों का रुख आक्रामक बना हुआ है, जिसका सीधा नकारात्मक असर कीमती धातुओं पर दिख रहा है।
घरेलू मांग में 70% की गिरावट: भारतीय स्थानीय बाजार में पिछले एक महीने में सोने की फिजिकल डिमांड में लगभग 70% की भारी कमी आई है, जिसने कीमतों को नीचे खींचने का काम किया।
सवाल 2: सोने के मुकाबले चांदी में इतनी बड़ी गिरावट क्यों देखी जा रही है?
एक्सपर्ट का जवाब: चांदी सिर्फ एक कीमती धातु नहीं, बल्कि एक प्रमुख औद्योगिक कमोडिटी (Industrial Commodity) भी है। इसलिए इसमें गिरावट के पीछे औद्योगिक कारक ज्यादा हावी हैं:
ईरान-यूएस तनाव: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन और औद्योगिक गतिविधियों पर गहरा असर पड़ा है।
औद्योगिक मांग में कमी: वैश्विक अनिश्चितता के कारण दुनिया भर में औद्योगिक उत्पादन धीमा हुआ है, जिससे फैक्ट्रियों में चांदी की खपत लगातार घट रही है।
गोल्ड का असर: चांदी हमेशा सोने के रुख का अनुसरण करती है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने में बड़ी बिकवाली चल रही है, इसलिए चांदी भी उसी राह पर चल पड़ी है।
सवाल 3: क्या बाजार में दोबारा तेजी या रिकवरी की कोई उम्मीद है?
एक्सपर्ट का जवाब: वर्तमान में बुलियन मार्केट वास्तविक मांग-अपूर्ति के आधार पर नहीं, बल्कि पूरी तरह भू-राजनीतिक परिस्थितियों और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों के इशारे पर चल रहा है।
हालांकि, भारत में आगामी त्योहारी और शादियों का सीजन (अगस्त से दिसंबर के बीच) शुरू होते ही सोने और चांदी की घरेलू मांग में एक बार फिर बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है। जैसे ही यह त्योहारी मांग वापस लौटेगी, कीमतों को निचला स्तर बनाने में मदद मिलेगी और वहां से दोबारा शानदार रिकवरी की उम्मीद की जा सकती है।
सवाल 4: आगामी समय में सोने-चांदी के क्या स्तर (Levels) दिख सकते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में बाजार का अनुमानित आउटलुक इस प्रकार रहने की उम्मीद है:
| धातु | अंतरराष्ट्रीय बाजार (प्रत्याशित स्तर) | भारतीय घरेलू बाजार (प्रत्याशित स्तर) |
|---|---|---|
| सोना (Gold) | $3,800 से $4,000 | ₹1,20,000 से ₹1,25,000 (प्रति 10 ग्राम) |
| चांदी (Silver) | $56 से $60 | ₹2,10,000 से ₹2,20,000 (प्रति किलोग्राम) |
आज (12 जून) का सोने-चांदी का रेट क्या है?
घरेलू बाजार में इस भारी गिरावट के बाद भी मौजूदा कीमतें पिछले वर्षों के मुकाबले ऊंचे स्तर पर टिकी हुई हैं:
24 कैरेट सोना: करीब ₹1.50 लाख से ₹1.60 लाख प्रति 10 ग्राम।
22 कैरेट सोना: करीब ₹1.35 लाख से ₹1.45 लाख प्रति 10 ग्राम।
चांदी का भाव: करीब ₹2.3 लाख से ₹2.5 लाख प्रति किलोग्राम के आसपास बना हुआ है।
निवेशकों के लिए एक्सपर्ट की सलाह: इस मौजूदा भारी उतार-चढ़ाव को देखकर निवेशकों को घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। सोने और चांदी का लॉन्ग-टर्म ट्रेंड (Long Term Trend) अभी भी पूरी तरह से पॉजिटिव और मजबूत दिखाई दे रहा है। वर्तमान में जो निवेशक पोजीशन बनाए हुए हैं, वे उसे होल्ड रखें। वहीं, नए खरीदारों के लिए कम कीमतों पर धीरे-धीरे खरीदारी (Buy on Dips) करने का यह एक बेहतरीन मौका साबित हो सकता है।