ईरान का खतरनाक दांव: आधा टन संवर्धित यूरेनियम वाली सुरंगें कीं ध्वस्त, एंट्री पॉइंट्स पर बिछाईं बारूदी सुरंगें

अमेरिकी खुफिया सूत्रों का दावा— ट्रंप के सैन्य एक्शन के डर से उठाया कदम; खतरे में पड़ सकती है अमेरिका-ईरान न्यूक्लियर डील।

13 Jun 2026  |  128

 

 

वाशिंगटन/तेहरान, 13 जून। अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले संभावित शांति समझौते से ठीक पहले खाड़ी क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाली और सनसनीखेज खबर आ रही है। अमेरिकी खुफिया सूत्रों के अनुसार, ईरान ने अपने परमाणु ठिकानों में मौजूद लगभग आधा टन (500 किलोग्राम) 'हाईली एनरिच्ड' (उच्च संवर्धित) यूरेनियम भंडार को हमेशा के लिए लॉक करने के लिए एक बेहद आत्मघाती कदम उठाया है। ईरान ने उन भूमिगत सुरंगों को जानबूझकर विस्फोट से ध्वस्त कर दिया है जहाँ यह परमाणु सामग्री रखी गई थी। इतना ही नहीं, इन सुरंगों के सभी एंट्री पॉइंट्स पर घातक बारूदी सुरंगें (Land Mines) भी बिछा दी गई हैं।

CNN की एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, इस कदम के बाद अब उस खतरनाक यूरेनियम तक पहुँचना खुद ईरान और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के लिए पहले की तुलना में कहीं ज्यादा मुश्किल, जोखिम भरा और समय लेने वाला हो गया है।

डोनाल्ड ट्रंप के सैन्य हमले के डर से लिया फैसला?

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस संभावित चेतावनी के बाद उठाया है, जिसमें उन्होंने संकेत दिया था कि अमेरिका इस परमाणु सामग्री को अपने कब्जे में लेने के लिए किसी भी वक्त सर्जिकल या सैन्य स्ट्राइक कर सकता है।

गौरतलब है कि इस समय अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए फिर से खोलने को लेकर गुप्त बातचीत चल रही है। इस संभावित डील में ईरान के संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर हटाने और उसे नष्ट करने की शर्त भी शामिल है।

इस्फहान की सुरंगों में कैद 'परमाणु बारूद'

अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसियों का मानना है कि यूरेनियम का यह सबसे खतरनाक और बड़ा हिस्सा मध्य ईरान में स्थित इस्फहान परमाणु सुविधा (Isfahan Nuclear Facility) की भूमिगत सुरंगों में छिपाकर रखा गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मई महीने में ही अमेरिकी रक्षा मुख्यालय (पेंटागन) ने इस परमाणु सामग्री को अपने नियंत्रण में लेने के लिए एक गुप्त सैन्य अभियान का ब्लूप्रिंट तैयार किया था, लेकिन अत्यधिक जोखिम और परमाणु रिसाव (Nuclear Leak) के खतरे को देखते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने इस ऑपरेशन को अंतिम मंजूरी नहीं दी थी।

परमाणु समझौते की राह में खड़ी हुई बड़ी बाधा

पूर्व अमेरिकी न्यूक्लियर एक्सपर्ट स्कॉट रोएकर का कहना है कि ईरान के इस कदम से भविष्य की न्यूक्लियर डील खटाई में पड़ सकती है।

विशेषज्ञों ने निम्नलिखित दो बड़ी आशंकाएं जताई हैं:

निरीक्षण में धोखाधड़ी: ईरान भविष्य में यह बहाना बना सकता है कि ध्वस्त सुरंगों के कारण कुछ यूरेनियम तक पहुँचना अब तकनीकी रूप से संभव नहीं है। इसकी आड़ में वह गुप्त रूप से परमाणु बम बनाने योग्य सामग्री छिपा सकता है।

लंबी और जटिल प्रक्रिया: यदि समझौता हो भी जाता है, तो भारी मशीनों से मलबे को हटाने और बारूदी सुरंगों को डिफ्यूज करने में महीनों का समय लगेगा। राष्ट्रपति ट्रंप के मुताबिक, जिस काम को दो हफ्ते में पूरा होना था, उसमें अब लंबा वक्त लग सकता है।

ईरान का कहना है कि शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद ही वह अगले 60 दिनों तक अपने परमाणु कार्यक्रम के भविष्य पर आगे की बातचीत करेगा। बहरहाल, ईरान की इस 'सुरंग कूटनीति' ने वाशिंगटन से लेकर संयुक्त राष्ट्र तक हड़कंप मचा दिया है।

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