'तन्हा दिल' से सफलता के शिखर तक: मशहूर सिंगर शान ने बयां किया 13 साल की उम्र का वो संघर्ष, जब घर चलाने के लिए बेचे केबल कनेक्शन

"यादों में पापा आज भी जवान हैं..." सुरों के सरताज शान ने खोला अपनी जिंदगी का वो पन्ना, जिसने उन्हें बिखरने नहीं, निखरने की ताकत दी।

13 Jun 2026  |  140

 

 

मुंबई। 'चांद सिफारिश', 'जब से तेरे नैना' और 'बम बम बोले' जैसे अनगिनत सुपरहिट गानों से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले प्लेबैक सिंगर शान आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। अपनी जादुई आवाज और सदाबहार मुस्कान के लिए मशहूर शान ने सफलता का यह मुकाम बेहद कम उम्र में बड़े संघर्षों को झेलकर हासिल किया है। हाल ही में 'ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे' को दिए एक भावुक इंटरव्यू में शान ने अपनी जिंदगी के उस सबसे मुश्किल दौर को याद किया, जिसने उन्हें वक्त से पहले बड़ा बना दिया।

महज 13 की उम्र में सिर से उठा पिता का साया

शान ने बताया कि जब वे केवल 13 वर्ष के थे, तब उनके पिता का निधन हो गया था। इस अचानक आए सदमे और कम उम्र में मिली जिम्मेदारियों ने जिंदगी को देखने का उनका नजरिया हमेशा के लिए बदल दिया। पिता को याद करते हुए शान ने कहा:

"मैं ऐसा इंसान नहीं हूं जो लंबे समय तक दुख में डूबा रहे। पापा का निधन गुरुवार को हुआ था और शनिवार तक मैं फिर से बास्केटबॉल खेल रहा था। लेकिन आज 40 साल बाद भी मैं अक्सर अपने पिता को सपनों में देखता हूं। मैं उस उम्र से भी 10 साल बड़ा हो चुका हूं, जितनी उम्र में मेरे पिता दुनिया छोड़ गए थे। जैसे-जैसे मेरी उम्र बढ़ रही है, मेरी यादों में पापा हमेशा जवान बने हुए हैं।"

ट्यूशन पढ़ाने से लेकर बुटीक में कपड़े बेचने तक का सफर

पिता के जाने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए शान और उनकी बहन ने बेहद कम उम्र में काम करना शुरू कर दिया था, ताकि सारा बोझ उनकी मां पर न आए। शान ने बताया कि उनके पिता फिल्मों में संगीत से जुड़े थे, लेकिन वे पैसों को लेकर ज्यादा गंभीर नहीं थे। ऐसे में उनकी मां ने चट्टान की तरह खड़े होकर पूरे परिवार को संभाला। शान ने अपनी मां को एक बेहद मजबूत और आत्मसम्मान से भरी महिला बताया।

घर चलाने और अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए शान ने हर छोटा-बड़ा काम किया। उन्होंने बताया:

बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया: पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को कोचिंग दी।

केबल टीवी कनेक्शन बेचे: उस दौर में केबल टेलीविजन नया-नया आया था, शान घर-घर जाकर कनेक्शन बेचते थे और कमीशन कमाते थे।

बुटीक में किया काम: उन्होंने 'लुक्स' नाम की एक कपड़ों की बुटीक में सेल्समैन के तौर पर भी काम किया।

जब आवाज बदलने पर छूट गया था काम

बचपन में जिंगल्स गाने वाले शान ने कभी नहीं सोचा था कि वे भविष्य में एक पेशेवर गायक बनेंगे। उन्होंने बताया कि बचपन में लड़कियों जैसी पतली आवाज की मांग ज्यादा होती थी, लेकिन 12-13 साल की उम्र में जब उनकी आवाज भारी होने लगी (वॉइस चेंज फेज), तो उन्हें काम मिलना बंद हो गया।

इसके बाद 16-17 साल की उम्र में उन्हें दोबारा गाने के मौके तो मिले, लेकिन तब भी वे इसे करियर नहीं, बल्कि जेबखर्च और पैसे कमाने का जरिया ही मानते थे। ट्यूशन, बुटीक के काम और कॉलेज की पढ़ाई के बीच वे वक्त निकालकर गा लिया करते थे। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि एक दिन वे देश के सबसे पसंदीदा सिंगर्स में शुमार होंगे।

'तन्हा दिल' ने रातों-रात बनाया स्टार

शान के ऐतिहासिक करियर पर नजर डालें तो:

1989: फिल्म 'परिंदा' से उन्होंने प्लेबैक सिंगिंग की दुनिया में कदम रखा।

1995: उनका पहला रीमिक्स एल्बम 'क्यू-फंक' रिलीज हुआ, जिसे काफी पसंद किया गया।

बॉलीवुड ब्रेक: फिल्म 'प्यार में कभी-कभी' का गाना 'मुसु मुसु हासी' उनका पहला बड़ा फिल्मी हिट साबित हुआ।

2000: उनका सोलो एल्बम 'तन्हा दिल' रिलीज हुआ, जिसने सफलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और शान को रातों-रात एक सुपरस्टार सिंगर बना दिया।

शान की यह कहानी बयां करती है कि फर्श से अर्श तक का सफर आसान नहीं होता, लेकिन मजबूत इरादे और मां के आशीर्वाद से हर मुश्किल राह को आसान बनाया जा सकता है।

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