कोलकाता/आसनसोल।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और दिग्गज अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने पार्टी के भीतर अपने "विद्रोही" समूह में शामिल होने की खबरों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। पिछले कुछ दिनों से उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर चल रही तेज अटकलों पर विराम लगाते हुए आसनसोल के सांसद ने स्पष्ट किया है कि वह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी का साथ कभी नहीं छोड़ेंगे।
सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ था विवाद
दरअसल, इस पूरे विवाद और अटकलों की शुरुआत शत्रुघ्न सिन्हा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर किए गए एक पोस्ट से हुई थी।
पीएम मोदी की तारीफ: शत्रुघ्न सिन्हा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने के रिकॉर्ड पर बधाई दी थी। उन्होंने लिखा था— “सच्ची खेल भावना के साथ, हमारे मित्र और राष्ट्र के मार्गदर्शक माननीय प्रधानमंत्री को उनके 12 वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर हार्दिक शुभकामनाएं।”
ममता बनर्जी को किया टैग: दिलचस्प बात यह थी कि धुर विरोधी होने के बावजूद सिन्हा ने पीएम मोदी की तारीफ वाले इस पोस्ट में ममता बनर्जी को भी टैग कर दिया था, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में उनके पाला बदलने की चर्चाएं शुरू हो गईं।
"काकोली घोष दस्तीदार के विद्रोही खेमे से मेरा कोई लेना-देना नहीं"
पीएम मोदी की तारीफ के साथ-साथ मीडिया में यह खबरें भी तैरने लगी थीं कि टीएमसी के भीतर असंतुष्ट सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को एक पत्र सौंपा है, जिस पर शत्रुघ्न सिन्हा के भी हस्ताक्षर हैं।
इन खबरों का पुरजोर खंडन करते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा:
"मेरे बारे में बहुत कुछ मनगढ़ंत कहा जा रहा है। कुछ लोग कह रहे हैं कि मैं सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले विद्रोही समूह का हिस्सा हूं। यह सब पूरी तरह झूठ है। जब मेरा मुश्किल समय था, तब ममता बनर्जी मेरे साथ मजबूती से खड़ी रहीं। अब जब भी कठिन समय आएगा, मैं भी दीदी के साथ वफादारी से खड़ा रहूंगा।"
उन्होंने आगे जोड़ा कि वह ममता बनर्जी के व्यक्तिगत अनुरोध पर ही आसनसोल से लोकसभा चुनाव लड़ने आए थे, इसलिए "दीदी को छोड़ने" का सवाल ही पैदा नहीं होता।
शत्रुघ्न सिन्हा का राजनीतिक सफर (एक नजर में)
| समय | राजनीतिक दल | मुख्य भूमिका / घटनाक्रम |
|---|---|---|
| शुरुआती दौर | भारतीय जनता पार्टी (BJP) | दशकों तक प्रमुख चेहरा रहे, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री बने। |
| 2019 | कांग्रेस (INC) | वैचारिक मतभेदों के बाद भाजपा छोड़ी। पटना साहिब से कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। |
| 2022 | तृणमूल कांग्रेस (TMC) | ममता बनर्जी की पार्टी में शामिल हुए और आसनसोल लोकसभा उपचुनाव में बंपर जीत हासिल की। |
| 2024 | तृणमूल कांग्रेस (TMC) | आम चुनावों में एक बार फिर टीएमसी के टिकट पर आसनसोल सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। |
निष्कर्ष:
शत्रुघ्न सिन्हा के इस तीखे और स्पष्ट रुख के बाद टीएमसी के भीतर बगावत की खबरों को हवा देने वाली अटकलों पर फिलहाल पूरी तरह से पानी फिर गया है। 'शॉटगन' के नाम से मशहूर सिन्हा ने साफ कर दिया है कि उनकी राजनीतिक निष्ठा अब पूरी तरह से 'दीदी' के प्रति समर्पित है।