बांग्लादेश में गहराया राम प्रतिमा विवाद: कट्टरपंथियों के आगे झुका प्रशासन? तस्लीमा नसरीन ने उठाए तीखे सवाल

दुनिया की सबसे बड़ी राम प्रतिमा के निर्माण पर लगी रोक; भड़का अल्पसंख्यक मानवाधिकार संगठन, कहा— 'धमकियां बंद न हुईं तो बिगड़ेगा सांप्रदायिक सौहार्द्र'।

13 Jun 2026  |  122

 

 

ढाका, 13 जून। पड़ोसी देश बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय और उनके धार्मिक स्थलों को निशाना बनाए जाने का एक नया और गंभीर मामला सामने आया है। बांग्लादेश के सबसे बड़े अल्पसंख्यक मानवाधिकार संगठन 'बांग्लादेश हिंदू बुद्धिस्ट क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल' ने देश में बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा, जबरन वसूली और धार्मिक स्थलों को मिल रही धमकियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

ताजा विवाद गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी उपजिला स्थित ऐतिहासिक श्री राधा गोविंद और काली मंदिर परिसर में प्रस्तावित भगवान राम की एक विशाल प्रतिमा के निर्माण को लेकर है। इस परियोजना को दुनिया की सबसे बड़ी भगवान राम की प्रतिमा के रूप में आकार दिया जा रहा था, जिस पर अब स्थानीय प्रशासन ने रोक लगा दी है।

इस्लामिक संगठनों के दबाव में लिया गया फैसला?

मंदिर के मुख्य सलाहकार श्यामल कुमार महंत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस प्रशासनिक रोक की पुष्टि की। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों और आलोचकों का साफ तौर पर आरोप है कि प्रशासन ने यह कदम कुछ कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों के भारी दबाव और मंदिर को ढहाने की कथित धमकियों के बाद उठाया है। इस फैसले के बाद से ही पूरे इलाके में तनाव और विवाद गहरा गया है।

इस घटनाक्रम पर कड़ा आक्रोश जताते हुए 'हिंदू बुद्धिस्ट क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल' की केंद्रीय समिति ने ढाका में आयोजित बैठक में कहा:

"सरकार, प्रशासन, नागरिक समाज और राजनीतिक दल तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करें। सांप्रदायिक नफरत और उकसावे को बढ़ावा देने वाले तत्वों के खिलाफ यदि सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो देश की सांप्रदायिक शांति और सौहार्द्र व्यवस्था पूरी तरह छिन्न-भिन्न हो जाएगी।"

तस्लीमा नसरीन का तीखा प्रहार: 'लाखों मस्जिदें मंजूर, तो राम प्रतिमा से परहेज क्यों?'

इस पूरे विवाद पर निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका और जानी-मानी मानवाधिकार कार्यकर्ता तस्लीमा नसरीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर बांग्लादेशी समाज की इस सोच पर तीखा हमला बोला है।

तस्लीमा नसरीन ने अपनी पोस्ट में लिखा:

"बांग्लादेश में पहले से ही लाखों मस्जिदें मौजूद हैं और लगातार नई मस्जिदों का निर्माण भी हो रहा है। ऐसे में एक राम मंदिर या भगवान राम की प्रतिमा के निर्माण का इतना हिंसक विरोध क्यों किया जा रहा है?"

अल्पसंख्यक संगठनों ने दी बड़े तनाव की चेतावनी

अल्पसंख्यक अधिकार संगठनों ने स्पष्ट रूप से आगाह किया है कि यदि ऐसे गंभीर मामलों पर समय रहते कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे देश में सांप्रदायिक तनाव और अधिक भड़क सकता है। संगठन ने सरकार से मांग की है कि वह अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए सभी धार्मिक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करे तथा बहुसंख्यकों के दबाव में आकर अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन होने से रोके।

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