'जिनके आंसू सूखे, वे हमसे पानी की उम्मीद न करें': पाकिस्तान को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की दोटूक चेतावनी

सीमा पार आतंकवाद बंद होने तक निलंबित रहेगी सिंधु जल संधि; हैदराबाद में बोले रक्षा मंत्री— आतंक के संरक्षकों को नहीं देंगे नदी का पानी।

13 Jun 2026  |  37

 

 

हैदराबाद, 13 जून। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सीमा पार आतंकवाद को लेकर पड़ोसी देश पाकिस्तान को अब तक का सबसे कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। हैदराबाद में आयोजित एक 'बुद्धिजीवी सम्मेलन' को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने दोटूक शब्दों में कहा कि जब तक पाकिस्तान अपनी जमीन से पनपने वाले आतंकवाद को पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक भारत सिंधु नदी का पानी आतंक के संरक्षकों तक नहीं पहुंचने देगा। उन्होंने साफ किया कि आतंकवाद और जल-बंटवारा समझौता अब एक साथ नहीं चल सकते।

रक्षा मंत्री ने इस दौरान भारत के कड़े रुख को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि जो देश शांति और सद्भाव की भाषा नहीं समझते, उन्हें उनकी ही भाषा में जवाब देना भारत बखूबी जानता है।

'ऑपरेशन सिंदूर' और पहलगाम हमले का जिक्र

अपने संबोधन के दौरान राजनाथ सिंह ने पिछले दिनों हुए पहलगाम आतंकी हमले और उसके जवाब में भारत द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई 'ऑपरेशन सिंदूर' का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने इस ऑपरेशन के जरिए अपनी सैन्य संप्रभुता और इच्छाशक्ति का प्रदर्शन दुनिया के सामने किया है।

सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty - IWT) को निलंबित किए जाने के ऐतिहासिक कूटनीतिक फैसले को दोहराते हुए रक्षा मंत्री ने कहा:

"पहलगाम आतंकी हमले के बाद, सिंधु जल संधि (IWT) को निलंबित करके हमने स्पष्ट संदेश दे दिया था कि जिनके (पीड़ितों के) आंसू अभी सूखे भी नहीं हैं, वे हमसे पानी की उम्मीद बिल्कुल न करें। हम मानवता के दुश्मनों और आतंकवादियों के आकाओं को अपनी नदियों का पानी पीने नहीं देंगे।"

'खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते'

रक्षा मंत्री का यह आक्रामक बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस प्रसिद्ध नीति का सीधा पुनरावलोकन है, जिसमें उन्होंने साफ कहा था कि "खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।" भारत ने अब पानी को पाकिस्तान के खिलाफ एक बड़े 'रणनीतिक हथियार' (Strategic Tool) के रूप में इस्तेमाल करने के संकेत दे दिए हैं।

बयान के मुख्य बिंदु और सामरिक कूटनीति:

कड़ा कूटनीतिक प्रहार: जल संधि का निलंबन पाकिस्तान की कृषि और अर्थव्यवस्था की रीढ़ पर सीधा प्रहार है।

शर्तों पर ही होगी बात: जब तक आतंकवाद पर पूरी तरह लगाम नहीं लगती, पानी और व्यापार जैसे द्विपक्षीय मुद्दों पर कोई रियायत नहीं मिलेगी।

बदलता भारत: यह बयान दर्शाता है कि भारत अब रक्षात्मक नीति छोड़ 'प्रो-एक्टिव' (आक्रामक और अग्रगामी) कूटनीति पर काम कर रहा है।

रक्षा मंत्री के इस कड़े रुख से यह साफ हो गया है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलग-थलग पड़ चुके पाकिस्तान के लिए आने वाले दिन और भी मुश्किलों भरे होने वाले हैं, क्योंकि भारत अब उसकी हर नापाक हरकत का जवाब सीमा से लेकर समंदर और नदियों के पानी तक देने के लिए तैयार है।

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