नई दिल्ली, 12 जून। भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक बार फिर इतिहास रचते हुए अपनी सामरिक शक्ति का लोहा मनवाया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और समुद्री खतरों से निपटने के लिए कई अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीकों का सफल परीक्षण किया है। 10 और 11 जून को किए गए लगातार तीन फ्लाइट टेस्ट में भारत की मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) प्रणाली ने अपने लक्ष्यों को हवा में ही सफलतापूर्वक नेस्तनाबूद कर दिया।
इस कामयाबी के साथ ही भारत अब दुश्मन की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) श्रेणी के घातक खतरों को भी मार गिराने में पूरी तरह सक्षम हो गया है। भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा 'एलीट' देशों की कतार में शामिल हो गया है जिनके पास ऑपरेशनल स्तर की मिसाइल रक्षा क्षमता उपलब्ध है।
बदलती चुनौतियों के लिए तैयार 'मल्टी-लेयर्ड डिफेंस'
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इन परीक्षणों के दौरान इंटरसेप्टर मिसाइलों ने अपने-अपने टारगेट को सटीकता से निशाना बनाया। अत्याधुनिक और नई टेक्नोलॉजी से बने इस लेयर्ड डिफेंस सिस्टम को भविष्य के बदलते मिसाइल खतरों का मुकाबला करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। इससे पहले भी भारत ने फेज-II BMD सिस्टम का सफल परीक्षण किया था, जहां दुश्मन की मिसाइल को रडार से ट्रैक कर हवा में ही मार गिराने की क्षमता को परखा गया था।
समंदर में बढ़ेगी धाक: 'नेवल एंटी-शिप मिसाइल' का पहला टेस्ट
बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) के अलावा, इस बार भारत ने अपनी नौसैनिक ताकत को भी नया पंख दिया है। परीक्षण के दौरान नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NASM-MR) का पहला फ्लाइट टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा किया गया। यह स्वदेशी मिसाइल भारतीय नौसेना की समुद्री स्ट्राइक और तटीय रक्षा क्षमताओं को अभेद्य बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ी छलांग है।
डीआरडीओ और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में यह उड़ान परीक्षण संपन्न हुआ। डीआरडीओ के चेयरमैन राजेश कुमार सिंह ने इस पूरी प्रक्रिया की बारीकी से समीक्षा की और इसमें शामिल सभी वैज्ञानिकों व सैन्य टीमों के बेहतरीन तालमेल की सराहना की।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी बधाई
इस ऐतिहासिक मील के पत्थर पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO को बधाई दी।
रक्षा मंत्री ने अपने संदेश में कहा:
"इस परीक्षण में हमारी मल्टी-लेयर्ड BMD क्षमता का शानदार प्रदर्शन हुआ है। ऐसी ऐतिहासिक तरक्की से भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और मजबूत होगी। साथ ही, यह अहम रक्षा क्षेत्रों में टेक्नोलॉजी के मामले में आत्मनिर्भर भारत की आत्मनिर्भरता को और दृढ़ करेगी।"
यह सफल परीक्षण साफ तौर पर दर्शाता है कि भारत अब न केवल अपनी सीमाओं को सुरक्षित रखने में आत्मनिर्भर हो रहा है, बल्कि भविष्य की किसी भी आधुनिक सुरक्षा चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।